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राजभवन के समक्ष धरना, रैयतों ने कहा, मर जायेंगे, पर अडानी प्लांट को जमीन नहीं देंगे  

गोड्डा में लगने वाले अडानी ग्रुप के प्रस्तावित पॉवर प्लांट के लिए जबरन किये जा रहे जमीन अधिग्रहण के खिलाफ स्थानीय रैयतों ने बुधवार को राजभवन के समक्ष धरना दिया.

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Ranchi  : गोड्डा में लगने वाले अडानी ग्रुप के प्रस्तावित पॉवर प्लांट के लिए जबरन किये जा रहे जमीन अधिग्रहण के खिलाफ स्थानीय रैयतों ने बुधवार को राजभवन के समक्ष धरना दिया. इन रैयतों का कहना है कि बिना नोटिस दिये उनकी जमीन बलपूर्वक हथिया ली जा रही है.  सरकार के सहयोग से कंपनी की यह सोची समझी साजिश है.  यह भूमि अधिग्रहण कानून का घोर उल्लंघन है. हम रैयत मर जाना पंसद करेंगे, लेकिन किसी भी हालत में अपनी जमीन प्लांट लगाने के लिए सरकार या कंपनी को नहीं सौपेंगे.

मालूम हो कि गोड्डा में प्रस्तावित अडाणी ग्रुप द्वारा जमीन अधिग्रहण और प्रशासन द्वारा किसानों की फसल नष्ट करने को लेकर कुछ दिन पहले दुमका में भी विरोध प्रदर्शन किया गया था. प्रदर्शनकारियों का कहना था कि हमेशा आदिवासी हितों की बात करने वाले राज्य के सभी राजनीतिक दलों में से किसी ने भी अबतक प्रस्तावित अडानी पॉवर प्लांट के विरोध का खुलकर समर्थन नहीं किया है.


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मालीगांव में स्थापित किया जाना है अडानी प्लांट

मालूम हो कि अडानी द्वारा यह प्लांट गोड्डा के माली गांव में स्थापित किया जाना है. आरोप है कि पोड़ैयाहाट प्रखंड स्थित माली गांव में लगने वाले इस प्लांट के लिए जिला प्रशासन ने अब तक 10 संथाल आदिवासी किसानों की 16 बीघा 16 कट्ठा और 7 धुर जमीन जबरन ले ली है. जमीन अधिग्रहण करने के क्रम में उस जमीन पर लगी धान की फसल को कंपनी के अधिकारियों ने चार पोकलेन लगाकर नष्ट कर दिया. आरोप लगाया गया है कि स्थानीय संथालों के धार्मिक स्थल जंगबाहा को भी नष्ट किया गया था. इसी के विरोध में स्थानीय किसानों का सरकार विरोधी प्रदर्शन लगातार जारी है.

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जबरन बुलडोजर चला कर जमीन लेने का आरोप

पावर प्लांट के लिए अधिग्रहित की गयी जमीन को लेकर मालीगांव स्थित कई रैयतों से न्यूज विंग संवाददाता ने बातचीत की. राकेश हेम्ब्रम नामक रैयत ने बताया कि जिला प्रशासन के सहयोग से अडानी पॉवर कंपनी ने बिना नोटिस दिये उनकी करीब 16 बीघा 16 कट्टा 4 धुर जमीन जबरन ले ली. यह जमीन उनके जीवनयापन का साधन है, लेकिन कंपनी को इसकी चिंता नहीं है. यह तीन फसली जमीन है, इसी में हमारे पूर्वजों का कब्रस्थान है. यहां स्थित हमारे जंगबाहा को जबरन बुलडोजर चलाया गया. इससे यहां लगी फसल पूरी तरह से नष्ट हो गयी. स्थानीय रैयत अनिल हेम्ब्रम ने बताया कि जमीन लेने के पूर्व हमलोगों को किसी तरह की कोई नोटिस जिला प्रशासन द्वारा नहीं दिया गया.

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मुआवजा लेना होता तो पहले ही नहीं ले लेते?

जमीन अधिग्रहण के पहले मुआवजा मिलने के सवाल पर इन रैयतों का कहना है कि सरकार ने अब तक किसी तरह की मुआवजा राशि तय नहीं की है. अगर सरकार ऐसा कर भी देती, तो भी हम रैयत किसी तरह का कोई मुआवजा नहीं लेंगे. अगर मुआवजा लेना भी होता तो पहले ही ले लेते. हम मर जायेंगे, लेकिन अपनी पुस्तैनी जमीन किसी भी हालत में सरकार या अडानी प्लांट को नहीं देंगे. रैयतों ने कहा कि हमारी बस यहीं मांग है कि उनकी जमीन कंपनी के अधिकार क्षेत्र से पूरी तरह मुक्त की जाये.

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