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पांच सालों में रघुवर की डबल इंजन सरकार राज्य में नियुक्त नहीं कर सकी कैंसर के पांच डॉक्टर

44 करोड़ की लागत से बनाया गया था रिम्स में कैंसर डिपार्टमेंट

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Ranchi : रिम्स कैंपस में 44 करोड़ की लागत से कैंसर डिर्पाटमेंट बनाया गया है. जहां इलाज कराने प्रतिमाह 450 से 500 नये कैंसर के मरीज आते हैं. इंफ्रास्ट्रक्चर में करोड़ों खर्च किये जाने और अलग विभाग होने के बावजूद रिम्स में आनेवाले मरीजों को रिम्स का ऑन्कोलॉजी विभाग कैंसर मुक्त नहीं कर पाता. डॉक्टरों की कमी के बीच रिम्स प्रशासन के कैंसर विभाग को रघुवर दास की डबल इंजन सरकार पांच डॉक्टर तक नहीं दे सकी.

रिम्स का कैंसर विभाग अब पूरी तरह से डॉ अनूप कुमार और असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ रश्मि सिंह के भरोसे चलता रहा. आचार संहिता लागू होने से एक महीने पहले तीन डॉक्टरों ने ज्वाइन किया है, पर उनमें से भी दो डॉक्टरों के छोड़ने की चर्चा है.

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रिम्स में मात्र एक स्पेशलिस्ट सीनियर डॉक्टर मौजूद है

कैंसर विभाग में नर्सों की भी भारी कमी है, जिसके कारण महिलाओं के कीमो के दौरान महिला प्यून से काम लिया जाता है. बता दें कि कैंसर का इलाज कराने अस्पताल आने वाले ज्यादातर मरीजों को डॉक्टर सीएमसी वैल्लोर, एम्स और टाटा कैंसर अस्पताल रेफर कर देते हैं.

स्वास्थ्य विभाग स्वास्थ्य सुधार की दिशा में काम कर रहा है. करोड़ों के फंड खर्च किया जा रहा है, पर कैंसर के इलाज के लिए रिम्स में मात्र एक स्पेशलिस्ट सीनियर डॉक्टर मौजूद हैं. तीन अन्य नये डॉक्टर हैं. डॉक्टरों की कमी के कारण कैंसर के मरीजों को अन्य बड़े और महंगे अस्पतालों की ओर रुख करना पड़ता है.

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मरीजों को दिल्ली एम्स, सीएमी वैल्लोर और टाटा कैंसर अस्पताल जाने की सलाह

रिम्स में प्रति माह करीब 500 कैंसर के मरीज आते हैं. जिनका इलाज रिम्स में किया जाता है, पर अधिकतर मामलों में डॉक्टर मरीजों को दिल्ली एम्स, टाटा कैंसर अस्पताल, सीएमसी वैल्लोर जैसे अस्पतालों में जाकर इलाज कराने की सलाह देते हैं. राज्य से करीब हर माह सैंकड़ों मरीज वैल्लोर अपने किडनी, कैंसर जैसी बीमारियों का इलाज कराने जाते हैं.

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टाटा ट्रस्ट खोल रहा है कैंसर अस्पताल

राज्य सरकार ने टाटा ट्रस्ट को कैंसर अस्पताल खोलने के लिए एक रुपये की टोकन मनी पर रिनपास में 23.5 एकड़ जमीन 30 साल के लिए दी है. टाटा ट्रस्ट के दवारा खोले जाने वाले कैंसर अस्पताल में सीजीएचएस की दर पर इलाज होगा. झारखंड के मरीजों के लिए 50 प्रतिशत सीटें आरक्षित रहेंगी.

बता दें कि इससे पहले टाटा को जमीन देने पर वित्त विभाग ने आपत्ति दर्ज करायी थी, कहा था कि मुंबई स्थित कैंसर अस्पताल मात्र 4.5 एकड़ जमीन में है, तो रांची में इतनी जमीन की आवश्यकता क्यों. हालांकि कैबिनेट की ओर से 23.5 एकड़ जमीन देने पर स्वीकृति दे दी गयी थी. अब कैंसर अस्पताल बनाने का काम चालू हो चुका है.

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