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पांचवीं अनुसूची को लागू करने में राजभवन नहीं ले रहा रुचि: जॉर्ज मोनोपॉली

झारखंड वन अधिकार की ओर से कार्यशाला का आयोजन

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Ranchi: पांचवीं अनुसूची को लागू करना और उसमें किसी भी तरह का हस्तक्षेप करने का अधिकार सिर्फ राज्यपाल को है. पांचवीं अनुसूची क्षेत्र का अर्थ ही राज्यपाल का अधिकार है. लेकिन राज्य में लगता है कि राज्यपाल के निर्णय काउंसिल ऑफ़ मिनिस्टर्स पर निर्भर हैं. उक्त बातें फादर जॉर्ज मोनोपॉली ने झारखंड वन अधिकार की ओर से आयोजित एक दिवसीय कार्यशाला में कही. कार्यशाला का विषय स्टेट लेवल कंसल्टेशन ऑन पीपुल्स मेनिफेस्टो ऑन एंड गवर्नेंस रखा गया था. फादर जॉर्ज ने कहा कि ऐसा होना नहीं चाहिए. एक महाराष्ट्र ऐसा राज्य है जहां के राज्यपाल ने खुद से जनजातियों के हित में निर्णय लिये. पांचवीं अनुसूची क्षेत्र में सरकार किसी भी प्रकार का हस्तक्षेप नहीं कर सकती. राज्य की स्थिति तो ऐसी है कि पांचवीं अनुसूची को लागू करने में राजभवन रुचि ही नहीं ले रहा. आदिवासी इलाके उपेक्षित हो गये हैं.

आदिवासियों के रक्षा कवच होते हैं राज्यपाल  

राज्य में सरकार जो चाहती है वहीं हो रहा: जॉर्ज ने कहा कि राज्य की स्थिति ऐसी है कि सरकार जो चाह रही है वहीं हो रहा है. जबकि पांचवीं अनुसूची के तहत हर नियम में सिर्फ राज्यपाल हैं. आदिवासियों का रक्षाकवच राज्यपाल को समझा जाता है. लेकिन ऐसा हो नहीं रहा. 99 प्रतिशत सोच ऐसी है कि राज्यपाल मंत्रियों के अनुसार ही चलेंगे.

राजनीतिक दलों के घोषणा पत्र में हस्तक्षेप आवश्यक

झारखंड वन अधिकार के संयोजक मंडल सदस्य सुधीर पाल ने कहा कि वर्तमान राजनीति को देखते हुए जरूरी है कि जनता राजनीतिक दलों के घोषणा पत्रों में हस्तक्षेप करे. उन्होंने कहा कि कार्यशाला में जो भी सुझाव आयेंगे, उसी के आधार पर पीपुल्स मेनिफेस्टो तैयार किया जायेगा. इसके बाद इस घोषणा पत्र को सभी राजनीतिक दलों को दिया जायेगा. जिससे इन सुझावों को वे अपने मेनिफेस्टों में शामिल कर सकें.

इन मुद्दों पर की गयी चर्चा

पांचवीं अनुसूची क्षेत्र में स्वशासन के मुद्दे, पेशा का उल्लंघन, ट्राइबल सब प्लान. भूमि अधिग्रहण एवं विस्थापन, लैंड बैंक और कैंपा कानून आदि में विचार किया गया.

 निर्णय लिये गये

कार्यशाला में शामिल सामाजिक कार्यकर्ताओं ने राजनीतिक दलों को सुझाव देने के लिए कई निर्णय लिये. जिसमें राज्यपाल को परामर्श के लिए जिम्मेदारियों को सुनिश्चित करना, ट्राइबल एडवाइजरी काउंसिल में एक चैथाई सदस्यों को लेकर स्पष्टता, पांचवीं अनूसूची के अंतर्गत आदिवासी जमीन स्थानांतरण एवं सूदखोरी बंद करने जैसे मुद्दे शामिल हैं.

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