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कोल्हान प्रमंडल के पारा शिक्षकों ने राजभवन के समक्ष किया प्रदर्शन

मांगों को लेकर पांचवें दिन शिक्षकों ने किया प्रदर्शन

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Ranchi: एकीकृत पारा शिक्षक संघर्ष मोर्चा के बैनर तले शुक्रवार को पांचवें दिन कोल्हान प्रमंडल के पारा शिक्षकों ने राजभवन के समक्ष प्रदर्शन किया. हजारों की सख्या में पहुंचे पारा शिक्षकों ने मांगों को लेकर मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री से अपील की कि अन्य राज्यों के तर्ज पर उन्हें भी स्थाई सेवा व मानेदय दी जाये. मोर्चा के बजरंग प्रसाद ने कहा कि राज्य में पारा शिक्षकों का आंदोलन लंबे समय से अपनी मांगों को लेकर जारी है. लेकिन, सरकार की कानों में जूं तक नहीं रेंग रही है. इससे स्पष्ट है कि पारा शिक्षकों की मांग को लेकर सरकार और शिक्षा विभाग के अधिकारी कितने गंभीर हैं. कोल्हान प्रमंडल के संजय मिश्रा ने कहा कि 15 नवबंर तक सरकार अगर पारा शिक्षकों की मांगों पर विचार नहीं करती है, तो पारा शिक्षक उग्र आंदोलन को विवश होंगे. कोल्हान क्षेत्र के भाजपा विधायक और सांसद के कार्यक्रमों का विरोध पारा शिक्षकों के द्वारा किया जायेगा. मौके पर कोल्हान प्रमंडल के बेहरा कुणाल दास, सुमित तिवारी, सोनू सरदार, रोहित कुमार, संजीव रजत, हिमांशु शेखर, प्रभा मंडल, राजू मिश्रा, रंजीत प्रमाणिक, सरिता कुजुर, रोहिणी कुमारी, मंजू,  सनी कुमार, बैजनाथ महतो, इत्यादि हजारों हजारों की संख्या में पारा शिक्षक मौजूद थे. कार्यक्रम का संचालन एकीकृत पारा शिक्षक संघर्ष मोर्चा के प्रदेश नेता नरोत्तम सिंह, मुंडा बजरंग प्रसाद, ऋषिकेश पाठक, दशरथ ठाकुर के नेतृत्व में किया गया.

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स्थापना दिवस के भाजपा विधायक एवं सांसद विरोध करेंगे पारा शिक्षक

एकीकृत पारा शिक्षक मोर्चा के ऋषिकेश पाठक ने कहा कि पारा शिक्षकों की मांगों पर सरकार एवं शिक्षा अधिकारी राज्य स्थापना दिवस से पहले कोई सकारात्मक पहल नहीं करते हैं तो इस दिशा में 16 नवबंर को राज्य के पारा शिक्षकों द्वारा रांची के चौक-चौराहों पर उग्र प्रदर्शन किया जायेगा. साथ ही राज्य के सभी भाजपा विधायकों व सांसदों के कार्यक्रमों का विरोध पारा शिक्षकों द्वारा किया जायेगा. मोर्चा के मनोज यादव ने कहा सरकार पारा शिक्षकों उच्च स्तरीय कमिटी के नाम ठगने का कार्य कर रही है. पारा शिक्षक अपनी मांगों को लेकर सरकार के खिलाफ उग्र प्रदर्शन करने को विवश हो रहे हैं. आंदोलन के पांचवें दिन भी भाजपा एवं सरकार को भी अधिकारी प्रदर्शन स्थल पर वार्ता के लिए नहीं आया इससे स्पष्ट होता है कि पारा शिक्षकों को लेकर सरकार कितनी गंभीर है.

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