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श्रमायुक्त के आदेश के बाद भी ऊर्जा निगम कामगारों को नहीं कर रही बहाल, दो मार्च को हटाये गये थे

Ranchi : झारखंड ऊर्जा विकास निगम लिमिटेड की ओर से पिछले दिनों कामगारों को बगैर किसी नोटिस के कार्यमुक्त कर दिया गया. ये कामगार साल 2009 से बिजली बोर्ड के साथ काम कर रहे थे. हालांकि साल 2000 में ही आउटसोर्सिंग एजेंसी की ओर से इनकी नियुक्ति की गयी थी.

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एजेंसी की ओर से इन कामगारों के शोषण को ध्यान में रखते हुए तत्कालीन बोर्ड ने इन्हें निगम में सीधे अनुबंध में बदल दिया. दो मार्च को झारखंड ऊर्जा विकास निगम लिमिटेड की ओर से इन मजदूरों को मौखिक सूचना देते हुए कार्यमुक्त कर दिया गया.

जिसके बाद कामगारों की ओर से श्रमायुक्त कार्यालय में मामले की शिकायत की गयी. 11 मार्च को उप श्रमायुक्त की ओर से झारखंड ऊर्जा विकास निगम लिमिटेड को यथास्थिति मजदूरों की स्थिति बनाये रखने का निर्देश दिया गया. इसके बाद भी निगम की ओर से इन मजदूरों को बहाल नहीं किया गया.

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श्रमायुक्त ने दिया निर्देश कामगारों को बहाल रखें

पिछले कुछ दिनों से ये कामगार निगम मुख्यालय के समक्ष धरना दे रहे हैं. इन कामगारों का कहना है कि साल 2000 में इनकी नियुक्ति आउटसोर्सिंग कर की गयी. इसके बाद अनुबंध बदला गया. ऐसे में बगैर किसी पूर्व सूचना के कामगारों को काम से निकाल दिया जाना, उचित नहीं है.

उप श्रमायुक्त की ओर से जारी पत्र में निर्देश देते हुए बताया गया है कि जब तक कामगारों, निगम और श्रमायुक्त कार्यालय के बीच वार्ता चल रही है, तब तक कामगारों को बहाल रखा जाये. कार्यमुक्त किये गये कुल कामगारों की संख्या 49 है.

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कानूनों का किया गया उल्लंघन

पत्र लिखकर उप श्रमायुक्त की ओर से बताया गया है कि कामगारों को बिना किसी पूर्व सूचना हटाया जाना गलत है. बिना मुआवजा दिये कामगारों को कार्यमुक्त करना औद्योगिक विवाद अधिनियम 1947 का उल्लंघन है. कामगारों से जानकारी मिली कि अब तक निगम की ओर से कामगारों को बहाल करने के लिए आदेश नहीं जारी किया गया.

श्रमायुक्त की ओर से 7 मार्च वार्ता की तारीख तय की गयी थी. जिसमें निगम के अधिकारी छुट्टी होने के कारण नहीं आ पाये. प्रदर्शन में शामिल राजू ने कहा कि श्रमायुक्त की ओर से वार्ता चलने तक मजदूरों को बहाल करने की बात की गयी है.

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