न्यूज़ विंग
कल का इंतज़ार क्यों, आज की खबर अभी पढ़ें

रांची सीओ ने मुर्हरम के दिन तय की थी दखल दिहानी की तारीख, अब दर-दर भटक रही विधवा 

राज्य में जमीन संबंधी कानून के प्रावधानों का उल्लंघन आम से लेकर खास तक खुलेआम कर रहे हैं.

295

Ranchi : झारखंड की राजधानी रांची के शहर अंचल में आदिवासी को अपनी जमीन से बेदखल होने का मामला नया नहींं है. शहर में सीएनटी जमीन की खरीद-फरोख्त का मामला हो या उसपर बलपूर्वक कब्जा करने का. चाहे जमीन भूईहरी ही क्योंं न हो, वैसी जमीन का हस्तांतरण कर सीएनटी एक्ट के प्रावधानों का उल्लंघन करके रजिस्ट्री भी कराया जा रहा है. ऐसे मामले रांची में आम हो गया है. राज्य में जमीन संबंधी कानून के प्रावधानों का उल्लंघन आम से लेकर खास तक खुलेआम कर रहे हैं. लेकिन मामला प्रशासन के समक्ष पहुंंचने के बाद भी इसे लटकाये रखना, सरकार के इरादे को परिलक्षि‍त करता है. शहर अंचल रांची से भी एक ऐसा ही मामला समाने आया है, जहां अपनी ही जमीन पाने के लिए एक विधवा महिला सरकारी कार्यालयों की चक्कर लगा रही है.

क्या है मामला

दरअसल पुरानी रांची की रहने वाली 65 साल की फूलो उराईन अपनी ही जमीन पाने के लिए अंचल का दौड़ लगा रही है. एसएआर कोर्ट के फैसले के बावजूद दखल दिहानी के मामले को लगातार लटकाया जा रहा है. विधवा फूलो उराईन अपनी जमीन पर कोर्ट के आदेश के आलोक में दखल दिलाने के लिए मुख्यमंत्री सचिवालय/मुख्यमंत्री जन संवाद केंद्र,अंचल अधिकारी रांची, अनुमंडल पदाधिकारी रांची, उपायुक्त रांची तक को कई बार आवेदन चुकी है. लेकिन इन सबके बावजूद थाना नम्बर 205, खाता नम्बर 136, प्लॉट नम्बर 652 रकबा 64 डिसमिल जमीन पर कब्जा नहीं मिला.

इस मामले में फूलो उराईन ने जमीन पर दखल दिलाने के लिए उपायुक्त रांची को चार बार , अनुमंडल पदाधिकारी रांची को तीन बार और साथ ही अंचल अधिकारी के पास भी तीन बार आवेदन दिया. इतना ही नहीं इस मामले में फूलो की बेटी सोनी कच्छप ने भी करीब पचास बार रांची शहर अंचल अधिकारी से मिलकर जमीन वापसी की गुहार लगाती. लेकिन उसका भी कोई फायदा नहीं हुआ.

क्या कहती हैं फूलो उराईन 

फूलो उराईन ने अधिकारियों के दिये गये आवेदन में लिखा है कि हमलोगों की पुश्तैनी खतियानी जमीन को दखल दिलाने के आदेश मिलने के बावजूद, दखल नहीं दिलाया जा रहा है. जबकि इस जमीन का फैसला SAR वाद संख्या 192/89-90 टी आर 564/01-02 दिनांक : 29.05.1992 को ही दे दिया गा था. उस फैसले में 64 डिसमिल जमीन पर विपक्षी बसीर राईन पिता रसीद राईन लेक रोड, रांची को हटाकर दखल कब्जा का आदेश दिया गया था. वहीं इस संबंध में अंचल कार्यालय रांची को भी लिखित सूचना दी गई. जबकि दूसरी बार 14 मई 2018 को भी आवेदन दिया और इसके बाद अंचल अधिकारी ने 21.09.2018 को जमीन पर दखल दिलाने के लिए तरीख तय किया. लेकिन उस दिन भी तारीख तय होने के बावजूद जमीन पर दखल नहीं दिलाया जा सका. वहीं फूलो उराईन का कहना है कि जिस जमीन पर बसीर राइन ने कब्जा किया है, वह भूईहरी जमीन मेरे परिवार का है.

अंचल अधिकारी ने दखल दिहानी के लिए मुहर्रम का दिन चुना

वहीं दखल दिलाने के मामले में अंचल अधिकारी के ढुलमुल रवैये का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि अंचल अधिकारी रांची ने 21 अक्टूबर 2018 यानि कि मुहर्रम के दिन ही अनुमंडल पदाधिकारी रांची से सशस्त्र पुलिस बल की मांग की. फिर पुलिस बल नहीं मिलने की वजह से जमीन पर दखल दिलाने का मामला फिर से अधर में लटक गया. अंचल अधिकारी ने इस मामले में सरकारी अधिवक्ता से भी राय ली थी, जो फूलो उराईन के ही पक्ष में था. लेकिन फिर भी दखल दिहनी के मामले को अमल में नहीं लाया गया.

क्या कहते हैं अंचल अधिकारी धनंजय राय

इस बारे में अंचल अधिकारी धनंजय राय का कहना है कि फूलो उराईन का दखल दिहानी का मामला काफी पुराना है. इनके द्वारा दिय गये आवेदन पर विचार करते हुए ही कब्जाधारियों को नोटिस दिया गया था. साथ ही कहा कि  दखल दिलाने के लिए पुलिस बल की मांग अनुमंडल पदाधिकारी से की गई थी और पुलिस बल नहीं मिलने के कारण दखल दिहानी नहीं कराया जा सका है. वहीं वर्तमान समय में यह हाईकोर्ट में चला गया है. जहां पर अंचल की ओर से काउंटर एफिडेविट दायर की जाएगी.

इसे भी पढ़ें – दुनिया गुजर सकती है एक भारी आर्थिक मंदी से

इसे भी पढ़ें – डीजीपी हो तो ऐसा, सर्वधर्म समभाव से संपन्न हैं डीके पांडेय

हमें सपोर्ट करें, ताकि हम करते रहें स्वतंत्र और जनपक्षधर पत्रकारिता...

Get real time updates directly on you device, subscribe now.

Comments are closed.

%d bloggers like this: