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रामगढ़: वर्चस्व के खूनी खेल में अब तक हो चुकी है कई लोगों की हत्या

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Ramgarh: सुशील श्रीवास्तव और भोला पांडे के गिरोह के बीच पिछले 20 सालों से खूनी खेल चलता आ रहा है. इसमें अब तक कई लोगों की जान भी जा चुकी है. रामगढ़, भुरकुंडा, पतरातु, कुजू उरीमारी, बरकाकाना, बड़का सायाल के इलाकों में यह गैंगवार थमने का नाम नहीं ले रहा है. गैंगवार और रंगदारी वसूली के इस खेल में पुलिस अफसर भी संलिप्त रहते हैं.

कभी भोला पांडेय के गिरोह के लिए काम करता था सुशील श्रीवास्तव

सुशील श्रीवास्तव पहले भोला पांडे के गिरोह के लिए काम किया करता था. इसी दौरान उसने ने स्क्रैप कारोबारी कमलिया की हत्या कर दी. जिसके बाद सुशील को गिरफ्तार कर हजारीबाग जेल भेज दिया गया. हजारीबाग जेल में रहते हुए कुछ दिनों के लिए उसे रांची जेल भेजा गया. जहां उसकी दोस्ती गैंगस्टर अनिल शर्मा से हुई. अनिल से दोस्ती के बाद सुशील भोला पांडेय से अपना संबंध तोड़ लिया और जिसके बाद भुरकुंडा और पतरातू इलाके में भोला पांडेय गिरोह के समानांतर अपना गिरोह तैयार कर रंगदारी वसूलने लगा.

1990 से जारी है वर्चस्व की लड़ाई

भोला पांडेय के गिरोह से नाता तोड़ने के बाद वर्चस्व की लड़ाई खेल का 1990 से शुरू हुआ. दोनों गिरोह रामगढ़ और हजारीबाग के क्षेत्रों में कोयला कारोबारियों और ट्रांसपोर्टरों से जबरन रंगदारी वसूली करते थे. लेकिन कोयला कारोबारियों और ट्रांसपोर्टरों से रंगदारी के वसूली के इस धंधे में भोला पांडेय के गिरोह का दबदबा बढ़ने लगा. भोला पांडेय गिरोह के बढ़ते दबदबा को देखते हुए सुशील श्रीवास्तव के गिरोह ने भोला पांडेय के गिरोह के लोगों को मारना शुरू किया. जिसके बाद से दोनों गिरोह के लोग एक-दूसरे गिरोह के लोगों हत्या करने लगे. जो अभी तक चलता आ रहा है.

गैंगवार की असली वजह रंगदारी की गाढ़ी कमाई

पिछले 20 सालों से लगातार भोला पांडेय और सुशील श्रीवास्तव के गिरोह के बीच हो रहे गैंगवॉर का मुख्य कारण रामगढ़, भुरकुंडा, पतरातू, कुजू, खलारी, उरीमारी, बरकाकाना, बड़का सायाल जैसे कोयलांचल इलाके में कोयला कारोबारियों और ट्रांसपोर्टरों से रंगदारी की वसूली है. इस क्षेत्र में दोनों गिरोह अपना दबदबा कायम रखना चाहते हैं.

2006 से शुरू हुआ हत्या का सिलसिला

भोला पांडे और सुशील श्रीवास्तव के गिरोह के बीच रंगदारी के लिए वर्चस्व की लड़ाई में दोनों गिरोह के बीच हत्या का सिलसिला 2006 से शुरू हुआ. 2006 में वह विकास तिवारी, भोला पांडे और उसका भजीता किशोर पांडे के संपर्क में आया. विकास ने आते ही सुशील श्रीवास्तव गैंग के आदमी लालतू की हत्या कर दी. जिसके बाद 2008 में उसे गिरफ्तार कर लिया गया. डेढ़ साल जेल में रहने के बाद जब वह बाहर निकला तो पांडेय गैंग में उसे एक भरोसेमंद शार्प शूटर के तौर पर देखा जाने लगा. लेकिन इसी बीच श्रीवास्तव गैंग ने 2009 में भोला पांडे की हत्या कर दी गई. भोला पांडेय के मारे जाने के बाद किशोर पांडेय ने 2010 में सुशील श्रीवास्तव की पत्‍‌नी मीनू श्रीवास्तव पर अरगोड़ा थाना क्षेत्र में हमला करवाया. लेकिन इस हमला में में मीनू बच गई थी. उसके बाद विकास तिवारी और किशोर पांडे ने मिलकर श्रीवास्तव गैंग के कई लोगों की हत्याएं कीं. इन हत्याओं का बदला लेने सुशील श्रीवास्तव ने जेल में बैठकर किशोर पांडे की हत्या की साजिश रची और 2014 में श्रीवास्तव गैंग ने जमशेदपुर में किशोर पांडे की उस समय हत्या कर दी. जब वह अपने परिवार से मिलने जा रहा था. इसके बाद विकास तिवारी को डर सताने लगा कि अगर सुशील श्रीवास्तव को नहीं मारा तो श्रीवास्तव गैंग उसे मार देगी. जिसके बाद 2015 में विकास तिवारी ने हजारीबाग कोर्ट में सुशील श्रीवास्तव की गोली मारकर हत्या करवा दी.

