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मुश्किल में रघुवर सरकारः 1.90 लाख स्थायी कर्मियों में 70,700 और 2.53 लाख मानदेयकर्मी फूंक रहे आंदोलन का बिगुल!

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Akshay Kumar Jha

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Ranchi: फिलहाल इसे आफत नहीं, बल्कि रघुवर सरकार के लिए मुश्किल कहा ही जा सकता है. सर पर आम चुनाव और फौरन बाद विधानसभा चुनाव. पार्टी लेवल पर जितनी भी तैयारी हो जाए, पर आंदोलन का बिगुल फूंकने वाली कर्मियों की फौज ने निश्चित ही रघुवर सरकार के पेशानी पर बल ला दिया है. सरकार के खजाने में वो दम नहीं कि जादू की छड़ी घुमाए और सारे मसलों का समाधान छू-मंतर हो जाए. लिहाजा सरकार मुश्किल में है. ऐसा भी नहीं है कि चुनाव से पहले ऐसा संयोग पहली बार देखा जा रहा है. लेकिन जो आंकड़े हैं, वो चौंकाने वाले हैं. सरकार के स्थायी वेतन भोगियों की संख्या करीब 1.90 लाख है. इनमें से 70,700 कर्मी और मानदेय पर काम करनेवाले करीब 2.53 लाख कर्मी या तो आंदोलनरत हैं, या फिर आंदोलन और हड़ताल पर जाने की धमकी दे रहे हैं. जानते हैं उनके बारे में जिन्होंने सरकार की नींद हराम कर रखी है.

जानें सरकार के स्थायी कर्मियों का हाल

झारखंड प्रशासनिक सेवा के अधिकारीः 1200

सबसे पहले बात सरकार के अधिकारियों की. झारखंड प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों ने सीधे तौर पर सरकार को अपनी मांग पूरी करने की चेतावनी दी है. मांग पूरी नहीं होने पर आंदोलन करने की बात हो रही है. वो भी तब जब सरकार विधानसभा में बजट पेश करने जा रही होगी. इससे पहले भी झारखंड प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों ने आंदोलन की धमकी दी है. लेकिन देखा गया है कि वो शांत हो जाते हैं. डैमेज होने से पहले ही कंट्रोल कर लिया जाता है. झासा के बैनर तले 17 सूत्री मांग अधिकारी कर रहे हैं. मांगें न पूरा होने की सूरत में 16 से 20 जनवरी तक झारखंड राज्य प्रशासनिक सेवा के सभी पदाधिकारी काला बिल्ला लगा कर काम करेंगे.

झारखंड पुलिसः 60,000

अपनी पांच सूत्री मांग को लेकर झारखंड पुलिस मेन्स एसोसिएशन लगातार सरकार पर दवाब बना रहा है. बीते 10 जनवरी को एसोसिएशन ने बैठक कर 29 जनवरी को राज्य स्तरीय बैठक की बात पर मुहर लगायी. समिति परीक्षा नियमावली को खत्म करना. 13 महीने का वेतन, विभिन्न भत्तों में बढ़ोतरी, एसीपी/एमएसीपी का मामला और अनुकंपा के आधार पर नौकरी की मांग को लेकर आंदोलन कर रहा है.

डॉक्टर्सः 1600

मेडिकल प्रोटेक्शन बिल को लेकर राज्य में डॉक्टर लगातार आंदोलनरत हैं. आइएमए सरकार पर इसी बजट सत्र में बिल पास कराने के लिए पूरा दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है. राज्य के 1600 डॉक्टर इस बिल से प्रभावित होंगे. आए दिन डॉक्टर इस मांग को लेकर हड़ताल पर जाते रहे हैं.

यूनिवर्सिटी के प्राध्यापकः 5000

राज्य बनने के बाद से ही अब तक कॉलेजों के प्राध्यापकों को कभी आजतक प्रमोशन नहीं मिला. अब वे इस बात को लेकर गोलबंद हो रहे हैं. उनका कहना है कि करीब 500 प्राध्यापक ऐसे हैं जो सरकार की गलत नीतियों की वजह से बिना प्रमोशन के ही रिटायर कर गए. प्राध्यापक भी अब सरकार के खिलाफ इस मामले को लेकर मोर्चा खोलने की तैयारी में हैं. करीब 5000 प्राध्यापक सरकार के इस नीति की वजह से प्रभावित हो रहे हैं.

राजस्व कर्मीः 1700

राज्य में करीब 1700 राजस्वकर्मी हैं. 2400 ग्रेड पे स्केल के लिए राजस्व कर्मी कई दिनों से आंदोलनरत हैं. हाल ही में इन्होंने राजधानी रांची में धरना-प्रदर्शन किया था. सरकार की तरफ से तीन महीने के लिए एक कमेटी बनी है. लेकिन कमेटी की कार्यशैली को देखते हुए कहा जा रहा है कि कमेटी शायद ही किसी नतीजे तक पहुंचे. ऐसे में राजस्व कर्मियों के संगठन के सदस्यों का कहना है कि समय-सीमा खत्म होते ही एक बार फिर से वो आंदोलन के लिए सड़क पर उतरेंगे.

