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Jharkhand : गले की फांस बन रहा है महागठबंधन में राज्यसभा चुनाव

कांग्रेस ने की दावेदारी, झामुमो ने कहा- विस चुनाव के समय नहीं हुई थी ये बात

Rajesh Tiwari

Ranchi: झारखंड में 10 जून को राज्यसभा के लिये दो सीटों पर चुनाव होना है. चुनाव आयोग द्वारा इसके लिये तिथि की घोषणा के साथ ही महागठबंधन के प्रमुख दल कांग्रेस और झामुमो में टकराव शुरू हो गयी है. जिस तरह से  दोनों ही दलों की तरफ से बयानो के तीर चल रहे हैं वह साफ संकेत दे रहा है कि राज्यसभा का चुनाव इन दोनों दलों के बीच गले की फांस बनता जा रहा है.

पिछले चुनाव का हवाला देते हुये जहां कांग्रेस राज्यसभा चुनाव के लिये अपनी दावेदारी ठोके हुये है वहीं, झामुमो ने साफ कहा है कि विस चुनाव के समय सिर्फ विस सीटों को लेकर दोनों ही दलों के बीच समझौता हुआ था. इसमें राज्यसभा को लेकर कोई बात नहीं हुई थी.

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क्या यह वर्तमान राजनीति का असर तो नहीं

पिछले एक पखवाड़े से झारखंड की सियासी हलचल मौसम के साथ गरमायी हुई है. जिस तरह से लगातार प्रमुख विपक्षी पार्टी भाजपा हेमंत सरकार के खिलाफ तेवर तल्ख किये हुये है और इस बीच कांग्रेस का अंदरूनी कलह भी गाहे-बगाहे सामने आ रही है. वो इस बात का संकेत दे रहा है कि झारखंड में होने वाले दो सीटों के राज्यसभा चुनाव में कोई बड़ा खेल हो सकता है. कांग्रेस विधायक इरफान अंसारी जिस तरह पार्टी लाइन से इतर जाकर लगातार यह बयान दे रहे हैं कि उनके साथ पार्टी के आठ विधायक हैं, ये कोई बड़ा खेला कर सकता है. कांग्रेस भी इरफान के इस आचर से सशंकित है. कांग्रेस पार्टी पिछले चुनाव का हवाला देकर इस बार राज्यसभा चुनाव में पहली प्राथमिकता अपने दल के उम्मीदवार को लेकर झामुमो पर दबाव बना रही है. लेकिन, आंकड़े का हवाला देकर झामुमो कांग्रेस के इस दबाव को दरकिनार किये हुये है. गौरतलब है कि राज्यसभा चुनाव में जीत के लिये 27 विधायकों का समर्थन चाहिये और आंकड़े के हिसाब से झामुमो के पास 30 विधायकों का समर्थन है. ऐसे में साफ है कि झामुमो राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस के दबाव में नहीं आयेगा.

 सीएम हेमंत का मामला झामुमो को कर रहा कमजोर

यह सही है कि झामुमो के पास 30 विधायक हैं और राज्यसभा चुनाव में वह अपने बूते एक सीट निकाल सकता है. लेकिन जिस तरह से मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, उनके विधायक भाई बसंत सोरेन, पत्नी कल्पना सोरेन खदान लीज मामले में फंसी हुई हैं, यह झामुमो की राज्यसभा जाने की राह में एक बड़ा रोड़ा बना हुआ है. कांग्रेस पार्टी चाहती है कि वह झारखंड से अपने किसी बड़े नेता को राज्यसभा भेजकर पार्टी में व्याप्त कलह को शांत करे. जो जानकारी मिल रही है कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी अविनाश पांडे और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राजेश ठाकुर खान मामले में उलझी हेमंत सोरेन को बैकफूट पर लाकर राज्यसभा की बैतरणी पार करे. इस बीच यह भी जानकारी मिल रही है कि कांग्रेस आलाकमान राष्ट्रीय स्तर पर कांग्रेस में व्याप्त ऊहापोह की स्थिति को शांत करने के लिये कपिल सिब्बल को झारखंड से राज्यसभा भेजने की तैयारी कर रहा है. जयपुर में चल रहे चिंतन शिविर में देश भर में होने वाले राज्यसभा चुनाव पर भी चर्चा हो रही है. कांग्रेस पार्टी को झारखंड एक सेफ सीट दिखायी दे रहा है. देखना दिलचस्प होगा कि हेमंत सोरेन अपनी चलाते हैं या फिर कांग्रेस के सामने घुटने टेकते हैं.

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