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BJP सरकार ने अपने पूंजीपति मित्रों को फायदा पहुंचाने के लिए किया राफेल घोटाला : शकील अहमद

Dhanbad : बीजेपी सरकार भ्रष्ट सरकार है. राफेल घोटाला देशहित को दांव पर लगाकर सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचाने और अपने पूंजीपति मित्रों को फायदा पहुंचाने के गड़बड़झाले का जीता-जागता उदाहरण है. उक्त बातें धनबाद के सर्किट हाउस में आयोजित प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए कांग्रेस के केंद्रीय प्रवक्ता शकील अहमद ने कहीं. शकील अहमद इन दिनों झारखंड दौरे पर हैं, जो अन्य जिलों में भी जाकर राफेल घोटाला के बारे में लोगों को बतायेंगे. उन्होंने कहा कि राफेल घोटाला कर 526 करोड़ रुपये का लड़ाकू जहाज 1670 करोड़ रुपये में खरीदकर सरकारी खजाने को 41,205 करोड़ रुपये का चूना लगाया है. प्रधानमंत्री ने 36 राफेल लड़ाकू जहाजों की ऑफ द सेल्फ इमरजेंसी खरीद की घोषणा कर डाली, इसके मूल्य की पुष्टि एसॉल्ट एविएशन की वार्षिक रिपोर्ट 2016 में संलग्न तथा रिलायंस डिफेंस लिमिटेड की प्रेस विज्ञप्ति से होती है.

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उन्होंने सवाल करते हुए कहा कि क्या प्रधानमंत्री देश को बतायेंगे कि सरकारी खजाने से 41,205 करोड़ रुपये क्यों लुटाये जा रहे हैं. खरीद मूल्य बताने में कोई गोपनीयता नहीं होती, लेकिन प्रधानमंत्री गोपनीयता की शर्त की दुहाई देकर 36 राफेल जहाजों के मूल्य बताने से इनकार करते हैं, जबकि ऐसी कोई बात नहीं है. डिफेंस प्रोक्योरमेंट प्रोसीजर की धज्जियां उड़ायी जा रही हैं, ट्रांसफर ऑफ टेक्नोलॉजी की बलि दी जा रही है. आगे उन्होंने कहा कि इस भ्रष्ट सरकार ने हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड से 36,000 करोड़ रुपये का ऑफसेट कॉन्ट्रैक्ट छीना और 30,000 करोड़ रुपये का रिलायंस को ऑफसेट कॉन्ट्रैक्ट और 1,00,000 करोड़ रुपये का लाइफ साइकिल कॉन्ट्रैक्ट दिया.

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12 दिन पुरानी कंपनी को मिला 1,30000 करोड़ का ठेका

शकील अहमद ने कहा कि रिलायंस डिफेंस लिमिटेड का गठन 28 मार्च 2015 को हुआ, यानी प्रधानमंत्री द्वारा 10 अप्रैल 2015 को फ्रांस में 36 राफेल लड़ाकू जहाज खरीदने की घोषणा के 12 दिन पहले ही बनी कंपनी ने दावा किया है कि उन्हें 1,00,000 करोड़ रुपये का लाइफ साइकिल कॉन्ट्रैक्ट मिल गया. यही है मोदी सरकार का कमाल. 12 दिन पुरानी रिलायंस कंपनी को करोड़ों का ठेका और 55 साल पुरानी कंपनी को ठेंगा. ऑफसेट कॉन्ट्रैक्ट सौदे में रक्षा मंत्री द्वारा भी झूठ पर झूठ बोला जाता रहा.

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