सचिवालय सेवा कर्मीः 1200

सचिवालय सेवाकर्मियों की संख्या करीब 1200 है. अपनी मांगों के लेकर इनका संगठन भी लगातार आंदोलनरत है. संगठन के सदस्यों का कहना है कि कुछ दिनों पहले सीएस की अध्यक्षता में हमारी मांगों को लेकर एक बैठक हुई थी. लेकिन मांगों पर कुछ खास होता नहीं दिख रहा है. विधानसभा के बजट सत्र के बाद रांची में एक आमसभा की तारीख तय की जाएगी. उसके बाद फिर से मांगों के लिए आंदोलन किया जाएगा.

मानदेय पर काम करनेवाले कर्मी

पारा शिक्षकः 67000

पारा शिक्षक का मामला राज्य का संवेदनशील मुद्दा बना हुआ है. 15 नवंबर के बाद से लगातार पारा शिक्षक हड़ताल पर हैं. पारा शिक्षकों के हड़ताल पर जाने की वजह से करीब 10,000 स्कूलों में बच्चों की पढ़ाई बाधित है. झारखंड में पारा शिक्षकों की संख्या करीब 67,000 है. सरकार अपने तेवर दिखाने के बाद पारा शिक्षकों को लेकर अब बैकफुट पर है. लेकिन पारा शिक्षक अपनी मांगों के लेकर अड़े हुए हैं.

मनरेगा कर्मीः 6000

राज्य में मनरेगा कर्मी भी हड़ताल पर हैं. हड़ताल पर होने के वाबजूद सरकार इनकी सुध नहीं ले रही है. मनरेगा कर्मी झारखंड राज्य मनरेगा कर्मचारी संघ के बैनर तले हड़ताल पर हैं. मनरेगा कर्मियों की मुख्य मांगों से एक मानदेय बढ़ोतरी की मांग है.

आंगनबाड़ी सेविका-सहायिकाः 73,000

यह एक बड़ तबका है. जो सरकार के लिए सिरदर्द साबित हो सकता है. इनकी संख्या राज्य भर में करीब 73,000 हजार है. 27 दिंसबर को राजदानी में इन्होंने अपनी मांगों के लेकर रैली भी निकाली थी. अपने आंदोलन को आगे बढ़ाते हुए हर प्रखंड से आंगनबाड़ी सेविका-सहायिका 26 को दिल्ली के लिए रवाना हो रही हैं. अपनी मांगों को लेकर 28 जनवरी को दिल्ली के जंतर-मंतर के सामने धरना देंगी.

रसोइयाः 1,20,000

यह दूसरा बड़ा तबका है जिससे चुनाव के वक्त किसी भी पार्टी को परेशानी हो सकती है. संगठन के सदस्यों का कहना है कि यूं तो रसोइयों की संख्या 1,20,000 है. लेकिन सरकार राज्य भर में सिर्फ 84,000 रसोइयों को मानदेय देती है. उनकी मांग है कि उनका मानदेय 18,000 प्रति महीना नहीं तो कुशल श्रमिक को मिलनेवाला दैनिक भत्ता मिले, जो 369 रुपए प्रति दिन है. संगठन हड़ताल पर तो नहीं है लेकिन राज्य भर में विधायकों के आवास के सामने धरना-प्रदर्शन कर रहा है. खबर लिखे जानेवाले दिन सिल्ली विधायक के आवास के पास संगठन के सदस्य धरना पर बैठे हुए थे.

जल सहियाः 40,000

राज्य भर में जल सहिया के लिए आंदोलन करनेवाले संगठन का कहना है कि इनकी संख्या करीब 40,000 है. मानदेय के नाम पर इन्हें 680 रुपया हर महीने मिलता है. 17 जनवरी को जल सहियाओं का संगठन सीएम आवास घेरने के लिए तैयारी कर रहा है. इनकी पहली मांग एक निश्चित मानदेय है.

कृषि मित्रः 13,600

राज्य भर में कृषि मित्रों की संख्या करीब 13,600 है. इन्हें मानदेय के नाम पर प्रोत्साहन राशि दी जाती है. मानदेय बढ़ोतरी को लेकर कृषि मित्र हमेशा आंदोलनरत रहते हैं. फिलहाल इन्हें प्रोत्साहन राशि के नाम पर 1,000 दिया जाता है. संगठन के सदस्यों का कहना है कि यह प्रोत्साहन राशि भी इन्हें नियमित रूप से कभी नहीं दी जाती.

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