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#JPSC – छठी सिविल सेवा परीक्षा का 6 साल में तीन बार निकाला रिजल्ट, नहीं सुलझा आरक्षण संबंधी विवाद

Ranchi:  झारखंड लोक सेवा आयोग द्वारा ली गयी छठी सिविल सेवा परीक्षा अपने पहले परिणाम से ही विवादों में रही है. अब तक तीन बार रिजल्ट प्रकाशित किया जा चुका है. पहली बार का पीटी परीक्षा का परिणाम 5138 था, तीसरी बार जारी होते बढ़कर 34 हजार हो गया. हालांकि हाइकोर्ट ने 34 हजार रिजल्ट को रद्द कर दिया है. पर जेपीएससी ने हर बार प्रकाशित रिजल्ट में आरक्षण के नियमों का पालन नहीं किया है.

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गौरतलब हो कि छठी जेपीएससी परीक्षा को लेकर विवाद 23 फरवरी 2017 को आयोग के द्वारा 5138 पीटी का रिजल्ट जारी करने से शुरू होता है. इस रिजल्ट में आरक्षण दिया जाता है, जिसके कारण आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थी सामान्य वर्ग के कट ऑफ मार्क्स के बराबर या उससे अधिक अंक लाने पर भी अपने ही वर्ग में रखे जाते हैं.

छात्र आंदोलन के बाद सरकार एक संकल्प (5562, तारीख-19.04.17) लाती है और उस पर कोर्ट की सहमति प्राप्त करती है. इस संकल्प के बाद जेपीएससी के द्वारा 6103 दूसरा पीटी का संशोधित रिजल्ट जारी किया जाता है. लेकिन जेपीएससी द्वारा जारी दूसरे संशोधित रिजल्ट (6103) पर भी विवाद हो जाता है.

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इस वजह से हुआ विवाद

दूसरी बार प्रकाशित सिविल सेवा परीक्षा के परिणाम में विवाद का मुख्य कारण सामान्य का 15.92 गुणा, एसटी का 15.18 गुणा, एससी  का 15.59 गुणा, बीसी वन का 39.62 गुणा तथा बीसी टू का 261 गुणा रिजल्ट जारी होना होता है.

अत: यह परिणाम भी विवादों में आता है. रिजल्ट में आरक्षण का मामला विधानसभा में भी उठता है. सदन में माननीय मुख्यमंत्री रघुवर दास आश्वासन देते हैं कि हमारी सरकार आरक्षण के मुद्दे पर निर्णायक निर्णय लेगी. मुख्यमंत्री रघुवर दास के आश्वासन के बाद माननीय मंत्री अमर कुमार बाउरी की अध्यक्षता में एक नियोजन समिति का गठन किया जाता है.

इसके बाद 29 जनवरी 2018 से होने वाली छठी जेपीएससी मुख्य परीक्षा आरक्षण के नियमों तथा 15 गुणा रिजल्ट की शर्तो का पालन न करने के कारण मुख्य परीक्षा पर रोक लगा दी जाती है. मुख्य परीक्षा रोकने के हफ्ता दिन बाद ही नेतरहाट कैबिनेट का आयोजन होता है.

जहां यह फैसला लिया जाता है कि छठी जेपीएससी पीटी में वैसे सभी अभ्यर्थी को पास माना जायेगा. जिन्होंने अपने-अपने कोटे में न्यूनतम अहर्तांक प्राप्त किया हो. अमर कुमार बाउरी समिति राज्य सरकार से प्रारंभिक परीक्षा के स्तर से ही आरक्षण बहाल करने का अनुरोध करती है, लेकिन सरकार समिति की संस्तुतियों को लागू नहीं करती है.

इसके बाद सरकार के संकल्प (1153 तारीख -12.02.2018) के आधार पर तथा पंकज पांडेय वाद में कोर्ट के आदेश के बाद जेपीएससी के द्वारा तीसरी बार 34,634 संशोधित पीटी का रिजल्ट जारी किया जाता है.

छात्रों के बीच जारी है असंतुष्टि

हाइकोर्ट के द्वारा नेतरहाट कैबिनेट के निर्णय को निरस्त करते हुए 21 अक्टूबर 2019 को हाई कोर्ट अपने फैसले में 34,634 रिजल्ट को रद्द कर 6103 अभ्यर्थियों (दूसरा संशोधित रिजल्ट) का मुख्य परीक्षा का रिजल्ट जारी करने का आदेश देती है.

लेकिन वर्तमान में छात्रों के बीच इस बात को लेकर असंतोष है कि छठी जेपीएससी पीटी परीक्षा में अभी भी आरक्षण के नियमों का पालन नहीं हो सका है. छात्र चाहते हैं कि छठी जेपीएससी पीटी का रिजल्ट आरक्षण के साथ 15 गुणा ही दिया जाये.

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