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समय पर नहीं बना रांची आइआइएम का कैंपस, केंद्र ने रोका अनुदान

265 करोड़ से वंचित हुआ रांची सेंटर, छह अन्य आइआइएम की राशि पर भी रोक, केंद्रीय मानव संसाधन मंत्रालय ने सभी संबंधित निदेशकों से कहा सेल्फ सफिशिएंट बनें

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Deepak

Ranchi: केंद्र सरकार ने भारतीय प्रबंधन संस्थान (आइआइएम) रांची समेत सात संस्थानों को अनुदान देने पर रोक लगा दी है. आइआइएम रांची, रोहतक, काशीपुर, उदयपुर, तिरुचिरापल्ली, रायपुर समेत एक अन्य नये संस्थान के कैंपस डेवलपमेंट और शिक्षक और शिक्षकेतर कर्मियों के वेतन तथा अन्य खर्च को लेकर 2008-09 में केंद्र सरकार ने अनुदान देने का फैसला लिया था. उस समय केंद्र में यूपीए की सरकार थी. अब केंद्र में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गंठबंधन (राजग) की मोदी सरकार है.

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खुद करें पैसों का इंतजाम

आइआइएम को स्वायतता देनेवाले अधिनियम के तहत अब केंद्रीय मानव संसाधन मंत्रालय ने फैसला लिया है कि ये अपने पैसे का स्वयं इंतजाम करें. इसके लिए संस्थान स्वयं कर्ज लें अथवा अन्य उपाय करें. केंद्र के फैसले से अब नये आइआइएम को अनुदान नहीं मिलेगा. इसके लिए सभी संबंधित आइआइएम के निदेशकों को सूचना भी दे दी गयी है. केंद्र ने कहा है कि नये आइआइएम पुराने संस्थानों की तरह पुराने स्टूडेंट्स से शिक्षण शुल्क तथा एग्जिक्यूटिव कोर्स संचालित कर राजस्व की उगाही करें.

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रांची को मिलने थे 335 करोड़, मिले 70 करोड़

केंद्र सरकार से आइआइएम रांची को 335 करोड़ रुपये का अनुदान मिलना था. आइआइएम रांची के निदेशक प्रो शैलेंद्र सिंह ने बताया कि केंद्र सरकार का पत्र हमें मिल गया है. अब तक हमें 70 करोड़ रुपये ही केंद्र से मिले हैं. अब भी रांची आइआइएम का नया कैंपस बनना शुरू नहीं हुआ है. रांची आइआइएम की कक्षाएं सूचना भवन परिसर में चल रही हैं, जबकि छात्रावास खेल गांव परिसर स्थित कैंपस में चल रहा है. राज्य सरकार की तरफ से आइआइएम रांची के नये कैंपस के लिए कोर कैपिटल एरिया पुनदाग में 25 एकड़ जमीन दी गयी है.

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क्यों हुआ अनुदान न देने का फैसला

केंद्र सरकार ने अनुदान न देने का फैसला आधारभूत संरचना और कैंपस के निर्माण में हो रही देरी को लेकर किया है. केंद्र का मानना है कि अधिकतर जगहों पर 2014 में कैंपस निर्माण की गतिविधि शुरू हुई. जो केंद्रीय कैबिनेट के निर्णय के पांच वर्ष बाद शुरू हुआ. जानकारी के अनुसार आइआइएम रांची समेत अन्य संस्थानों के लिए 2008-09 में ही कैंपस निर्माण को लेकर पैसे दिये गये थे. आइआइएम उदयपुर ने 344 करोड़ और तिरुचिरापल्ली ने 370 करोड़ रुपये खर्च किये. केंद्र के फैसले से रांची को 263 करोड़, रायपुर को 50 करोड़, रोहतक को 46 करोड़, काशीपुर को 27 करोड़ रुपये मिलने में अब परेशानी होगी.

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