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2014 में छोड़ी 12.5 फीसदी विकास दर को रघुवर सरकार ने गिराया 5.7 प्रतिशत तक : जेएमएम

  • हजारीबाग सांसद जयंत सिन्हा के बयान पर जेएमएम का पलटवार, कहा- भाजपा के फैलाये भ्रम में डाल रहे आहुति

Ranchi : पूर्व वित्त राज्य मंत्री सह हजारीबाग सांसद जयंत सिन्हा के हेमंत सरकार के खजाना खाली करने के बयान पर सत्तारूढ़ झारखंड मुक्ति मोर्चा ने पलटवार किया है. पार्टी प्रवक्ता सह महासचिव सुप्रियो भट्टाचार्य ने कहा है कि पूर्ववर्ती सरकार में एनटीपीसी हो, एक्साइज डिपार्टमेंट या कुछ और, सभी में करीब 400 करोड़ रुपये विज्ञापन में खर्च किये गये. इससे राज्य को अरबों का नुकसान हुआ.

इसी तरह पूर्ववर्ती भाजपा सरकार ने कारपोरेट घरानों के साथ जमीन दलालों को भी फायदा पहुंचाने का काम किया. केंद्र सरकार ने डीवीसी की बकाया राशि सहित आरबीआइ में राज्य सरकार के खाते से जो करोड़ों रुपये काटे, उससे भी राज्य को काफी नुकसान पहुंचा.

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रघुवर सरकार में लिया गया बेतहाशा कर्ज

सुप्रियो भट्टाचार्य ने कहा कि अभी तक यही जानकारी थी कि विदेशों में पढ़े लिखे लोगों को हमलोगों से ज्यादा जानकारी होगी. लेकिन आज पिछले 10 माह में भाजपा के फैलाये भ्रम में जयंत सिन्हा ने आहुति देने का काम किया है.

उन्होंने मालूम होना चाहिए कि 2014 में हेमंत सरकार ने जब सत्ता छोड़ी थी, तो राज्य की विकास दर 12.5 प्रतिशत के करीब थी. लेकिन रघुवर सरकार ने जब 2019 के अंत में सत्ता छोड़ी, तो विकास दर 5.7 प्रतिशत रह गयी. यह सब केवल रघुवर सरकार के बेहताशा कर्ज लेने और सरकारी संपत्ति को बेचने के कारण हुआ है.

जेएमएम नेता ने कहा कि पूर्ववर्ती भाजपा सरकार में ऐसे कई काम हुए हैं जिनकी वजह से राज्य का खजाना खाली हुआ. आज वही भाजपा राज्य सरकार को कर्ज लेने की बुद्धि दे रही है. पूर्व की सरकारों (अर्जुन मुंडा हो या हेमंत सोरेन सरकार) सभी के समय राज्य में प्रति व्यक्ति लोगों का कर्ज 1200 रुपये था.

लेकिन रघुवर दास के क्रियाकलापों से आज वही कर्ज प्रति व्यक्ति 24000 रुपये तक जा पहुंचा है. उन्होंने पूछा कि इसका दायित्व कौन लेगा. वह भी तब जब आज भाजपा के पास उनके कुल 25 विधायक हैं.

बता दें कि हेमंत सरकार को ‘खज़ाना खाली, नगरी अंधेर’ बताते हुए बीजेपी नेता जयंत सिन्हा ने कहा था कि NDA सरकार जो भरा खज़ाना और मज़बूत आर्थिक स्थिति देकर गयी थी, उसे JMM – Congress की अयोग्य सरकार ने खाली कर दिया है. अगर झारखंड सरकार के वित्त प्रबंधन की गाड़ी पटरी पर नहीं आयी तो राज्य और जनता बहुत तकलीफ में आ सकती हैं.

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