ChaibasaKhas-Khabar

टेरर फंडिंग को लेकर NIA की रडार पर राम कृपाल सिंह कंस्ट्रक्शन, झारखंड की सत्ता पर रहा है कंपनी का दबदबा

विज्ञापन
  • झारखंड की सत्ता और राजनीति- ब्यूरोक्रेसी राम कृपाल सिंह कंस्ट्रक्शन कंपनी के इर्द-गिर्द रही घूमती
  • पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा के कार्यकाल में राम कृपाल सिंह कंस्ट्रक्शन कंपनी आयी चर्चा में.
  • पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास के 5 वर्षों के भाजपा सरकार में राम कृपाल सिंह कंस्ट्रक्शन कंपनी को मिला हजारों करोड़ का ठेका

Rajiv Singh

Chaibasa: टेरर फंडिंग को लेकर झारखंड की बहुचर्चित कंपनी राम कृपाल सिंह कंस्ट्रक्शन के यहां एनआइए का छापा पड़ा. एनआइए के छापे के बाद पूरे राज्य के ब्यूरोक्रेसी और राजनीतिक दलों में भूचाल है. इसकी वजह राम कृपाल सिंह कंस्ट्रक्शन “आरकेएस” के नाम का सिक्का राज्य की सत्ता के इर्द-गिर्द घूमना है. झारखंड की सत्ता से लेकर ब्यूरोक्रेसी और राजनीतिक दलों में राम कृपाल सिंह कंस्ट्रक्शन की तूती बोलती है. चाहे सरकार किसी की हो. अफसर कोई भी हो. उनके घर सब पहुंचते थे. कई बड़े पत्रकार भी.

राम कृपाल सिंह कंस्ट्रक्शन बिहार के बेगूसराय की एक साधारण सी ठेका कंपनी थी. जिसकी  हजारों करोड़ के कंस्ट्रक्शन कंपनी बनने की शुरुआत पश्चिमी सिंहभूम जिले के चाईबासा से हुई थी. आज पूरे झारखंड और देश में राम कृपाल सिंह कंस्ट्रक्शन एक जाना पहचाना नाम है.आरकेएस बस नाम ही काफी है.

या यूं कहें कि आरकेएस के इर्द-गिर्द ही झारखंड की सत्ता घूमती रही और ब्यूरोक्रेसी से लेकर राजनीतिक दलों के नेता घुटने टेकते रहे. यही कारण है कि मामूली ठेका कंपनी से आज राम कृपाल सिंह कंस्ट्रक्शन हजारों करोड़ का ठेका लेने वाली कंपनी बन गयी.

ये कंपनी पश्चिमी सिंहभूम जिला ही नहीं पूरे झारखंड में हजारों करोड़ रुपये के सड़क, भवन, पुल आदि का निर्माण कार्य करा रही है. और पहले भी हजारों करोड़ के सड़क, भवन और पुल- पूलियों का निर्माण करा चुकी है.

इसे भी पढ़ें –Dhanbad: बिजली समस्या की शिकायत लेकर ऑफिस पहुंचे थे BJP MLA, जीएम को नदारद पाकर भड़के

मधु कोड़ा का सत्ता के समय से आयी चर्चा में  

पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा के काल में लगभग 150 करोड़ की लागत से चाईबासा की बहुचर्चित हाट ग्म्हरिया बरायबुरु में 45 किलोमीटर सड़क का निर्माण कार्य इसी कंपनी ने किया था. उसके बाद ही  झारखंड की राजनीति में भूचाल आ गया था. तभी से राम कृपाल सिंह कंस्ट्रक्शन का  झारखंड की सत्ता में पकड़ हुआ. और इसी सड़क निर्माण के बाद ही आरकेएस का हजारों करोड़ की ठेका कंपनी बनने की शुरुआत हुई थी.

