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राफेल डील : भारत  59,000 करोड़ में से आधे से अधिक का पेमेंट कर चुका है!

36 विमान 2019 नवंबर से 2022 अप्रैल के बीच भारत को मिलेंगे.  उपकरणों से लैस 13 विमान सितंबर-अक्टूबर 2022 में ही प्रयोग करने लायक हो सकेंगे. 

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NewDelhi : भारत ने 36 राफेल विमानों की खरीद के लिए 59,000 करोड़ रुपये की कुल कीमत में से आधे से अधिक का पेमेंट विमान बनाने वाली कंपनी दसॉ को कर दिया है. 36 विमान 2019 नवंबर से 2022 अप्रैल के बीच भारत को मिलेंगे.  बता दें कि राफेल जेट विमानों की खरीद पर संसद और संसद के बाहर भी घमासान लगातार जारी है. राफेल डील में अनियमितता का आरोप लगाकर विपक्षी दल सरकार को चुनावी मौसम में घेरने का कोई मौका नहीं छोड़ रहे हैं. जानकारी के अनुसार भारत की जरूरतों के अनुसार पूरी तरह से उपकरणों से लैस 13 विमान सितंबर-अक्टूबर 2022 में ही प्रयोग करने लायक हो सकेंगे.

भारत पहुंचने के बाद भी विमानों को तत्काल प्रयोग नहीं किया जा सकता है क्योंकि अगले छह महीनों तक इन्हें विभिन्न सॉफ्टवेयर सर्टिफिकेशन से गुजरना होगा.  रक्षा मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार 34,000 करोड़ की रकम माइलस्टोन लिंक्ड इंस्टॉलमेंट (पूर्व निर्धारित शर्तों के आधार पर सिलसिलेवार तरीके से) के तौर पर दी जा चुकी है.

राफेल डील को लेकर राजनीति जारी

जान लें कि राफेल डील को लेकर राजनीति जारी है. शनिवार को पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की मेगा कोलकाता रैली में जुटे विपक्षी दलों के नेता ने राफेल में हुए भ्रष्टाचार पर जमकर निशाना साधा. भाजपा सांसद शत्रुघ्न सिन्हा ने भी राफेल डील को लेकर करारा हमला किया. बता दें कि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी भ्ज्ञी लगातार राफेल डील में भ्रष्टाचार का दावा कर रहे हैं.  वह सीधे इसमें प्रधानमंत्री के शामिल होने की बात भी कहते रहे हैं.  वरिष्ठ पत्रकार एन राम ने भी अपने लेख में दावा किया है कि मोदी सरकार ने नौ फीसदी कम कीमत पर विमान नहीं खरीदे हैं. राम का तर्क है कि विमान की कीमतें 14.2% अधिक हैं.  हालांकि, वित्त मंत्री अरुण जेटली ने इस लेख को बकवास करार दिया है.

रक्षा मंत्री ने कहा, विपक्ष डील नहीं होने देना चाहता

रक्षा मंत्री ने कहा है कि विपक्ष डील नहीं होने देना चाहता. राफेल डील पर जारी महासंग्राम के बीच रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने शनिवार को आरोप लगाया कि विपक्ष पर मामले में जनता के बीच गलत जानकारी फैला रहा है. सीतारमण ने पूछा कि क्या वे कॉर्पोरेट प्रतिद्वंद्विता के प्यादे बन गये हैं या फिर 36 फाइटर जेट की खरीद को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की जा रही है.

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