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Rajyasabha Election: भाजपा में आखिर किस नाम पर बनेगी सहमति, सुगबुगाहट तेज

Ranchi : 10 जून को राज्यसभा की दो सीट पर झारखंड में चुनाव होने हैं. सांसद महेश पोद्दार और मुख्तार अब्बास नकवी का कार्यकाल जुलाई के पहले सप्ताह में खत्म होना है. इससे पहले ही इन दो सीटों के लिए चुनाव करा लिये जाने की तैयारी है. निर्वाचन आयोग ने चुनाव कराने के संबंध में औपचारिक सूचना जारी कर दी है. संख्या बल के हिसाब से एक सीट पर सत्तारूढ़ दलों में शामिल कांग्रेस और झामुमो अपना अपना ताल तो ठोकेगा ही, प्रदेश भाजपा भी एक सीट के लिए अपने मिशन पर लग गयी है.

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प्रदेश अध्यक्ष और सांसद दीपक प्रकाश दिल्ली दौरे पर हैं. उम्मीद की जा रही है कि राज्यसभा चुनाव के संदर्भ में भी शीर्ष नेतृत्व से कुछ मैसेज लेकर लौटें. इधर प्रदेश भाजपा में कैंडिडेट फाइनल करने के संबंध में तैयारियां शुरू होने के कयास हैं. बतौर प्रत्याशी भाजपा के कई नेता उम्मीदें तलाश रहे हैं. ऐसा नहीं है कि महज एक-दो नामों तक ही चर्चा हो रही है. कम से कम चार से पांच नामों पर सुगबुहगाहट शुरू हो चुकी है.

इन नामों पर लगाया जा रहा दांव

प्रदेश भाजपा अगले कुछ दिनों में पार्टी के संभावित कैंडिडेटों के नाम पर मंथन करने बैठेगी. बैठक के बाद संभवतः तीन नाम यहां से भाजपा के शीर्ष नेतृत्व को भेजे जायेंगे. फिलहाल अब तक जो चर्चा चल रही है, उसमें पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और पूर्व सांसद डॉ रवींद्र कुमार राय एक मजबूत नामों में से हैं. उन्हें कुछ समय पहले हुडको में स्वतंत्र निदेशक भी बनाया गया है. वैसे एक नाम पूर्व सीएम और भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रघुवर दास का भी है.
इसके अलावे प्रदेश महामंत्री आदित्य कुमार साहू, जेनरल सेक्रेट्री (प्रदेश) डॉ.प्रदीप वर्मा, कोषाध्यक्ष (प्रदेश) दीपक बंका का नाम भी उछाला जा रहा है. इनके अलावे एक नाम चंद्र भूषण झा का भी है, जिन्हें केंद्रीय मंत्री अर्जुन मुंडा का करीबी बताया जाता है.

आदित्य साहू को भेल का स्वतंत्र निदेशक बनाया गया है. इन नामों के अलावे प्रदेश पदाधिकारी में शामिल बालमुकुंद सहाय का भी नाम गाहे बेगाहे लिया जा रहा है. वैसे कैंडिडेट कौन फाइनल होगा, इसमें पार्टी ने अपनी ओर से औपचारिक तौर पर कोई फैसला अभी नहीं लिया गया है. राजनीतिक चरित्र को देखते मुमकिन है कि कयास लगाये जा रहे नामों से इतर कोई और नाम आ जाये.

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कितनी आसान होगी राज्यसभा की राह

कहा जाता है कि पिछली दफा जब दीपक प्रकाश का नाम राज्यसभा के लिये तय हुआ था, उस दौरान ही रघुवर दास भी इसके लिये इच्छुक थे. हालांकि किन्हीं कारणों से इस पर बात नहीं बन सकी थी. मुमकिन है कि उनका नाम इस दफा फिर से रेस में आए. वैसे उनके नाम पर आजसू पार्टी की सहमति और मदद ले पाना सहज नहीं होगा. ऐसे में संभव है कि भाजपा उनसे निचली पंक्ति के नेताओं पर दांव खेले. रवींद्र राय, आदित्य साहू, प्रदीप वर्मा जैसे नेता इस स्थिति में उम्मीद कर सकते हैं. भाजपा को अपना कैंडिडेट फाइनल करने की चुनौती तो होगी ही, राज्यसभा चुनाव के लिए जोड़-घटाव भी करना होगा.

81 विधानसभा सीटों वाली झारखंड विधानसभा में सत्ता पक्ष के पास पहले 49 विधायक थे. पर अब कांग्रेस के बंधु तिर्की की विधायकी खत्म होने के उसके पास 48 विधायक हैं. भाजपा के पास अब बाबूलाल मरांडी का भी सपोर्ट है तो इसे मिलाकर उसके पास 26 विधायक हैं. इसके अलावा उसे आजसू के दो विधायकों, सरयू राय और 2 निर्दलीय विधायकों (अमित महतो, एनसीपी के कमलेश सिंह) से समर्थन की आस रहेगी. निर्दलीय विधायक सरयू राय और आजसू सुप्रीमो सुदेश महतो ने झारखंड लोकतांत्रिक मोर्चा बना रखा है. ऐसे में इस चुनाव में उनके अहम रोल को देखते हुए भाजपा उनसे सहयोग जरूर मांगेगी.

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