जेल से विकास करता है कमांड

भोला पांडे और किशोर पांडे की हत्या के बाद उसके भांजे विकास तिवारी ने पांडे गिरोह की कमान अपने हाथ में लिया था. हजारीबाग कोर्ट में सुशील श्रीवास्तव की हत्या कराने के मामले में विकास तिवारी अभी जेल में बंद है. मिली जानकारी के मुताबिक जेल से ही विकास तिवारी गिरोह का संचालन कर रहा है.

अमन श्रीवास्तव कारोबारियों से कर रहा रंगदारी का मांग

हजारीबाग कोर्ट में गैंगस्टर सुशील श्रीवास्तव की हत्या के बाद उसके बेटे अमन श्रीवास्तव ने गिरोह की कमान संभाल ली है. उसने कोयला कारोबार से जुड़े कारोबारियों से रंगदारी वसूलने के लिए नया गिरोह तैयार किया है. वह रांची, रामगढ़ और हजारीबाग जिले के कारोबारियों से रंगदारी वसूलने का काम कर रहा है. हाल के दिनों में अमन श्रीवास्तव के द्वारा रांची के कारोबारियों से रंगदारी की मांग की गयी है. रंगदारी नहीं देने पर अंजाम भुगतने की भी धमकी दी है.

संजीव बेघेल की हत्या से गैंगवार की आशंका तेज

18 दिसंबर को हुए किशोर पांडे के करीबी संजीव बेघेल की हत्या के बाद फिर से गैंगवार होने की आशंका तेज हो गयी है. संजीव सिंह बेघेल की हत्या के बाद किशोर पांडेय की पत्नी निशी पांडेय ने कहा कि संजीव बेघेल के राजनीति में सक्रिय होने और लोगों के बीच अच्छी पकड़ होने के चलते संजीव सिंह बेघेल की हत्या करायी गयी है. वहीं पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यह हत्या वर्चस्व की लड़ाई को लेकर गैंगवार का मामला हो सकता है.

वर्चस्व की लड़ाई में अब तक हो चुकी हैं कई हत्यायें

  • 2009 भोला पांडेय की हत्या दुमका जेल से रांची लाने के दौरान शूटर अमरेंद्र तिवारी ने कर दी थी.
  • 2010 में सुशील श्रीवास्तव की पत्नी मीनू श्रीवास्तव पर किशोर पांडे ने हमला करवाया था. लेकिन उसमें मीनू श्रीवास्तव बाल-बाल बच गयी थी.
  • 15 अक्टूबर 2014 को जमशेदपुर के कदमा में किशोर पांडे की गोली मारकर हत्या कर दी गयी. उसके साथ किशोर पांडे के अंगरक्षक बबलू पांडे की भी मौत हो गयी थी.
  • 2 जून 2015 को हजारीबाग कोर्ट में सुशील श्रीवास्तव सहित गयाज और कलाम की गोली मारकर हत्या.
  • 26 अक्टूबर 2015 को किशोर पांडे के पिता कामेश्वर पांडे की गोली मारकर हत्या. गोली मार कर भाग रहे एक अपराधी को पब्लिक ने पीट-पीटकर मार डाला था.
  • 18 दिसंबर 2018 को संजीव सिंह बघेला की हत्या इसको भी गैंगवार से ही जोड़ कर देखा जा रहा है.

इसके अलावा अब तक कई छोटे अपराधी की हत्या इस गैंगवार के चलते हो गयी है.

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