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आक्रोशः रघुवर दास ने कहा- सभी कार्यकर्ताओं को देंगे ID कार्ड, कार्यकर्ता कह रहे हमें भी है पता ‘चुनाव आ गया है’

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Akshay Kumar Jha

Ranchi: मंगलवार को रांची के हरमू मैदान में बीजेपी के तय कार्यक्रम ‘शक्ति केंद्र सम्मेलन’ में सीएम रघुवर दास ने कार्यकर्ताओं को खुश करने के लिए जो कहा, अब वो ही बात बीजेपी के गले की फांस बनती जा रही है. मुख्यमंत्री रघुवर दास ने कहा कि “सभी कार्यकर्ताओं का आइडेंटी कार्ड बन रहा है. उस आईडी कार्ड को दिखा कर आप किसी भी सरकारी दफ्तर में सरसराकर कर जा सकते हैं. कार्यकर्ताओं को सम्मान हमारी पार्टी और सरकार की प्राथमिकता है.

कार्यकर्ता आईडी कार्ड लेकर ब्लॉक, सीओ ऑफिस या फिर डीसी ऑफिस जा सकते हैं. प्रशासन के एक-एक अधिकारी को यह आदेश रहेगा, कि कोई भी हमारा कार्यकर्ता आता है तो पहले आपको उसकी बात को सुननी होगी. अधिकारियों को आदेश रहेगा कि सरसराकर सुनना. अगर कोई अधिकारी बात नहीं सुनता है तो उसपर भी कार्रवाई होगी.”

जमीनी स्तर पर भाजपा कार्यकर्ता हताश हैं

इस बात में कोई शक नहीं है कि झारखंड में जमीनी स्तर पर भाजपा कार्यकर्ता हताश हैं. उनकी शिकायत यह है कि सरकार ने बीते चार साल के शासन काल में कार्यकर्ताओं की नहीं सुनी. लोकसभा चुनाव से पहले सांसद के लिए टिकट पाने वाले उम्मीदवार इस बात की शिकायत दिल्ली दरबार में दबी जुबान में करते आये हैं. चुनाव से पहले कार्यकर्ताओं में फिर से एक बार 2014 जैसा जोश भरने का काम बीजेपी ने शुरू कर दिया है. लेकिन हरमू मैदान से दिए हुए सीएम के बयान से पार्टी अगर यह सोच रही है कि कार्यकर्ता बूस्ट अप हुए हैं, तो यह कहना पूरी तरह से सही नहीं होगा.

न्यूज विंग ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए जमीनी स्तर से जुड़े हुए कुछ कार्यकर्ताओं से बात की. नाम ना छापने की शर्त पर उन्होंने अपनी भड़ास निकाली. क्या कहना है उनका यह आपको जरूर बतायेगे, उससे पहले इस बात को समझना होगा कि सीएम रघुवर दास कहना क्या चाह रहे हैं और उनकी बातों में कितना दम है.

  • पार्टी के सूत्रों ने बताया कि यह आईडी कार्ड बूथ लेवल के कार्यकर्ताओं के बीच बंटना है.
  •  झारखंड में बीजेपी के करीब 29000 बूथ हैं. हर बूथ पर औसतन 10 कार्यकर्ता हैं.
  • यानी पार्टी को बूथ लेवल पर तीन लाख आईडी कार्ड बनाने की जरूरत है.
  • तीन लाख आईडी कार्ड बनाने और कार्यकर्ताओं तक पहुंचाने में पार्टी को करीब दो करोड़ रुपये खर्च आयेगा.

नाम ना बताने की शर्त पर क्या कहते हैं सक्रिय कार्यकर्ता जानेंः

अव्यवाहरिक है सीएम का कदम, कार्यकर्ता जानते हैं कि चुनाव आ गया है

सीएम रघुवर दास ने जो भी कहा है वो बिल्कुल अव्यवहारिक है. आज तक किसी राजनीतिक पार्टी ने इस तरह का कार्ड बनाया है क्या. कार्ड से कब से नेता की पहचान होने लगी. पहला तो इतने बड़े पैमाने पर आईडी कार्ड बन ही नहीं सकता है. अगर बन भी गया तो ऊपर कुर्सी पर बैठे किसी को भी कार्यकर्ता बना सकते हैं.

भाई-भतीजा वाद कहां नहीं है. इसमें पारदर्शिता हो ही नहीं सकती. पार्टी का मंडल अध्यक्ष अगर आपना आईडी कार्ड बीडीओ को दिखाये और बताये कि हम पार्टी के कार्यकर्ता हैं, तो वहीं उसकी हार है. सीएम के ऐसा बोलने से पहले ही कार्यकर्ता जान रहे हैं कि चुनाव आ गया है.

सम्मान दिया नहीं अब कार्ड देकर भी क्या होगा ?

