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महतो फोल्डर में होने की वजह से बढ़ी रामटहल चौधरी की मुश्किल, रांची से प्रबल दावेदारों में अर्जुन मुंडा भी शामिल

गिरिडीह सीट आजसू के खाते में जाने से झारखंड के दो महतो फोल्डर के सांसदों के पेशानी पर बल पड़ रहे हैं.

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Akshay Kumar Jha

Ranchi: बीजेपी की गिरिडीह सीट आजसू के खाते में जाने से भले ही जयंत सिन्हा राहत की सांस ले रहे हों. लेकिन झारखंड के दो महतो फोल्डर के सांसदों के पेशानी पर बल पड़ रहे हैं. पहले रांची के सांसद रामटहल चौधरी और दूसरे जमशेदपुर से सांसद विद्युत बरन महतो. इससे पहले आजसू हजारीबाग सीट की डिमांड कर रहा था. लेकिन खाते में आई गिरिडीह सीट. अगर हजारीबाग सीट आजसू के खाते में जाती, तो जयंत सिन्हा की उम्मीदवारी पर सवाल उठते.

ऐसा माना जा रहा है कि गिरिडीह सीट आजसू के खाते में जाने का जयंत सिन्हा भी एक कारण रहे हैं. रवींद्र पांडेय को एनडीए के गठबंधन से सबसे बड़ी क्षति हुई है, तो इस फेहरिस्त में दो और नाम शामिल हुए हैं. झारखंड के दोनों महतो फोल्डर के सांसदों में से एक का टिकट कटना तट माना जा रहा है. टिकट कटने की ज्यादा आशंका रामटहल चौधरी की है.

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महतो फोल्डर का दो का कोटा हो गया फुल, कटेगा किसी एक का टिकट

गिरिडीह लोकसभा से एनडीए की तरफ से आजसू का कोई भी उम्मीदवार उतरे, टिकट किसी महतो को ही मिलनी है. चाहे वो सुदेश हो या चंद्रप्रकाश चौधरी. वहीं झारखंड में पहले से दो महतो फोल्डर के सांसद मौजूद हैं. ऐसे में अब बीजेपी किसी एक महतो को ही लोकसभा जाने के लिए टिकट दे सकती है. उम्र की बात की जाए तो रांची के सांसद रामटहल चौधरी 77 साल के हो गए हैं. 2014 के शपथ पत्र के मुताबिक वो उस वक्त 72 साल के थे. वहीं विद्युत बरन महतो की उम्र 2014 के शपथ पत्र के मुताबिक 52 साल थी. जो अब 56 के हो चुके हैं.

ऐसे में माना जा रहा है कि अगर महतो फोल्डर से किसी एक नाम हटाया जाना होगा, तो रामटहल चौधरी का नाम पहले आएगा. वैसे भी बीते पांच साल में रामटहल चौधरी को क्षेत्र में उतना सक्रिय नहीं देखा गया है. उनकी सक्रियता की कहानी हहाप गांव बता रहा है, जिन्हें इन्होंने विकास की गंगा बहाने के लिए गोद लिया था.

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अर्जुन मुंडा के रांची से लड़ने की चर्चा ने बढ़ायी मौजूदा सांसद की मुश्किल

अर्जुन मुंडा के भी लोकसभा चुनाव लड़ने की चर्चा जोरों पर है. लेकिन किस लोकसभा सीट से वो चुनाव लड़ेंगे, वो अभी तय नहीं है. पार्टी सूत्रों की मानें तो अर्जुन मुडां को खूंटी लोकसभा सीट से चुनाव लड़ने के पेशकश की गयी थी. खूंटी लोकसभा क्षेत्र हमेशा से एक आदिवासी सीट रहा है. लेकिन अर्जुन मुंडा ने अपनी इच्छा रांची लोकसभा से लड़ने की जतायी है. अ

गर अर्जुन मुंडा केंद्रीय नेतृत्व को अपनी जीत की संभावना जताने में सफल हो जाते हैं, तो जाहिर तौर पर इसका खामियाजा मौजूदा सांसद रामटहल चौधरी को होगा. वहीं रामटहल चौधरी का टिकट कटने से विद्युत बरन महतो को सीधे तौर पर फायदा होगा. महतो कोटे की दो टिकट आजसू और विद्युत बरन महतो के बीच बंट जाएगी.

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जातिगत चश्मे में क्या है अभी का समीकरण

ब्राह्मणः दो सीट, निशिकांत दुबे (गोड्डा) और रवींद्र कुमार पांडे (गिरिडीह)
राजपूतः दो सीट, पीएन सिंह (धनबाद) और सुनील कुमार सिंह (चतरा)
भूमिहारः एक सीट, रवींद्र राय (कोडरमा) झारखंड बनने के बाद पहली बार किसी भूमिहार को बीजेपी की तरफ से टिकट मिला और वो सांसद बने.
महतोः दो सीट, रामटहल चौधरी (रांची) और विद्युत बरन महतो (जमशेदपुर)
एससीः एक सीट, बीडी राम (पलामू)
कायस्थः एक सीट, जयंत सिन्हा (हजारीबाग)
एसटीः तीन सीट, लक्ष्मण गिलुआ (सिंहभूम), करिया मुंडा (खूंटी), सुदर्शन भगत (लोहरदगा)

नोटः राजमहल और दुमका से भी एसटी फोल्डर से आए हेमलाल मुर्मू और सुनील सोरेन को टिकट मिला था. लेकिन दोनों चुनाव हार गए थे.

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