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मजदूर नहीं, टाटा प्रबंधन को फायदा पहुंचाने वाली राजनीति की रघुवर दास नेः टाटा वर्कर्स यूनियन के पूर्व अध्यक्ष

Akshay/Abinash

Ranchi/Jamshedpur:  पूर्वी जमशेदपुर से चुनाव लड़ रहे रघुवर दास हमेशा अपने आप को मजदूरों का नेता कहते हैं. इस विधानसभा क्षेत्र में टेल्को, जेमको, ब्लूस्कोप, ट्यूब डिवीजन समेत कई कंपनियां हैं. यह मजदूरों की राजनीति हावी रहती है. ऐसे में न्यूज विंग ने एक ऐसे शख्स से मजदूर राजनीति के बारे जानना चाहा, जिन्हें अपनी पूरी जिंदगी मजदूरों के लिए राजनीति करते हुए निकाल दी. कई सालों तक निजी क्षेत्र में भारत के सबसे बड़े यूनियन टाटा वर्कर्स यूनियन के अध्यक्ष रहे. नाम है पीएन सिंह. जमशेदपुर में शायद ही कोई मजदूर इनको न पहचाने. लेकिन इन्होंने जो रघुवर दास के बारे कहा है वो चैंकाने वाला है. इनका कहना है कि रघुवर दास की राजनीति मजदूरों के लिए नहीं, बल्कि प्रबंधन को फायदा पहुंचाने वाली है. उन्होंने इस बात को सिरे से खारिज कर दिया कि रघुवर दास मजदूरों के लिए हितकारी थे. पढ़िए उन्होंने क्या कहा रघुवर दास के बारे में. 

रघुवर दास ने मजदूरों की राजनीति कभी की ही नहीः पीएन सिंह

रघुवर दास ने मजदूर की राजनीति तो कभी की नहीं. जब वह एमएलए थे तो रजिस्टर्ड इम्प्लॉई लोगों का डेलीगेशन लेकर यूनियन आये थे. उस वक्त टाटा वर्कर्स यूनियन के ऑफिस बियरर थे. यूनियन उनके लिए गेट तक नहीं खोलने को राजी नहीं था.

मैंने ही कहा कि यह उचित नहीं होगा, फिर उन्हें अंदर आने दिया गया. इसलिए ऐसा कहना कि उन्होंने कभी मजदूरों के लिए कुछ किया है, सही नहीं है. वह खुद जहां रहते हैं, उस इलाके में हर चीज की जिम्मेदारी टाटा स्टील की है. यह कहना है टाटा वर्कर्स यूनियन (टीडब्ल्यूयू) के पूर्व अध्यक्ष पीएन सिंह का.

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श्री सिंह बताते हैं कि मेरे अध्यक्ष काल में जब वेज रिवीजन हुआ तो हमने मजदूरों के लिए कम्पनी से लड़ कर काफी कुछ ले लिया था. यह प्रबन्धन को अखर रहा था. लेकिन रघुवर दास के मुख्यमंत्री बनने के बाद टाटा स्टील के प्रबंध निदेशक टीवी नरेंद्रन और वाइस प्रेसिडेंट सुनील भास्करन ने उनके सहयोग से प्रशासन को अपने पक्ष में कर लिया और मनमाने तरीके से चुनाव कराया.

पीएन सिंह के अनुसार तत्कालीन उपायुक्त, जो यूनियन चुनाव में रिटर्निग ऑफिसर थे, उन्होंने खुल कर टाटा कम्पनी प्रबन्धन के इशारे पर काम किया और मुझे गड़बड़ी करते हुए चुनाव में हराया गया. यह बात जमशेदपुर और टाटा कम्पनी के हर व्यक्ति को पता है कि सारा काम रघुवर दास के इशारे पर हो रहा था. अब ऐसे काम के बाद लोगों को समझना चाहिए कि रघुवर दास मजदूर विरोधी हैं या मजदूरों के नेता.

यूनियन चुनाव में बिना काउंटिग और कॉप्शन के परिणाम घोषित करने के बाद टीडब्ल्यूयू में टाटा कम्पनी के चहेते लोग आ गये. मेरे वक्त का वेज रिवीजन देख लीजिए और नयी यूनियन का वेज रिवीजन देख लीजिए. सब आईने की तरह साफ हो जाएगा कि मजदूरों का कितना नुकसान हुआ है.

सब रघुवर दास की टाटा स्टील के प्रबंधन के साथ मिलीभगत से सम्भव हो पाया है. मेरे समय तक मजदूरों को एक साल का मेडिकल एक्सटेंशन मिलता था. वो भी बंद करा दिया गया. सिंह कहते हैं कि मुख्यमंत्री ने अपने, बेटे, भतीजे, भांजे और करीबी लोगों को टाटा कम्पनी में नौकरी और काम दिलाने जैसे लाभ लिये हैं. मजदूरों के लिए आज तक एक भी काम नहीं किया उन्होंने.

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सरयू राय ने वेतन काटने पर आवाज उठायी

पीएन सिंह ने कहा कि किसी राज्य में कोई आपदा हो जाती है तो कंपनी मजदूरों से अपील करती है कि एक या दो दिन का वेतन काट कर उस त्रास्दी से उबरने के लिए वहां के लोगों को दे. माध्यम सरकार होती है. ओडिशा में एक आपदा आयी जिसके बाद बिना मजदूरों से पूछे ही उनकी सैलेरी काट कर ओडिशा सरकार को भेज दिया गया.

इसके खिलाफ सरयू राय खाद्य मंत्री रहते हुए जिला के उपश्रमायुक्त को लिखा कि ऐसा नहीं होना चाहिए. मजदूरों की हांमी लेनी जरूरी है. लेकिन कमिशनर ने कुछ नहीं सुना. कंपनी ने पैसा काट कर ओडिशा सरकार को भेज दिया. यूनियन के लोगों को डरा-धमका कर रखा जा रहा है. क्योंकि सीएम के टाटा प्रबंधक से रिश्ते अच्छे हैं. रघुवर दास के ही समय में कंपनी लोगों को हटा रही है.

नयी बहाली नहीं हो रही है. ठेकेदार के मजदूरों से काम लिया जा रहा है. मेडिकल सप्लायी का काम पहले कई लोग करते थे. इससे कई लोगों को रोजगार मिलता था. लेकिन अब सिर्फ एक कंपनी को दे दिया गया है. इस कंपनी में कौन है नहीं पता.

सिस्टम को तोड़ने की कोशिश की रघुवर दास ने

पीएन सिंह आगे कहते हैं कि एक बने हुए सिस्टम को तोड़ने की कोशिश किया रघुवर दास ने. प्रबंधन को फायदा पहुंचाने के लिए हर काम किया. अपने ही लोगों को टाटा में नौकरी लगवायी. इनका बेटा, भतीजा, भगना सभी टाटा में नोकरी कर रहे हैं.

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