इसी बहुचर्चित हाटग्म्हरिया-बरायबुरु सड़क को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री और वर्तमान में केंद्रीय आदिवासी कल्याण मंत्री अर्जुन मुंडा को सत्ता से बाहर होना पड़ा था. उनकी सरकार में सहयोगी मंत्री रहे मधु कोड़ा सत्ता पलट कर मुख्यमंत्री की कुर्सी पर काबिज हुए थे. और रामकृपाल सिंह कंस्ट्रक्शन को बहुतचर्चित हाटग्म्हरिया-बरायबुरु की 45 किलोमीटर सड़क निर्माण का ठेका दिया गया.

शुरु में इसकी लागत 150 करोड़ की थी, जो बाद में बढ़कर लगभग 200 करोड़ की हो गयी. यहीं से राम कृपाल सिंह कंस्ट्रक्शन का झारखंड की सत्ता और राजनीति का केंद्र बिंदु बनने की शुरुआत हुई.

इसे भी पढ़ें – डूबती अर्थव्यवस्था में अगर सचमुच सुधार करना है तो दावों और यथार्थ के बीच के अंतर को समझना जरूरी है

झारखंड की सत्ता में बोलती थी कंपनी की तूती

झारखंड की सत्ता और ब्यूरोक्रेसी राम कृपाल सिंह कंस्ट्रक्शन के इर्द-गिर्द घूमती रही. कहा तो यह भी जाता है कि रामकृपाल कंस्ट्रक्शन कंपनी के लिए झारखंड की सत्ता,सरकार, शासन-प्रशासन काम करती रही.

राम कृपाल सिंह कंस्ट्रक्शन का पथ निर्माण और भवन निर्माण विभाग में तूती बोलने लगी. पूर्व मुख्य सचिव रही राजबाला वर्मा के पथ निर्माण सचिव और भवन निर्माण सचिव के कार्यकाल में, हजारों करोड़ का पथ निर्माण और भवन निर्माण का ठेका राम कृपाल सिंह कंस्ट्रक्शन कंपनी को मिलता रहा. घपले-घोटाले के भी आरोप लगे. पर रघुवर सरकार ने जांच नहीं करायी.

बताया जाता है कि राजबाला वर्मा के मुख्य सचिव बनने के बाद तो मानो राम कृपाल सिंह कंस्ट्रक्शन की झारखंड के ब्यूरोक्रेसी और सत्ता पर कब्जा ही हो गया. कई ऐसे प्रकरण सामने आये, जिससे स्पष्ट हुआ कि राम कृपाल सिंह कंस्ट्रक्शन खुद सड़क का प्राक्कलन तैयार करता है और कैसे ठेका हासिल करना है, यह भी तय करता है.

पश्चिमी सिंहभूम जिले में हाटग्म्हरिया-बरायबुरु सड़क के साथ ही दर्जन भर बड़ी सड़कों और पुल निर्माण का ठेका राम कृपाल सिंह कंस्ट्रक्शन को मिला. जिसकी लागत करोड़ों रुपये थी. राम कृपाल सिंह कंस्ट्रक्शन ठेका कंपनी को लाभ पहुंचाने के लिए ही कई नई सडकों की भी स्वीकृति दी गयी और पुल एवं भवन निर्माण की योजना तैयार की गयी. जिसकी लागत शुरु में कम थी. बाद में बढ़ा दिया गया.

कई बार यह आरोप लगा कि सरकार और ब्यूरोक्रेसी ने राम कृपाल सिंह कंस्ट्रक्शन कंपनी को ठेका देने के लिए नयी सड़कें बनायी. कुछ दिन पहले ही बनी सड़कों के चौड़ीकरण के काम का टेंडर निकाल कर इस कंपनी को दिया गया.

इसे भी पढ़ें – दूसरी बार झारखंड कंबाइंड ने बढ़ाया बीएड कंबाइंड एंट्रेंस टेस्ट डेट, अब 15 जून तक कर सकते हैं एप्लीकेशन

Advertisement

Leave a Reply

Your email address will not be published.

Related Articles

Back to top button
Close