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राम मंदिर के लिए पूरी जमीन चाहिए, इस जमीन पर नमाज नहीं होने देंगे : वीएचपी का अयोध्या में एलान

राम मंदिर के निर्माण के लिए हमें पूरी जमीन चाहिए और जमीन बंटवारे का कोई भी फार्मूला मंजूर नहीं होगा. राय ने कहा कि सुन्नी वक्फ बोर्ड को जमीन के मालिकाना हक का केस वापस ले लेना चाहिए. कहा कि  वीएचपी इस जमीन पर नमाज नहीं होने देगी.

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Lucknow : अयोध्या में आयोजित धर्मसभा को संबोधित करते हुए वीएचपी के अंतरराष्ट्रीय सचिव चंपत राय ने कहा कि राम मंदिर के निर्माण के लिए हमें पूरी जमीन चाहिए और जमीन बंटवारे का कोई भी फार्मूला मंजूर नहीं होगा. इस क्रम में चंपत राय ने कहा कि सुन्नी वक्फ बोर्ड को जमीन के मालिकाना हक का केस वापस ले लेना चाहिए. कहा कि  वीएचपी इस जमीन पर नमाज नहीं होने देगी. बता दें कि राम मंदिर पर इलाहाबाद हाई कोर्ट ने अपने फैसले में विवादित जमीन को तीन हिस्सों में बांटा था. धर्मसभा में जगद्गुरु रामानंदाचार्य स्वामी रामभद्राचार्य ने बिना नाम लिए केंद्र सरकार के बड़े मंत्री का हवाला देते हुए कहा कि उन्होंने भरोसा दिलाया है कि 11 दिसंबर से 12 जनवरी तक होगा राम मंदिर पर बड़ा फैसला होगा. मंच पर रहने वाले  अहम संतों में जगतगुरु रामानंदाचार्य, स्वामी हंसदेवाचार्य, रामभद्राचार्य, रामेश्वर दास वैष्णव, राम जन्मभूमि न्यास के महंत नृत्य गोपाल दास का नाम शामिल है. धर्म सभा में किसी नेता के शामिल होने की अनुमति नहीं है.

विहिप, आरएसएस व बजरंग दल के हजारों कार्यकर्ता पहुंचे

बता दें कि  विश्व हिंदू परिषद, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और बजरंग दल के हजारों कार्यकर्ता देश भर से बसों और ट्रेनों के जरिए धर्म सभा में हिस्सा लेने के लिए अयोध्या के कारसेवकपुरम में बड़े भक्तमाल की बगिया में पहुंचे हैं. इस सभा में आरएसएस के एक लाख और वीएचपी के एक लाख कार्यकर्ताओं के हिस्सा लेने का दावा किया जा रहा है. खबरों के अनुसार सिर्फ वाराणसी से 10,000 बजरंग दल के सदस़्य योध्या पहुंचे हैं. वीएचपी की धर्म सभा से पूर्व शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने सुबह साढ़े नौ बजे के लगभह रामलला के दर्शन किये. धर्मसभा को लेकर अयोध्या में सुरक्षा की चाक चौबंद व़्यवस़्था की गयी है.  वीएचपी के अंतरराष्ट्रीय महासचिव सुरेंद्र जैन के अनुसार रविवार को आयोजित धर्म सभा के बाद आरएसएस और वीएचपी के प्रतिनिधि सभी दलों के नेताओं से मुलाकात करना शुरू करेंगे और राम मंदिर पर कानून लाने के लिए समर्थन मांगेंगे. खबरों के अनुसार प्रयाग में 31 जनवरी और एक फरवरी को होने वाली धर्म सभा के समापन के बाद राम मंदिर निर्माण के लिए सभी शहरों के मंदिरों में प्रार्थना और यज्ञ का आयोजन होगा.

बड़ी संख्या में साधु-संतों और लाखों कार्यकर्ताओं के अयोध्या पहुंचने पर उत्तर प्रदेश प्रशासन ने बहुस्तरीय सुरक्षा की व्यवस्था की है, जिसके तहत 70 हजार पुलिस के जवान तैनात किये गये हैं. बता दें कि छह दिसंबर 1992, बाबरी विध्वंस की याद अयोध्या में रहने वाले अल्पसंख्यकों के जेहन में अभी भी ताजा है. मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए कई अल्पसंख्यक परिवारों के अयोध्या छोड़ने और दूसरे शहरों में रिश्तेदारों के यहां शरण ली है. 

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