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सरकार अनुमति दे तो रांची विवि खरीदेगा रामलखन सिंह यादव कॉलेज की जमीन

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Ramchi: रांची विश्वविद्यालय की 1960 में स्थापना के बाद से सीनेट की 11 वीं बैठक हुई. इसके साथ ही शुक्रवार को स्थापना दिवस मनाने के साथ सिंडिकेट का चुनाव भी हुआ. सीनेट की बैठक में कुलपति डॉ रमेश कुमार पांडेय, प्रो वीसी डॉ कामिनी कुमार, रजिस्ट्रार अमर कुमार चौधरी सहित सीनेट सदस्यों ने हिस्सा लिया. इस बैठक में वीसी को नियुक्ति करने का अधिकार दिलाने सहित 70 से अधिक विषयों पर चर्चा हुई.

सीनेट की बैठक में विश्वविद्यालय का बजट पास करने सहित कई अहम फैसले लिये गये. सिंडिकेट चुनाव से पहले तक 30 से अधिक विषयों पर चर्चा हुई.

अहम विषय पर चर्चा करते हुए वीसी ने रामलखन सिंह यादव कॉलेज, जेएन कॉलेज धुर्वा और एसएस मेमोरियल कॉलेज की स्थायी जमीन पाने को लेकर जानकारी दी. गौरतलब हो कि ये तीनों कॉलेज अपने स्थापना काल से ही किराये की जमीन पर संचालित हो रहे हैं. लेकिन आज तक इन्हें न तो अपनी जमीन मिली और न ही भवन बन पाया है.

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वीसी डॉ रमेश पांडेय ने कहा कि विवि प्रशासन की ओर से इस संबंध में प्रयास काफी आगे बढ़ चुका है. राम लखन सिंह यादव कॉलेज जिस जमीन पर किराये पर चल रहा है, उस जमीन का मालिक विश्वविद्यालय को जमीन देने के लिए तैयार है. इसमें सरकार का सहयोग अपेक्षित है. सरकार जमीन अधिग्रहण करा कर दे. अगर सरकार जमीन की कीमत नहीं देना चाहती तो वह केवल अधिग्रहण करा दे. जमीन के एवज जो राशि देय होगी उसका भुगतान विवि प्रशासन स्वयं करेगा. धुर्वा स्थित जेएन कॉलेज व कांके स्थित एसएस मेमोरियल कॉलेज की जमीन के संबंध में भी यही बात सीनेट सदस्यों के बीच रखी गयी कि सरकार अनुमति प्रदान करे तो रांची विवि कॉलेजों के लिए स्वयं जमीन खरीदेगा.

सीनेट की बैठक में अहम विषयों में विश्वविद्यालय का बजट भी पास हुआ. जिसमें 214.54 करोड़ रुपये सैलेरी मद में और 89 करोड़ पेंशन मद में दिया गया.

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सीनेट सदस्यों ने बैठक के दौरान रांची महिला कॉलेज की जमीन पर मॉल बन जाने के मामले को उठाया. इस पर काफी हंगामा भी हुआ. सदस्यों ने कहा कि रांची महिला कॉलेज हॉस्टल की जमीन पर कब्जा किये जाने के मामले को विवि प्रबंधन की ओर से गंभीरता से नहीं लिया गया. इसके जवाब में कुलपति ने कहा कि सीनेट सदस्य जिस जमीन पर मॉल बनने की बात कर रहे हैं, असल में उस जमीन पर हॉस्टल था. यहां कॉलेज की लड़कियां रहती थीं. मकान मालिक को इस एवज में किराया दिया जाता था.

बाद में किराया देना बंद हो गया तो मामला उच्च न्यायालय में गया. फिर उच्चतम न्यायालय में मकान मालिक के हक में फैसला हुआ.

इसके अतिरिक्त शिक्षक-शिक्षकेतर कर्मचारियों की प्रोन्नति का मामला भी जोरदार तरीके से बैठक में उठाया गया.

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