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रेंगती रही रांची,आराम फरमाती रही ट्रैफिक पुलिस

सहायक पुलिस के जिम्मे है यातायात की कमान

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chandan

Ranchi : राजधानी रांची की सुरक्षा व्यवस्था यूंही चौपट नहीं है, सुरक्षा व्यवस्था जिनके हाथों में है वे ही आराम फरमाते नजर आते हैं. राजधानी का सबसे व्यस्तम चौक मेन रोड का सुजाता चौक माना जाता है. जहां सुबह से ही ट्रैफिक का दवाब बढने लगता है. जैसे-जैसे दिन चढ़ता है ट्रैफिक बढ़ता ही जाता है. कई बार घंटों लोगों को इस ट्रैफिक में जाम की वजह से फंसना भी पड़ता है. लेकिन लोगों को इस जाम से निजात दिलाने की जिम्मेवारी जिनके उपर है वे ही अपनी जिम्‍मेदारी को नहीं निभाते हैं. बुधवार को दिन के दो बजे जब मेन रोड में वाहनों की लंबी कतारें लगी थीं, उस वक्त सुजाता चौक के सभी ट्रैफिक पुलिसकर्मी आराम फरमा रहे थे.वहीं ट्रैफिक संभालने की जिम्मेवारी सहायक कर्मियों को सौंप दी गयी थी. सहायक से जब जानने की कोशिश की गयी तो उन्होंने बताया कि प्रतिदिन का यही हाल है. लगभग 6 महीने से मैं ही सिग्नल दे रहां हूं.

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तीन दिन बाद रांची आने वाले हैं पीएम

एक और जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के रांची आगमन को लेकर पूरी पुलिस महकमे में गहमागमी बढ़ी हुई है, वहीं दूसरी तरफ सुरक्षा का एक नजारा यह भी है जहां ट्रैफिक पुलिस को इन सब से कोई लेना देना नहीं. प्रधानमंत्री 23 सितंबर को रांची में होंगे, लेकिन यहां की सुरक्षा व्यवस्था भगवान भरोसे ही है. अभी दो दिन में ही दो घटनाएं घट चुकी है जिसमें अपराधियों ने बैखौफ होकर गोली चलाई और पुलिस की गिरफ्त में आने से पहले ही भाग गये. सबसे चौंकाने वाली घटना तो सीएम आवास के पास घटी, सीएम आवास जहां चारो ओर पुलिस ही दिखते है. ऐसी जगह पर किसी को गोली मारकर भाग जाना अपने आप में दुर्भायपूर्ण है. इन घटनाओं की वजह कहीं न कही ट्रैफिक पुलिस द्वारा अपनी जिम्मेवरी के अच्छी तरीके से नहीं निभाना है.

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वीआइपी को आते देख आ जाते हैं हरकत में

ट्रैफिक पुलिस ऐसे तो अपनी जिम्मेदारी में कोताही बरतते हैं लेकिन जैसे ही इन्हें पता चलता है कि सीएम, राज्यपाल, डीजीपी या अन्य कोई वीआइपी आ रहा है टोपी,बेल्ट कसकर ये खड़े हो जाते हैं. इन्हें देख कर यूं लगता है जैसे अपनी जिम्मेदारी को बखुबी निभा रहे हैं, लेकिन वीआइपी के जाते ही फिर अपने रुप में आ जाते हैं.

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