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मीजल्स रूबेला के टीकाकरण में रांची फिसड्डी, 4 लाख बच्चों में डेढ़ लाख को ही लगा टीका

चार लाख बच्चों के टीकाकरण का था लक्ष्य लेकिन सिर्फ डेढ लाख बच्चों को ही लगा टीकाडीआरएसएचओ का कहना है अगले एक माह में तीन लाख बच्चों का टीकाकरण कर दिया जायेगा.

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Chandan Choudhary

Ranchi : बच्चों में मीजल्स रूबेला के टीकाकरण में रांची शहर पिछड्डी साबित हुआ है. रांची शहर के लिए जिस लक्ष्य को तय किया गया था, उसका आधा भी लक्ष्य हासिल  करने में एमआर की टीम नाकामयाब रही है. रांची शहर के लिए 413193 लक्ष्य तय किया गया था लेकिन, सिर्फ 150000 बच्चों का ही टीकाकरण हो पाया. रांची शहर में 834 स्कूल और 345 आंगनबाड़ी के लगभग चार लाख बच्चों का चयन किया गया था. इसके लिए एएनएम और सहियाओं को वैक्सीनेशन कराने की जिम्मेवारी सौंपी गई थी.

यह योजना बीते 26 जुलाई को शुरु की गई थी जो अक्तूबर तक चलाया गया. लेकिन तीन महीने में सिर्फ डेढ़ लाख ही बच्चों का टीकाकरण किया जा सका. वहीं डीआरएसएचओ का कहना है अगले एक माह में तीन लाख बच्चों का टीकाकरण कर दिया जायेगा.

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पूरे जिले का लक्ष्य था 10 लाख, पूरा हुआ 4,73,833

डीआरसीएचओ डॉ शशिभूषण खलखो ने बताया कि सर्वे के बाद पूरे जिले में 10,56,467 बच्चों को एमआर के टीकाकरण के लिए लक्ष्य निर्धारित किया गया था. लेकिन 473833 बच्चों का ही टीकाकरण किया जा सका. डॉ  खलखो ने  लक्ष्य पूरा नहीं होने का प्रमुख वजह मैन पॉवर की कमी होने को बताया गया. डीआरसीएचओ डॉ शशिभूषण खलखो ने बताया कि हमारे पास मैन पॉवर की काफी कमी थी.

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शहरी क्षेत्र में चार लाख बच्चों का टीकाकरण के  लिए सिर्फ 32 एएनएम दिए गए थे, जबकि काफी प्रयास के बाद मेटास व अन्य स्थानों कुछ विद्यार्थियों को बुलाकर हमने काम कराया. इसके अलावा स्कूलों द्वारा उपलब्ध कराई गई बच्चों की सूची में भी गड़बड़ था जिससे हमे लक्ष्य प्राप्त करने में कठिनाई आई है. अगले बार इसमे सुधार लाया जायेगा. डॉ खलखों ने बताया कि बचे हुए बच्चों को टीकाकरण के लिए हमे एक माह का वक्त दिया गया है. लगभग साढ़े तीन लाख बच्चों का टीकाकरण किया जाना शेष है. इसके लिए प्रशासन से संसाधान मुहैया कराने की बात कही जायेगी.

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क्या है मिजिल्स रुबेला

मिजिलस खसरा को ही कहा जाता है. खसरा एक जानलेवा रोग है. जो वायरस द्वारा फैलता है. बच्चों में खसरे के कारण विकलांगता तथा असमय मृत्यु भी हो सकती है. वहीं रुबैला एक संक्रामक रोग है जो वायरस द्वारा फैलता है. इसके लक्षण खसरा रोग जैसे होते है.यह लडके या लडकी दोनो को संक्रमित कर सकता है. यह भी बच्चों को लिए घातक होता है. बच्चों को नौ माह से 15 वर्ष की उम्र तक एमआर का टीकाकरण अवश्य लगवाना चाहिए.

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किस ब्लॉक का कितना था लक्ष्य, और कितना पूरा हुआ

ब्लॉक ————–लक्ष्य————प्राप्त आंकड़ा

ओरमांझी ———35203————31998

नामकुम ———–42780————40471

palamu_12

रातु —————–51471————-46625

बुंडू —————–23045————-21236

अनगड़ा————42107————–32001

सिल्ली ————-42541————–31225

लापुंग—————23566—————17437

मांडर—————47932—————33394

चान्हों————–40038—————–27138

सोनाहातु ———-49020—————-29404

कांके ————–90968—————–54379

बेड़ो —————42203—————–35087

तमाड़ ————-49539—————–31535

बुढमू —————62861—————–41903

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जिले में लगभग 600 कर्मियों को मिली है जिम्मेवारी

रांची शहर समेत पूरे जिले में लगभग 600 कर्मचारियों को मिजिल्स रुबेल का टीकाकरण की जिम्मेवारी सौंपी गई है. इसके लिए अलग-अलग टीम बनाया गया था. एक टीम में एक एएनएम और एक मोबलाइजर को रखा गया था. एएनएम बच्चों का टीकाकरण करने का काम करती है तो वहीं मोबलाइजर बच्चों और उनके अभिभावकों को मोबलाइज करता है. डीआरएसएचओ ने बताया कि टीकाकरण की पूरी सामग्री को संभाल कर रखा जाता है. एक बार प्रयोग किए गए सिरींज और निडील का उपयोग दुबारा नहीं होता. टीकाकरण के लिए भी टीम को पूरा प्रशिक्षण दिया गया है.

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