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बोफोर्स से भी बड़ा घोटाला है राफेल सौदा: प्रशांत भूषण

सभी राज्यों में भीड़ तंत्र के माध्यम से जो गुंडागर्दी की जा रही है, मॉब लिंचिंग की घटनाएं बढ़ी है सरकार रोकने में असमर्थ

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Ranchi: स्वराज अभियान के राष्ट्रीय सचिव सह वकील प्रशांत भूषण ने कहा है कि बोफोर्स से भी बड़ा घोटाला राफेल डील है. 1990 में पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की सरकार में बोफोर्स घोटाला की घटना हुई थी. 1400 करोड़ में 64 करोड़ कमीशन दिये गए थे. तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने कहा था कि यह सौदा दो देशों के बीच में है इसमें बीच का कोई व्यक्ति नहीं है, लेकिन वर्तमान में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार में राफेल जैसा घोटाला सामने में मामला सामने में आया है. प्रशांत भूषण शानिवार को प्रेस क्लब में आयोजित प्रेस कांफ्रेंस में बोल रहे थे.

प्रशांत भूषण ने कहा कि राफेल घोटाले के संबंध में कहा कि 2007 में 126 हवाई जहाज खरीदने का टेंडर किया गया था. जिसमें कहा गया कि 18 हवाई जहाज बाहर से आयेगा. बाकी हिंदुस्तान की  फैक्ट्री में ही निर्मित होगा. इसके दो उद्देश्य थे. एयर फोर्स रक्षा मंत्रालय से बेहतर संबंध में बनाकर यह सौदा किया गया था.

प्रधानमंत्री पर साधा निशाना, कहा 126 की जगह 36 राफेल हवाई जहाज खरीदने की बात की

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भूषण ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अप्रैल 2015 में जब फ्रांस का दौरा किये तो  उन्होंने 126 राफेल हवाई जहाज को कम कर 36 राफेल हवाई जहाज खरीदने की बात की. जहां 126 हवाई जहाज 600 करोड़ रुपये में आ रहा था वह अब बढ़कर सोलह सौ करोड़ हो गया. लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 7000 करोड़ में सिर्फ 36 हवाई जहाज के लिए ही बात की. जिसमें 21000 करोड़ अनिल अंबानी की कंपनी को दिये जाने की बातें कही गई. इसमें रिलायंस और शार्ट दोनों के आपसी संबंध भी बताया गया है.

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विवादों में रही है अनिल अंबानी की कंपनी

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अनिल अंबानी की कंपनी कई चीजों में विवादों में रही है. कंपनी को हवाई जहाज का कोई भी पुर्जा बनाने का तजुर्बा हासिल नहीं है. वहीं अनिल अंबानी कांग्रेस को पत्र लिखकर बताते हैं कि एयर फोर्स की स्कीम में नहीं है और न ही जहाज का कोई एक पूर्जा बनायेंगे.

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एक सवाल के जवाब में उन्‍होंने कहा कि वह इस मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट नहीं जायेंगे. लेकिन इस मुद्दे को लेकर जनता के बीच अवश्य जायेंगे. उन्होंने कहा कि देश में लोकतंत्र खतरे में हैं और इसे बचाना जरूरी है. सभी राज्यों में भीड़ तंत्र के माध्यम से गुंडागर्दी की जा रही है. वर्तमान में मॉब लिंचिंग की घटनाएं बढ़ी हैं, जिसे रोकने में सरकार असमर्थ है. ये सरकार के पाले हुए गुंडे हैं, जो भीड़ में तब्दील होकर लोकतंत्र का गला घोंट रहे हैं.

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