National

रामजन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद : मध्यस्थता को लेकर SC ने फैसला सुरक्षित रखा  

NewDelhi : रामजन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद को लेकर आज बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में अहम सुनवाई हुई.  चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अगुवाई में पांच जजों की संविधान पीठ ने केस में मध्यस्थता के लिए फैसला सुरक्षित रख लिया है.  बता दें कि सुप्रीम कोर्ट  ने पिछली सुनवाई के दौरान सुझाव दिया था कि दोनों पक्षकार बातचीत का रास्ता निकालने पर विचार करें. अगर एक फीसदी भी बातचीत की संभावना हो तो उसके लिए कोशिश होनी चाहिए. संविधान पीठ ने कहा कि ये विवाद दो धर्मों की पूजा अर्चना से जुड़ा हुआ है लिहाजा इसे कोर्ट द्वारा नियुक्त किये गये मध्यस्थ के जरिये सुलझाने की पहल की जानी चाहिए. पीठ ने कहा कि मुख्य मामले की सुनवाई आठ हफ्ते के बाद होगी तब तक आपसी समझौते से विवाद को सुलझाने का एक प्रयास किया जा सकता है. इस पर रामलला विराजमान और हिन्दू महासभा ने विरोध जताया था, जबकि मुस्लिम पक्ष और सुन्नी वक्फ बोर्ड ने कहा था कि वो आपस में बातचीत करने के लिए तैयार है.

रामलला विराजमान की ओर से कहा गया कि अयोध्या का मतलब राम जन्मभूमि. यह मामला बातचीत से हल नहीं हो सकता. साथ ही कहा कि मस्जिद किसी दूसरे स्थान पर बन सकती है. इस पर जस्टिस बोबड़े ने कहा कि आप अपना यह पक्ष मध्यस्थता के दौरान रख सकते हैं. इस पर रामलला विराजमान की तरफ से कहा गया कि फिर मध्यस्थता का मतलब क्या है?

इसे भी पढ़ें – पीएम मोदी कैमरे के लिए जीते हैं,  हर चीज को इवेंट बनाते हैं :  राहुल गांधी  

मध्यस्थता के कुछ पैरामीटर हैं और उससे आगे नहीं जा सकता.

बता दें कि  रामलला विराजमान की ओर से सीएस वैद्यनाथन बहस कर रहे हैं. इस क्रम में रामलला विराजमान की तरफ से कहा गया कि हाईकोर्ट ने इस मामले में आपसी बातचीत से विवाद को हल करने की कोशिश की थी लेकिन नहीं हो पाया था.  भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने  कहा कि मध्यस्थता के कुछ पैरामीटर हैं और उससे आगे नहीं जा सकता. उन्होंने 1994 में संविधान पीठ के फैसले का जिक्र किया, जिसमें पासिंग रिमार्क था कि मस्जिद में नमाज पढ़ना इस्लाम का अंदरूनी हिस्सा नहीं है. हिन्दू पक्ष ने कहा कि मान लीजिए कि सभी पक्षों में समझौता हो गया तो भी समाज इसे कैसे स्वीकार करेगा?  इस पर जस्टिस बोबड़े ने कहा कि अगर समझौता कोर्ट को दिया जाता है और कोर्ट उस पर सहमति देता है और आदेश पास करता है. तब वो सभी को मानना ही होगा. जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि कोर्ट का फैसला एक बाध्यकारी चरित्र है. मध्यस्थता में हम कैसे लोगों को बाध्यकारी बना सकते हैं.

जस्टिस बोबड़े ने कहा, यह सिर्फ जमीन का मामला नहीं है, बल्कि भावनाओ से जुड़ा हुआ भी है. दिल, दिमाग और भावनाओं का मामला है. इसलिए कोर्ट चाहता है कि आपसी बातचीत से इसका हल निकले. कहा कि कोई उस जगह बने या बिगड़े निर्माण को या इतिहास को पहले जैसा नहीं कर सकता है. इसलिए बातचीत से ही बात सुधर सकती है.  जस्टिस बोबडे ने कहा कि बाबर ने जो किया हम उसे ठीक नहीं कर सकते हैं,  अभी जो हालात हैं हम उसपर बात ही करेंगे.

इसे भी पढ़ें – हरियाणा :  27 साल में आईएएस खेमका का 52वां ट्रांसफर,घोटाले उजागर करते हैं,  नेताओं को नहीं भाते

यह पार्टियों के बीच का विवाद नहीं है, दो समुदायों को लेकर विवाद है

सुप्रीम कोर्ट ने पूछा कि मध्यस्थता के जरिए हुए फैसले को लाखों लोगों के लिए बाध्यकारी कैसे बनाया जाये? तो मुस्लिम पक्ष ने कहा कि मध्यस्थता का सुझाव कोर्ट की तरफ से आया है और बातचीत कैसे होगी ये कोर्ट को तय करना है?  इस क्रम में जस्टिस चंद्रचूड ने कहा मध्यस्थता का मकसद पक्षकारों के बीच समझौता कराना है. इस पर मुस्लिम पक्ष के वकील ने कहा कि हम मध्यस्थता के लिए खुले हैं. जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ के अनुसार शांतिपूर्ण वार्ता के माध्यम से संकल्प की वांछनीयता एक आदर्श स्थिति है. लेकिन असल सवाल यह है कि ये कैसे किया जा सकता है? कहा कि  यह केवल पार्टियों के बीच का विवाद नहीं है, बल्कि दो समुदायों को लेकर विवाद है. हम मध्यस्थता के माध्यम से लाखों लोगों को कैसे बांधेंगे? यह इतना आसान नहीं होगा. मुस्लिम पक्ष की ओर से धवन ने कहा कि संविधान पीठ सभी पक्षों को कहे कि मध्यस्थता की पूरी प्रक्रिया गोपनीय रखी जाये.

यहां तक कि मध्यस्थ को भी कहा जाये कि वो गोपनीय रखें, जब तक कोर्ट में रिपोर्ट दाखिल नहीं होती.  -जस्टिस बोबडे ने कहा कि पक्षकारों द्वारा गोपनीयता का उल्लंघन नहीं होना चाहिए. मीडिया में इसकी टिप्पणियां नहीं होनी चाहिएं. प्रक्रिया की रिपोर्टिंग ना हो. अगर इसकी रिपोर्टिंग हो तो इसे अवमानना घोषित किया जाये.

इसे भी पढ़ें –  हमें राष्ट्रवाद पर ज्ञान न दे भाजपा,  मुझे भारतीय होने पर गर्व है : ममता बनर्जी

Advertisement

Related Articles

Back to top button
%d bloggers like this: