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झारखंड में स्कूली विद्यार्थियों के लिये साइकिल खरीद की प्रक्रिया पर सवाल, लुधियाना की कंपनी ने लगाये आरोप

रॉकस्टार इंडस्ट्री ने आदिवासी कल्याण आयुक्त को लिखा पत्र, कहा एक व्यक्ति को लाभ पहुंचाने की कोशिश

Nikhil Kumar

Ranchi: लुधियाना स्थित साइकिल निर्माण की बड़ी कंपनी रॉक स्टॉर इंडस्ट्री ने झारखंड में सरकारी स्कूलों के छात्र-छात्राओं के लिए खरीदी जाने वाली साइकिल की टेंडर प्रक्रिया पर सवाल खड़ा कर दिया है. कंपनी की ओर से इस संबंध में झारखंड सरकार के आदिवासी कल्याण आयुक्त,मुख्य सचिव झारखंड को पत्र लिख कर साइकिल खरीद की पूरी टेंडर प्रक्रिया पर आपत्ति जतायी है. कंपनी ने कहा है कि किसी एक व्यक्ति-कंपनी को लाभ पहुंचाने के लिए टेंडर की पूरी प्रक्रिया में गड़बड़ी की गयी है. दरअसल, झारखंड सरकार के अनुसूचित जाति,अनुसूचित जनजाति पिछड़ा वर्ग अल्पसंख्यक कल्याण विभाग ने  नौ सितंबर को 3.49 लाख साइकिल खरीद के लिए ऑनलाइन टेंडर जारी किया है. लगभग 122 करोड़ की लागत की यह टेंडर है.

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एक साइकिल की कीमत 4500 रुपये तक रखी गयी है. 20 सितंबर तक टेंडर भरने का अंतिम समय है. कंपनी की ओर से कहा गया है कि एक बिचौलिए के माध्यम से पूरी टेंडर प्रक्रिया के नियम निर्धारित किए गये हैं,जिसका अक्सर विभागीय मंत्री और आदिवासी कल्याण आयुक्त के दफ्तर में आना-जाना लगा रहता है. तीन छोटी कंपनियों को इसके जरिये लाभ दिलाने की मंशा है,जो राज्य के मुख्यमंत्री के महत्वकांक्षी योजना के साथ मजाक भी है.

 

कंपनी ने कहा है कि टेंडर में यह बात स्पष्ट नही है कि एक वित्तीय वर्ष में वैसी कंपनी जो 30 हजार साइकिल बनाती है या बीते तीन साल में तीस हजार साइकिल बनाया है. वहीं, 2013-14 में जो बिड प्रोसेस था उसमें 25000 साइकिल सप्लाई प्रतिवर्ष बीते पांच साल में करने का था,इसमें क्लाइंट सर्टिफिकेट भी दिया जाना था,लेकिन इस बार क्लांइट सर्टिफिकेट नहीं मांगा गया है. कंपनी ने यह भी आरोप लगाया है कि यह बात सामने आ रही है कि जिस चहेते को 3.49 लाख साइकिल आपूर्ति का जिम्मा दिए जाने का विचार किया जा रहा है, वह अगर साइकिल सप्लाई करता है तो उसे 3.49 लाख और साइकिल आपूर्ति करने का काम दिया जायेगा. कंपनी ने कहा है आखिर क्यों नहीं एक ही बार सात लाख का ठेका निकाला गया. कंपनी ने नियमों में सुधार कर फिर से टेंडर प्रक्रिया प्रारंभ  करने की भी बात की है.

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टर्नओवर पर भी सवाल

कपंनी की ओर से टीडब्लूसी को लिखे गये पत्र में कहा गया है कि बिड के जरिये प्रति वर्ष छह लाख साइकिल उत्पादन किया जाना चाहिए. ऐसे में अगर छह लाख साइकिल का अगर उत्पादन होता है तो कम से कम 180 करोड़ तक का टर्नओवर कंपनी का ऑटोमेटिक हो जायेगा, 3000 रुपये प्रति साइकिल की दर से ,जबकि विभाग से जो टेंडर जारी किया गया है उसमें सिर्फ 67.50 करोड़ का ही टर्नओवर की मांग की गयी है. हालांकि, कंपनी ने यह भी कहा है कि कोई साइकिल निर्माण कंपनी अगर एक साल में छह लाख साइकिल बनाता है तो उसका टर्नओवर 270 करोड़ का होगा.

 

टेंडर के नियमों में पारदर्शिता बरती गई हैः आदिवासी कल्याण आयुक्त

आदिवासी कल्याण आयुक्त नमन प्रियेश लकड़ा ने कहा की कंपनी के आरोप बेबुनियाद हैं. टेंडर में पूरी पारदर्शिता बरती गई है. विभाग के पदाधिकारियों और एक्सपर्ट के साथ विमर्श के बाद ही टेंडर निकाला गया है. प्री बिड मीटिंग भी हुई थी. कुछ कंपनी के सुझाव आए हैं. इस पर विचार किया जा रहा है. टर्नओवर मामले पर भी विचार हो रहा. हमारा प्रयास है की बेहतर गुणवत्ता वाला साइकिल छात्र छात्राओं को उपलब्ध कराया जाए.

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