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45 हजार तक एडमिशन फीस, 2-3 हजार मंथली फीस, फिर भी बच्चों की कोचिंग का बाजार गर्म…

सिर्फ रांची शहर में 100 के लगभग कोचिंग सेंटर्स संचालित किये जा रहे हैं., 40 के आसपास होम ट्यूटर और होम टूयूशन की दुकानें फल फूल रहीं है.

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Gourav

Ranchi : शहर के प्राईवेट स्कूलों में एडमिशन के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ती है. क्योंकि अच्छे स्कूलों में बेहतर शिक्षा मिलती है. रिजल्ट अच्छा होता है. इसलिए गार्जियन बच्चों के यूकेजी में नामांकन के लिए 45 हजार तक फीस चुका रहे हैं.

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इसके अलावा दो से तीन हजार के करीब मासिक शुल्क का भुगतान भी करना पड़ता है. साथ ही गार्जियन को बच्चों के लिए अतिरिक्त कोचिंग देनी पड़ रही है.  इसके लिए प्रति घंटे के हिसाब से पैसे देने पड़ रहे हैं. सवाल यह उठता है कि आखिर कोचिंग की जरूरत क्यों पड़ रही है.

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100 के करीब कोचिंग सेंटर्स, 40 होम ट्यूशन और ट्यूटर्स

सिर्फ रांची शहर में 100 के लगभग कोचिंग सेंटर्स संचालित किये जा रहे हैं., 40 के आसपास होम ट्यूटर और होम टूयूशन की दुकानें फल फूल रहीं है. मैथ्य और साइंस के कोचिंग के लिए प्रति सब्जेक्ट न्यूनतम 500 रुपये लिये जा रहे हैं.  होम ट्यूशन और ट्यूटर्स वाले अधिकतर ग्रेजुएशन करने वाले स्टूडेंट्स से संपर्क कर होम ट्यूशन दिलवाते हैं, जिनके बदले वे मिलने वाली आधी फीस रख लेते हैं.

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स्कूल से छुट्टी होने के बाद सीधे कोचिंग पहुंच जाते हैं स्टूडेंट्स

रांची के कई बड़े स्कूलों के शिक्षक ही शाम के समय कोचिंग देते हैं. शहर के सभी बड़े स्कूलों के आसपास छुट्टी के बाद भी स्टूडेंट्स दिखाई देते हैं. ये स्टूडेंट्स आठवीं से दसवीं के होते हैं. जिनसे पूछने पर पता चलेगा कि वे कोचिंग के लिए रुके हैं.

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अधिकतर मामलों में वे स्कूल के शिक्षकों से ही ट्यूशन लेते हैं. जो स्कूल के शिक्षकों से ट्यूशन नहीं लेते वे कोचिंग सेंटर्स का रुख करते हैं. शहर के कई बड़े स्कूलों ने अपने शिक्षकों को ट्यूशन देने पर रोक लगायी है, बावजूद वे चोरी छुपे बच्चों को पढ़ा रहे हैं.

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