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राफेल डील : गोपनीय दस्तावेज सार्वजनिक करने से देश पर खतरा , SC में केंद्र सरकार का जवाबी हलफनामा

NewDelhi : केंद्र की मोदी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट राफेल डील को लेकर दाखिल पुनर्विचार याचिकाओं पर में अपना जवाबी हलफनामा दाखिल कर दिया है. केंद्र सरकार ने  हलफनामे में कहा कि सुरक्षा संबंधी गोपनीय दस्तावेजों के इस तरह सार्वजनिक खुलासे से देश के अस्तित्व पर खतरा है.  कहा कि सुप्रीम कोर्ट के राफेल सौदे  के गोपनीय दस्तावजों रे परीक्षण के फैसले से रक्षा, बलों की तैनाती, परमाणु प्रतिष्ठानों, आतंकवाद निरोधक उपायों आदि से संबंधित गुप्त सूचनाओं का खुलासा होने की आशंका बढ़ गयी है.

हलफनामे में मोदी सरकार ने कहा कि राफेल पुनर्विचार याचिकाओं के जरिए सौदे की चलती- फिरती जांच की कोशिश की गयी मीडिया में छपे तीन आर्टिकल लोगों के विचार हैं ना कि सरकार का अंतिम फैसला. ये तीन लेख सरकार के पूरे आधिकारिक रुख को व्यक्त नहीं करते हैं.

हलफनामे में केंद्र ने कहा है कि इस अतंर सरकारी सौदे की प्रगति की प्रधानमंत्री कार्यालय द्वारा निगरानी किए जाने को राफेल सौदे में दखल या सामानांतर बातचीत नहीं माना जा सकता है.  उस समय के रक्षामंत्री ने फाइल में रिकॉर्ड किया था कि ऐसा प्रतीत होता है कि पीएमओ और फ्रांसीसी राष्ट्रपति का कार्यालय उन मुद्दों की प्रगति की निगरानी कर रहा है जो शिखर बैठक का एक परिणाम था.

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राफेल पर पुनर्विचार याचिकाओं में कोई आधार नहीं हैं

केंद्र के अनुसार ये सिर्फ अधिकारियों के विचार हैं जिनके आधार पर सरकार कोई फैसला कर सके. सीलबंद नोट में सरकार ने कोई गलत जानकारी सुप्रीम कोर्ट को नहीं दी.  सीएजी ने राफेल के मूल्य संबंधी जानकारियों की जांच की है और कहा है कि यह  2.86% कम है. केंद्र सरकार ने कहा कि कोर्ट जो भी मांगेगा सरकार राफाल संबंधी दस्तावेज प्रस्तुत करने के लिए तैयार है.

राफेल पर पुनर्विचार याचिकाओं में कोई आधार नहीं हैं, इसलिए सारी याचिकाएं खारिज की जानी चाहिए.  बता दें कि दिसंबर के अपने फैसले में अदालत ने कहा था कि वर्तमान जैसे मामलों में मूल्य निर्धारण विवरण की तुलना करना इस अदालत का काम नहीं है. अब कोर्ट में इस मामले में छह मई को सुनवाई होगी.

बता दें कि इससे पूर्व सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए कहा था कि वह द हिंदू में छपे रक्षा मंत्रालय के गोपनीय दस्तावेजों पर भरोसा कर उनके आधार पर सुनवाई करेगा. बता दें कि याचिकाएं यशवंत सिन्हा, अरूण शौरी और प्रशांत भूषण के अलावा मनोहर लाल शर्मा, विनीत ढांडा और आप सासंद संजय सिंह ने दाखिल की है.

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सुप्रीम कोर्ट में सीजेआई रंजन गोगोई, जस्टिस संजय किशन कौल और जस्टिस केएम जोसेफ की पीठ  ने केंद्र की प्रारंभिक आपत्ति को खारिज कर दिया था कि ये दस्तावेज विशेषाधिकार प्राप्त हैं और कोर्ट इन्हें नहीं देख सकता.

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