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राहुल गांधी ने कहा, #Bhima_Koregaon प्रतिरोध का प्रतीक, मोदी-शाह का विरोध करने वाले अरबन नक्सल करार दिये जाते हैं

 राहुल गांधी ने अपने ट्वीट में नरेंद्र मोदी-अमित शाह के लिए अंग्रेजी के MOSH शब्द का इस्तेमाल किया है.

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NewDelhi : भीमा-कोरेगांव मामले को NIA को सौंपे जाने पर  केंद्र सरकार और महाराष्ट्र सरकार में ठन गयी है. कांग्रेस, NCP मोदी सरकार पर हमलावर हो गये हैं. राहुल गांधी ने कहा कि भीमा-कोरेगांव प्रतिरोध का प्रतीक है.

जो कोई भी मोदी-शाह के नफरत भरे एजेंडे का विरोध करता है उसे अरबन नक्सल करार दे दिया जाता है.  कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने यह बात कही है. यह कहते हुए  राहुल गांधी ने अपने ट्वीट में नरेंद्र मोदी-अमित शाह के लिए अंग्रेजी के MOSH शब्द का इस्तेमाल किया है.

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NCP केंद्र के इस फैसले का विरोध कर रही है

राहुल ने ट्वीट किया, MOSH के नफरत भरे एजेंडे का जो भी विरोध करता है उसे अरबन नक्सल करार दे दिया जाता है, भीमा-कोरेगांव प्रतिरोध का प्रतीक है जिसे सरकार के NIA के पिट्ठू कभी खत्म नहीं कर सकते हैं.   इस क्रम में NCP प्रमुख शरद पवार ने कहा कि केंद्र सरकार ने जल्दबाजी में इस मामले को NIA के पास भेज दिया.

इसका मतलब यह है कि मैंने जो पत्र में शंका जताई थी कि जो भाषण शनिवारवाड़ा में हुए थे वो अन्याय और अत्याचार के खिलाफ थे, और उसका नक्सलवाद से कोई लेना देना नहीं है. जान लें कि  केंद्र सरकार ने भीमा कोरेगांव मामले को NIA को सौंप दिया है जिस कारण विवाद हो रहा है. NCP केंद्र के इस फैसले का विरोध कर रही है.

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इतनी जल्दबाजी में इसे क्यों NIA को दिया गया?

शरद पवार ने कहा कि उस समय के महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री ने इस प्रकरण के 3 महीने बाद एक बयान दिया जिसमें उन्होंने भीमा कोरेगांव प्रकरण पर बात की, लेकिन उन्होंने तब भी माओवाद नाम का ज़िक्र नहीं किया, जबकि वो खुद गृह मंत्री थे.

शरद पवार ने कहा कि इसलिए यह सब के वजह से मैंने इस मामले की दोबारा से जांच करने की मांग करते हुए उद्धव ठाकरे को पत्र लिखा. मेरी मांग थी कि एक स्वतंत्र जांच हो और सत्य सामने आये. इसका एक पत्र गृह मंत्री को भी भेजा.

इसके बाद इस मामले पर और जानकारी के लिए गृह मंत्री ने बैठक भी बुलाई और उसके 4 से 5 घंटों में ही इसे केंद्र सरकार ने अपने एजेंसी को दे दिया. शरद पवार ने कहा कि इस मामले की जांच की जिम्मेदारी राज्य और केंद्र सरकार दोनों की है. लेकिन इतनी जल्दबाजी में इसे क्यों NIA को दिया गया? कहा कि कुछ गलत लोगों को आरोपी बनाया गया है. जांच में यह सब साफ हो जायेगा. इसलिए केंद्र सरकार ने इसे अपने पास ले लिया. सच बाहर आने के लिए जो कदम उठाये गये उसे केंद्रीय गृह मंत्री ने रोक दिया.

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