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भ्रष्टाचार पर वार: ‘ACB की जांच मामले में 1 हफ्ते में रिपोर्ट दें नगर आयुक्त’

Ranchi: रांची नगर निगम ( Ranchi Nagar Nigam ) में कथित भ्रष्टाचार की शिकायत मिलने के बाद भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ( ACB ) की एक टीम ने विगत 26 फरवरी को निगम में छापा मारा था. छापेमारी में एसीबी की टीम को हर जगह अनियमितता भी मिली थी. अब नगर विकास विभाग सचिव विनय चौबे ने एसीबी द्वारा उठाई गई आपत्तियों पर नगर आयुक्त से जवाब मांगा है. यह जवाब अगले 1 सप्ताह में देने का निर्देश मिला है. सचिव ने कहा है कि निगम द्वारा मिले जवाब को मंत्रिमंडल सचिवालय एवं निगरानी विभाग को अवगत कराया जाएगा.

सीएम के निर्देश पर एसीबी ने मारा था छापा

गौरतलब है कि 26 फरवरी को भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो की विशेष जांच दल ने निगम कार्यालय में छापा मारा था. छापे में टीम को जांच में कई अनियमितता मिली थी. इसके बाद एसीबी ने एक रिपोर्ट तैयार की थी. जिसे एसीबी मुख्यालय और संबंधित विभाग को उपलब्ध कराने की बात कही गई थी. यह कार्रवाई मुख्यमंत्री ( CM Heman Soren ) के निर्देश के बाद की गई थी.

छापा निगम द्वारा नागरिकों को राइट टू सर्विस एक्ट के तहत दिए जाने वाली सेवाओं की हकीकत जानने के लिए किया गया था. इस दौरान एसीबी की टीम को कई गड़बड़ियां मिली थी. अब उन्हीं गड़बड़ियों पर रांची नगर निगम से जवाब मांगा गया है.

जांच में मिली थी कई अनियमितता

एसीबी की टीम को निगम के कई शाखा जाकर रजिस्टरों की जांच की थी. इस दौरान टीम को कई अनियमितता देखने को मिली थी.

 

नक्शा शाखा में अनियमितता

एसीबी टीम को नक्शा शाखा में नक्शा पास कराने से जुड़ी ऑनलाइन और ऑफलाइन प्रक्रिया में काफी अनियमितता मिली थी. शाखा में निगम के पदाधिकारियों द्वारा राइट टू सर्विस एक्ट का उल्लंघन करने का मामला सामने आया था. टीम को पता चला था कि कई नक्शे को पहले रिजेक्ट किया गया, फिर बिना कोई नया कागजात जमा कराएं ही संबंधित अधिकारी द्वारा नक्शा जारी कर दिया गया.

जल आपूर्ति शाखा में अनियमितता

एसीबी की टीम ने जलापूर्ति शाखा की फाइलों की जांच की गई. जांच में पता चला कि मरम्मत हेतु आवेदकों द्वारा जो आवेदन प्राप्त होते हैं, उन आवेदनों पर नाम, पता तो अंकित रहता है पर तिथि नहीं होती है. इसके कारण आवेदक यह दावा नहीं कर पाता है कि उसने कब आवेदन दिया है और नगर निगम ने कब क्या कार्यवाही की.

जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र शाखा

एसीबी की टीम ने जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र की भी जांच की. पता चला कि प्रमाण पत्र बनवाने हेतु कई दलाल सक्रिय है. दलाल आवेदकों से मोटी रकम लेकर जन्म प्रमाण पत्र बनवाने का ठेका लेते है. आवेदक बार-बार दफ्तर का चक्कर लगाने से बचने के लिए इन दलालों का सहारा लेते हैं.

होर्डिंग संबंधित मामले

होर्डिंग मामले में जांच के दौरान एसीबी की टीम को पता चला था कि होर्डिंग लगाने के लिए उपभोक्ताओं द्वारा रजिस्टर्ड एजेंसी से मिली-भगत कर छोटा होर्डिंग लगाने का शुल्क दिया जाता है. बाद में उसके स्थान पर अवैध तरीके से बड़ा होर्डिंग लगा दिया जाता है. इससे सरकार को तो राजस्व की काफी हानि होती थी. संबंधित पदाधिकारी/सिटी मैनेजर अवैध धन की उगाही भी करते है.

एनफोर्समेंट से संबंधित मामले

एनफोर्समेंट से संबंधित रजिस्टर मेनटेन नहीं किया गया था. इसका कारण यह था कि एनफोर्समेंट से संबंधित कितने मामले सामने आये और कितने का निपटारा हो पाया था.

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