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रामदास अठावले के विचार, ओवरऑल आरक्षण 75 प्रतिशत, ओबीसी आरक्षण 37 फीसदी हो

NewDelhi : केंद्र और राज्य सरकारों को ओबीसी आरक्षण 27फीसदी से बढ़ाकर 37 फीसदी करना चाहिए.  इस क्रम में ओबीसी में एक सब-कैटिगिरी बनानी चाहिए, जिसमें अत्यधिक गरीबों और शैक्षणिक रूप से पिछड़े लोगों को रखना चाहिए.  केंद्रीय सामाजिक न्याय मंत्री रामदास अठावले ने यह बात कही. साथ ही कहा कि केंद्र सरकार आर्थिक रूप से पिछड़े सवर्णों को सरकारी नौकरी और शिक्षा में 10% आरक्षण दे चुकी है. अब सरकार को ओबीसी कैटिगिरी में आर्थिक रूप से पिछले लोगों को सरकारी नौकरी व शिक्षण संस्थानों में 10% अतिरिक्त आरक्षण बढ़ाने पर विचार करना चाहिए. बता दें कि संडे एक्सप्रेस से बातचीत के क्रम में अठावले ने कहा, केंद्र सरकार की ओर से ओवरऑल आरक्षण 60% है, जो इस फैसले के बाद 70% हो जायेगा. हालांकि, मुझे विश्वास है कि ओवरऑल आरक्षण को 75% तक किया जा सकता है.

सामान्य वर्ग  को 10% आरक्षण ऐतिहासिक

अठावले ने सामान्य वर्ग में आर्थिक रूप से पिछड़े लोगों को 10% आरक्षण देने के फैसले को ऐतिहासिक बताया. उन्होंने कहा कि इस कदम का काफी वक्त से इंतजार किया जा रहा था. अठावले ने कहा, वे खुद एनडीए के सामने आर्थिक रूप से पिछड़े लोगों के लिए आरक्षण लाने का प्रस्ताव तीन बार रख चुके थे.  कहा कि इस फैसले से अगड़ी और पिछड़ी जातियों की सोशल इंजीनियरिंग की नयी शुरुआत होगी. सामान्य वर्ग और दलितों के बीच नाराजगी कम होगी. सामाजिक सौहार्द भी बढ़ेगा. बता दें कि 2019 में होने वाले लोकसभा चुनाव के मद्देनजर अठावले अगड़ी और पिछड़ी जातियों की सोशल इंजीनियरिंग के संदेश के साथ महाराष्ट्र व उत्तर प्रदेश के दौरे की तैयारी कर रहे हैं.

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संविधान संशोधन को कानूनी चुनौती नहीं दी जा सकती

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संसद ही सर्वोच्च है.  संविधान के संशोधन को कानूनी चुनौती नहीं दी जा सकती.  अब यह एक अधिनियम बन चुका है, जिसे संसद ने पास किया है. केंद्रीय मंत्री अठावले ने आरक्षण के फैसले को कानूनी चुनौती मिलने के मुद्दे पर जवाब दिया. कहा कि अब हमने संविधान में संशोधन कर दिया है तो 50 प्रतिशत आरक्षण की सीमा खत्म हो गयी है. अठावले ने कहा कि संविधान सामाजिक और शैक्षिक पिछड़ेपन के मानदंडों पर आरक्षण को सही ठहराता है. इसमें संशोधन के लिए भी जगह है. संविधान लिखने वाले डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर ने भी संशोधन का प्रावधान रखा है.  यह सुनिश्चित करता है कि जाति और समुदाय पर आधारित परिस्थितियों के अनुसार लोगों को न्याय दिया जा सके.  आरक्षण का मतलब गरीबों को सिर्फ इसलिए कमजोर या वंचित करना नहीं है कि वे अगड़ी जाति के हैं.

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