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राजमहल लोकसभा सीटः विजय हांसदा और हेमलाल के लिए कम नहीं चुनौतियां

साहेबगंज जिले के एक तरफ गंगा तो दूसरी तरफ पहाड़ है, लाजमी है कि यहां कुछ चुनावी मुद्दे गंगा, पहाड़ व जमीन से जुड़े हुए ही होंगे.

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Nirbhay Ojha

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Sahebgunj: झारखंड का साहेबगंज जिला, राजमहल लोकसभा के अंतर्गत आता है. इसके राजनीतिक इतिहास की बात करें तो यहां से सांसद के रूप में सबसे ज्यादा बार जेएमएम और कांग्रेस विजयी रही.

बात करें इस बार के लोकसभा चुनाव की तो महागठबंधन में शामिल झारखंड मुक्ति मोर्चा के खाते में राजमहल लोकसभा सीट गयी है. और यहां से प्रत्याशी के तौर पर वर्तमान सांसद विजय हांसदा पर जेएमएम ने फिर से भरोसा जताया है.

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फिर हेमलाल पर बीजेपी को भरोसा

वहीं एनडीए उम्मीदवार के तौर पर भारतीय जनता पार्टी ने एक बार फिर हेमलाल मुर्मू को मैदान में उतारा है. आपको बता दें कि हेमलाल मुर्मू 2014 में भी एनडीए के उम्मीदवार थे. और उन्हें विजय हांसदा ने करीब 43 हजार वोट से पराजित किया था.

वहीं 2015 के विधानसभा चुनाव में जेएमएम के उम्मीदवार हेमंत सोरेन थे. वहां भी हेमलाल मुर्मू क़ो पराजय का सामना करना पड़ा. उसके बाद विधायक अनिल मुर्मू की आकस्मिक मृत्यु के बाद खाली हुई सीट पर भाजपा ने एकबार फिर हेमलाल को प्रत्याशी बनाया. लेकिन वहां भी उन्हें जेएमएम के प्रत्याशी साइमन मरांडी के सामने हार का मुंह देखना पड़ा.

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इतनी बार पराजय का सामना कर चुके हेमलाल पर फिर से नरेंद्र मोदी की टीम ने दांव लगाया है. खबर ये भी है कि कार्यकर्ताओं को वो कुछ खासे पसंद नहीं. लेकिन पार्टी के अंदरखाने में इस बात की चर्चा है कि हेमलाल क़ो टिकट अर्जुन मुंडा की वजह से मिली है.

विजय हांसदा से खुश नहीं जनता?

दूसरी ओर बात करें विजय हांसदा की, तो वो पांच साल से सांसद हैं. बतौर सांसद पांच साल में उनकी ऐसी कोई उपलब्धि नहीं है, जिसके आधार पर वो जनता से वोट मांग पाये. जनता का सबसे बड़ा आरोप है कि पांच सालों में उन्होंने अपने ही क्षेत्र को समय नहीं दिया.

इलाके में गंगा नदी पर पुल की मांग करीब 70 साल पुरानी है. पीएम मोदी ने इसका शिलान्यास तो किया. लेकिन बाद में टेंडर कैंसल हो गया, जिसे लेकर जेएमएम बीजेपी पर हमलावर है. वहीं बीजेपी इस बनाने का दावा कर रही है.

भाजपा कह रही है इस बार गंगा पुल बनने का काम शुरू हो गया है. अगले पांच साल में पुल बन जायेगा. साथ ही खासमहल के मुद्दे पर भी पार्टी वही राग आलाप रही है.

कुल मिलाकर राजमहल लोकसभा सीट पर दोनों ही गठबंधन अपनी-अपनी जीत का दावा कर रही है. जहां एक ओर महागठबंधन आदिवासी व मुस्लिम वोटरों को अपने पक्ष में गोलबंद करने की जुगाड़ में है.

तो वही एनडीए पूरी तरह से मोदी है तो मुमकिन है पर टिकी है. अब देखना है कि इस बार राजमहल की जनता किसको चुनकर लोकसभा भेजती है.

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