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RAFI कहा करते थे, सारी दुनिया मेरे गाने सुनती है, मैं तो सिर्फ मन्ना डे के गाने सुनता हूं

मन्ना डे की पुण्यतिथि पर विशेष

Naveen Sharma

Ranchi :  मैं जिस पीढ़ी का हूं उसके ज्यादातर लोग किशोर कुमार के गाने सुनकर बड़े हुए हैं. हमारे जेनरेशन के नायकों अमिताभ बच्चन, राजेश खन्ना और जितेंद्र को किशोर कुमार ने ही अपनी शानदार आवाज दी थी. मन्ना दा हमलोगों के पिताजी के पीढ़ी के नायकों के गाने गाते थे. उनके गानोंवाली फिल्में तो काफी कम ही देखी हैं लेकिन रेडियो पर उनके गाने सुने. इसके बाद टीवी पर पुराने गाने देखे. अब एसपी 3 सीडी में उन्हें सुनना काफी अच्छा लगता है. मेरा उनका गाया सबसे पसंदीदा गीत है जिंदगी कैसी ये पहेली हाय रे है. इसके बाद ऐ मेरे प्यारे वतन, कसमें वादे प्यार वफा सब वादे हैं वादों का क्या, प्यार हुआ इकरार हुआ है व यारी है ईमान मेरा यार मेरी जिंदगी.

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मन्ना दा के गानों का एक अहलदा अंदाज दिखता है ए मेरी जोहरा जबीं तुझे मालूम नहीं(वक्त), ऐ भाई जरा देख के चलो आगे भी नहीं पीछे भी तथा पिंजरे वाली मुनियां(तीसरी कसम) में.

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बच्चन की मधुशाला का शानदार गायन

मन्ना डे ने हरिवंश राय बच्चन की मधुशाला को भी अपनी मधुर आवाज से सजाया है. अगर आपने अभी तक नहीं सुना है तो जरूर सुनें काफी अच्छी एलबम है अवश्य पसंद आएगी.मन्ना दा को कभी लाइव नहीं सुन पाया इसका अफसोस ताउम्र रहेगा.

मन्ना डे (1 मई 1919 – 24 अक्टूबर 2013), जिन्हें प्यार से मन्ना दा के नाम से भी जाना जाता है. उनका वास्तविक नाम प्रबोध चन्द्र डे था. मन्ना दा ने सन् 1942 में फ़िल्म तमन्ना से अपने फ़िल्मी कैरियर की शुरुआत की और 1942 से 2013 तक लगभग 3000 से अधिक गानों को अपनी आवाज दी.मुख्यतः हिन्दी एवं बंगाली फिल्मी गानों के अलावा उन्होंने अन्य भारतीय भाषाओं में भी अपने कुछ गीत रिकॉर्ड करवाये.

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ये रात भीगी-भीगी

मोहम्मद रफी हिंदी फिल्म जगत के सबसे लोकप्रिय गायकों में हैं. उन जैसे बेहतरीन गायक को भी मन्ना डे की गायकी ने अपना मुरीद बना लिया था. वे खुद कहा करते थे, “सारी दुनिया मेरे गाने सुनती है, मैं तो सिर्फ मन्ना डे के गाने सुनता हूं.” फिल्म ‘श्री 420’ का गाना ‘ये रात भीगी-भीगी’ मन्ना डे और लता मंगेशकर ने गाया था जिसे न​रगिस और राज कपूर पर फिल्माया गया था. बॉलीवुड के इस लैंडमार्क गीत को हर अवॉर्ड फंक्शन में याद किया जाता है.

फिल्म पड़ोसन का ‘एक चतुर नार बड़ी होशियार’ गाने को मन्ना​ डे ने किशोर कुमार और महमूद के साथ गाया था और आर डी बर्मन का बनाया यह गाना बॉलीवुड के संगीत इतिहास का अमर गाना है. इस गाने में मन्ना दा ने खिलड़दरपन में किशोर कुमार को कड़ी टक्कर दी है.

मन्ना डे राजेश खन्ना के फैन थे. उन्होंने कहा था, ‘राजेश खन्ना जिस तरह म्यूजिक को पिक्चराइज करते हैं वो मुझे बहुत पसंद है. गाने की सफलता इस पर निर्भर करती है कि एक एक्टर उसे किस तरह पिक्चराइज करता है. गानों को पिक्चराइज करने में राजेश खन्ना नंबर वन है. मैं हमेशा उनका एहसानमंद रहूंगा.’

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सम्मान व.पुरस्कार

मन्ना डे को अपने बेहतरीन योगदान के लिए साल 1971 में पद्म श्री, साल 2005 में पद्म भूषण और साल 2007 में दादा फाल्के पुरस्कार से सम्मानित किया गया था.

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यादगार नगमें

हंसने की चाह ने इतना मुझे रुलाया है (अविष्कार)

लागा चुनरी में दाग (दिल ही तो है)

फूल गेंदवा ना मारो (दूज का चांद)

कौन आया मेरे मन के द्वारे (देख कबीरा रोया)

तू प्यार का सागर है (सीमा)

झनक झनक तोरी बाजे पायलिया (मेरे हुजूर)

तू छुपी है कहां (नवरंग)

सुर ना सजे (बसंत बहार)

ये रात भीगी-भीगी (चोरी-चोरी)

आजा सनम मधुर चांदनी में हम (चोरी-चोरी)

जहां मैं जाती हूं वहीं चले आते हो (चोरी-चोरी)

ठहर जरा ओ जाने वाले (बूट पॉलिश)

बाबू समझो इशारे (चलती का नाम गाड़ी)

धरती कहे पुकार के (दो बीघा जमीन)

हर तरफ अब यही अफसाने हैं (हिन्दुस्तान की कसम)

नैन मिले चैन कहां (बसंत बहार)

जुल्फों की घटा लेकर (रेशमी रुमाल)

ना जाने कहां तुम थे (जिंदगी और ख्वाब)

दिल की गिरह खोल दो (रात और दिन)

ना तो कारवां की तलाश है (बरसात की एक रात)

दिल का हाल सुने दिल वाला (श्री 420)

किसने चिलमन से मारा (बात एक रात की)

ऐ मेरे प्यारे वतन (काबुलीवाला)

प्यार हुआ इकरार हुआ (श्री 420)

मुड़ मुड़ के ना देख (श्री 420)

मैं तेरे प्यार में क्या क्या ना बना (जिद्दी)

झूमता मौसम मस्त महीना (उजाला)

उमड़ घुमड़ कर आए रे घटा (दो आंखें बारह हाथ)

ये हवा ये नदी का किनारा (घर संसार)

कस्मे वादे प्यार वफा, सब बातें हैं (उपकार)

प्यार भरी ये घटाएं, राग मिलन के गाएं (कैदी नं.. 911)

नदिया चले, चले रे धारा (सफर)

जिंदगी है खेल, कोई पास कोई फेल (सीता और गीता)

ये दोस्ती (शोले)

पूछो ना कैसे मैंने रैन बिताई (मेरी सूरत तेरी आंखें)

आयो कहां से घनश्याम (बुढ्ढा मिल गया)

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