न्यूज़ विंग
कल का इंतज़ार क्यों, आज की खबर अभी पढ़ें

रांचीः डुप्लीकेट चेक नंबर से RTGS कर निकाले 9 लाख 80 हजार रूपए

बैंक अधिकारियों की मिलीभगत की आशंका

35

Ranchi: राजधानी रांची के लाइन टैंक रोड के रहने वाले चंद्रकांत कुमार का चेक क्लोन कर साइबर अपराधियो ने 9 लाख 80 हजार रुपये उनके खाते से निकाल लिये. इतनी बड़ी राशि की निकासी के मामले में चंद्रकांत कुमार ने बैंक के पदाधिकारियों की मिलीभगत से इतनी बड़ी रकम की हेराफेरी की आशंका जाहिर की है. चंद्रकांत कुमार का कहना है कि बिना किसी की मिलीभगत के इतनी बड़ी रकम नहीं निकाली जा सकती है.

चेक जारी करने से किया मना

पीड़ित चंद्रकांत कुमार ने एसबीआई मुख्य ब्रांच के शाखा प्रबंधक को दिए आवेदन में कहा है कि 27 नवंबर को दिन के करीब 3:42 बजे के मेरे मोबाइल पर 9 लाख 80 हजार के आरटीजीएस का मैसेज आया जो कि किसी अभिषेक कुमार पांडे के नाम पर है. आरटीजीएस का मैसेज आने के बाद चंद्रकांत कुमार ने एसबीआई मुख्य ब्रांच के बैंक पदाधिकारियों को फोन करके बताया कि मैंने आरटीजीएस करने को लेकर चेक जारी नहीं किया है. इसे तत्काल रोक दिया जाए.

बैंक पदाधिकारियों की मिलीभगत की आशंका

silk_park

लाइन टैंक रोड के रहने वाले चंद्रकांत कुमार ने एसबीआई मुख्य ब्रांच के शाखा प्रबंधक को दिए आवेदन में कहा है कि बैंक द्वारा जारी ओरिजिनल चेक नंबर मेरे पास है और मैंने इसे किसी को भी निर्गत नहीं किया है. इसके बावजूद भी इतनी बड़ी रकम डुप्लीकेट चेक नंबर के माध्यम से आपके बैंक से क्लियरिंग के लिए आया और बैंक के आरटीजीएस क्लीयरिंग करने वाले पदाधिकारियों के द्वारा मुझे मेरे खाता में अंकित मोबाइल नंबर पर सूचना भी नहीं दी गई. इससे मुझे बैंक के संबंधित कर्मचारी और पदाधिकारी के इस निकासी में मिलीभगत की आशंका लग रही है. क्योंकि पूर्व में चेक पास करने से पूर्व खाता में अंकित मोबाइल नंबर पर सूचना दी जाती है.

इस निकासी में मुझे कोई सूचना नहीं दी गई और डुप्लीकेट चेक अल्ट्रावायलेट रेज मशीन से कैसे पास हो गया. तथा चेक एवं आरटीजीएस फॉर्म में भी मेरे सिगनेचर की अनदेखी की गई है. चंद्रकांत कुमार का कहना है कि बिना किसी के मिलीभगत के चलते इतनी बड़ी रकम नहीं निकाली जा सकती है.

इसे भी पढ़ेंःविवादों से घिरे पाकुड़ डीसी दिलीप झा का हुआ तबादला, जेसीईसीई के बने एग्जाम कंट्रोलर

हमें सपोर्ट करें, ताकि हम करते रहें स्वतंत्र और जनपक्षधर पत्रकारिता...

Comments are closed.

%d bloggers like this: