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राज्य के 18 पॉलिटेक्निक के एफिलिएशन पर सवाल, छठे सेमेस्टर की परीक्षा से वंचित हुए 67 सौ छात्र

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संस्थानों ने समय पर नहीं दिया एफिलिएशन शुल्क, सरकार ने लिया नीतिगत फैसला

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2016-17, 2017-18, 2018-19 के लिए अधिकतर संस्थानों को नहीं मिला है एफ्लीएशन

Deepak

Ranchi: झारखंड टेक्निकल यूनिवर्सिटी से एफिलिएशन लिये बगैर राज्य भर में 18 से अधिक पॉलिटेक्निक संचालित हो रहे हैं. सरकार ने पूरे मसले पर नीतिगत फैसला भी लिया है कि बगैर एफिलिएशन के कोई भी छात्र परीक्षा नहीं दे सकेंगे.

इन संस्थानों ने 2016-17, 2017-18, 2018-19 के पॉलिटेक्निक के पाठ्यक्रमों को संचालित करने के लिए किसी प्रकार की एफिलिएशन नहीं ली है.

उच्च और तकनीकी शिक्षा विभाग के नीतिगत फैसले से इन संस्थानों में अध्यनरत 67 सौ छात्रों का भविष्य अधर में लटक गया है. अब ये छात्र छठे सेमेस्टर की परीक्षा नहीं दे सकेंगे. इन संस्थानों की तरफ से लगातार तय सीटों पर 2016 से नामांकन लिया जा रहा है.

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जानकारी के अनुसार, सरकार ने सभी संस्थानों को एफिलिएशन लेने के लिए 15 मई 2019 तक का समय दिया था. एफिलिएशन से संबंधित आवेदन में सभी संस्थानों को एक-एक लाख रुपये के डिमांड ड्राफ्ट का भुगतान कर एफिलिएशन लेना था. पर नियत तिथि तक इन संस्थानों की तरफ से किसी तरह की कोई दिलचस्पी नहीं दिखलाई गयी.

संस्थान के प्रमोटरों का कहना है कि सारी गलती खुद टेक्निकल यूनिवर्सिटी की है. विद्या मेमोरियल इंस्टीट्यूट के महाप्रबंधक एचएन सारंगी ने बताया कि हमारे सभी पाठ्यक्रम तथा बच्चों के इनटेक कैपेसिटी से संबंधित मान्यता अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद से मिली हुई है.

टेक्निकल यूनिवर्सिटी (पहले स्टेट बोर्ड ऑफ टेक्निकल एजुकेशन) की ओर से एफिलिएशन को लेकर हमें किसी प्रकार का रीमाइंडर नहीं दिया गया.

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पूरे प्रकरण पर एसबीटीइ के परीक्षा नियंत्रक राजेश प्रसाद से संपर्क करने की कोशिश भी की गयी. लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो पाया. झारखंड टेक्निकल यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार एसबी साह ने बताया कि सब कुछ 2013 में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा दिये गये न्याय आदेश के आलोक में हुआ है.

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उन्होंने बताया कि संस्थानों के प्रमोटरों ने एफिलिएशन को लेकर समय पर कार्रवाई नहीं की, जिसकी वजह से उनकी मान्यता पर सवाल खड़े हो गये हैं.

किन-किन संस्थानों को मान्यता नहीं मिली है

राज्य के पॉलिटेक्निक संस्थानों में पीपीपी मोड पर चल रहे तीन पॉलिटेक्निक समेत 18 निजी पॉलिटेक्निक को मान्यता टेक्निकल यूनिवर्सिटी से मान्यता नहीं मिली है. इस वर्ष उन्हें मान्यता मिलने की संभावना काफी कम है.

अब छात्र परीक्षा को लेकर सभी संबंधित संस्थानों में आंदोलन कर रहे हैं और निदेशक का घेराव समेत तालाबंदी भी कर रहे हैं. जेवियर इंस्टीट्यूट ऑफ पॉलिटेक्निक एंड टेक्नोलॉजी नामकुम, सेंटर फॉर बायोइंफोरमेटिक्स और अल कबीर पॉलिटेक्निक को छोड़ सभी संस्थान राज्य सरकार से असंबद्ध हैं.

संस्थानों के एफिलिएशन का मामला HC में विचाराधीन

इधर झारखंड सरकार ने पॉलिटेक्निक के छठे सेमेस्टर के छात्रों से अपील की है कि वे बहकावे में आकर आंदोलन नहीं करें. झारखंड टेक्निकल यूनिवर्सिटी के कुलसचिव सह सचिव की ओर से रविवार को एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर छात्रों से गैरकानूनी और अनैतिक कार्य नहीं करने का आह्वान किया गया है.

कुलसचिव ने कहा है कि राज्य के कुछ पॉलिटेक्निक द्वारा उच्चतम न्यायालय द्वारा पारित आदेश के आलोक में समय पर एफिलिएशन आवेदन नहीं दिये जाने से ऐसी स्थिति उत्पन्न हुई है. संस्थानों ने राज्य प्रावैधिक शिक्षा परिषद् के पास संबद्धता शुल्क जमा नहीं किया है.

इसकी वजह से नन एफिलीएटेड इंस्टीट्यूट्स को वर्ष 2016-17 और 2017-18 का एफिलिएशन प्रदान नहीं किया गया. सभी असंबद्ध संस्थानों मार्च 2019 में ही सूचना भी दी गयी थी, पर कोई टर्न अप नहीं हुआ. अब इससे जुड़ा एक मामला झारखंड हाईकोर्ट में भी विचाराधीन है. हाईकोर्ट के फैसले के बाद ही सरकार आगे की कार्रवाई करेगी.

संस्थान का नामवार्षिक इनटेक कैपेसिटी
सिल्ली पॉलिटेक्निक (पीपीपी मोड)111
गोला पॉलिटेक्निक (पीपीपी मोड)115
रामगढ़ पॉलिटेक्निक (पीपीपी मोड)115
वीएमआइटी तुपुदाना106
बीआइटीटी मेसरा112
सरोजिनी इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, बुंडू113
पेमिया ऋषिकेश इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, तोपचांची306
रामचंद्र चंद्रवंशी पॉलिटेक्निक इंस्टीट्यूट602
रामगोविंद पॉलिटेक्निक इंस्टीट्यूट, कोडरमा702
आरटीसी इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, ओरमांझी110
खंडोली इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी801
सुभाष इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी802
केके कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग एंड मैनेजमेंट305
गिरिजा इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी102
केके पॉलिटेक्निक302

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