कार्ड मिलने की बात ही नहीं है. कार्यकर्ता सम्मान के लिए काम करते हैं. कार्यकर्ता अपने काम के लिए नहीं जाते हैं, जनता के लिए जाते हैं. मैं एवीबीपी से करीब दस साल तक जुड़ा हुआ रहा. दस साल में कभी भी हमें आईडी की जरूरत नहीं पड़ी. लोगों में अपनी पहचान थी. कार्यकर्ताओं को आईडी की जरूरत तब होती है, जो वो पहचान के मोहताज हों. ऐसे में जब सत्ता में थे तो आपने पहचान बनने नहीं दी. जनता का काम कीजिएगा तो जनता और अधिकारी दोनों आपको जानेंगे.

आईडी ना तो कांग्रेस देती है और ना ही झामुमो. जनता की बात छोड़ दें यहां तो अपना भी काम कराने में असमर्थ हैं. प्रखंड स्तर पर, निगरानी समिति और तमाम बोर्ड में जगह खाली हैं. कभी पार्टी ने अपने कार्यकर्ताओं से इनको भरने का नहीं सोचा. बोर्ड आयोग का गठन नहीं हुआ. युवा आयोग तक का गठन नहीं हुआ. प्रखंड स्तर पर निगरानी समिति बनाते. बहुत सारे ऐसे काम थे, जो किये जा सकते थे. लेकिन हुआ नहीं. अब चुनाव आया हो तो कार्ड बांटे जा रहे हैं.

एवीबीपी में बताया गया था कि आपका चेहरा ही आपका कार्ड है

विद्यार्थी परिषद में एक बहुत मंझे हुए नेता ने मुझे एक बार बोला था, कि परिषद कार्यकर्ताओं को आईडी कार्ड इसलिए नहीं दी जानी चाहिए क्योंकि उनका चेहरा हीं उनका कार्ड है. अगर तुम्हें अपना परिचय देना पड़ा तो तुम हार गये. ऐसे सही भी है. पार्टी में शायद जेएमएम और जेवीएम के लोग भी शामिल हैं. इसलिए अलग से कार्यकर्ताओं को कार्ड देने की बात हो रही है. रघुवर दास के कार्यकाल में सारे कार्यकर्ता हाशिये पर थे. अब चुनाव के वक्त याद आये हैं, तो बांटने की बात हो रही है.

बहाली होकर थोड़ी पार्टी में आये हैं कि आईडी कार्ड चाहिये

इससे पहले भी चुनाव के वक्त कार्यकर्ताओं के लिए काफी कुछ घोषनाएं हुईं थी. फिर से एक बार जब देख रहे हैं कि चुनाव नजदीक आ रहा है तो कार्यकर्ताओं में उत्साह भरने के लिए फिर से वही हो रहा है. आईडी लेकर ही घूमना है तो घर में किसी सोए हुए कार्यकर्ता को दे दीजिए. पार्टी में बहाली की प्रक्रिया के बाद कोई आया नहीं है कि अब नौकरी हो गयी है. आईडी दे दिया जाए. ना तो संघ में और ना ही एबीवीपी में कार्ड की परंपरा रही है. कार्यकर्ताओं को जो मान सम्मान मिलना चाहिए वो तो मिला नहीं. मिल रहा है आईडी कार्ड.

दीया बुझने से पहले वाली स्थिति है सरकार की

सरकार को अब अपनी स्थिति समझ में आ रही है. सभी जानते हैं कि कार्यकर्ता हमारे नाराज हैं. कोई भी सिर्फ आईडी लेकर या बोर्ड लगाकर बीजेपी का हो जाए, तो हर चीज में रंगदारी शुरू हो जाएगी. टोल गेट पर आईडी कार्ड काम करेगा और कहीं नहीं. कार्यकर्ताओं के नाम पर सिर्फ ब्लैकमेलिंग होगी और कुछ नहीं. अधिकारी अगर कार्ड देख कर मुलाकात और कार्रवाई करने लगे तो दिन भर तो वो कार्यकर्ताओं से ही मिलते रहेंगे. कार्ड से नहीं सम्मान देकर पहचान बनती है कार्यकर्ताओं की. जो हुआ नहीं.

पार्टी तीन लाख कार्यकर्ताओं को देगी आईडीः अमित सिंह (भाजयुमो, अध्यक्ष )

यह कार्ड बूथ स्तर के कार्यकर्ताओं के लिए बनाया जा रहा है. दिल्ली और यूपी में भी इस तर्ज पर काम हुआ है. तीन-चार दिनों के अंदर सभी को कार्ड बांट दिया जायेगा. कार्ड प्रिंट होने का काम हो रहा है. 29000 बूथ हैं. सभी बूथ के कार्यकर्ताओं को कार्ड दिया जा रहा है. शक्ति केंद्र के वरिष्ठ कार्यकर्ता और बूथ लेवल के कार्यकर्ताओं को आईडी दी जायेगी. पार्टी का यह एक निमित कार्यक्रम है. मुख्यमंत्री जी जो भी बोले हैं, वो निमित कार्यक्रम के तहत बोले हैं. प्रदेश में हर कार्यकर्ताओं का मॉराल हाई है.

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