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झंडा गाड़ वाहवाही लूटने के चक्कर में पहाड़ी मंदिर के वजूद को डाल दिया खतरे में

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Pravin Kumar

Ranchi : कभी टिरीबुरू के बाद फांसी टुंगरी के नाम से जाने जानेवाले रांची के पहाड़ी बाबा मंदिर परिसर के ईद-गिर्द पड़ीं दरारें धर्म, आस्था और संघर्ष के गौरवशाली इतिहास के वजूद पर संकट खड़ा कर रही हैं. बाबा पहाड़ी मुख्य मंदिर परिसर की सीढ़ियों से लेकर मुख्य मंदिर के नीचे भी दरारें दिखने लगी हैं. ये दरारें नित नये स्थान पर हर महीने दिखने लगती हैं. मुख्य मंदिर परिसर पहुंचते ही ‘जय पहाड़ी बाबा, प्रगति की ओर बढ़ते कदम’ लिखा हुआ बड़ा सा स्लोगन दिखाई देता है, जो पहाड़ी की हालत से मेल नहीं खाता. स्थानीय दुकानदार का कहना है मंदिर को व्यक्तिगत नाम कमाने का जरिया बना लिया गया है. पहाड़ी मंदिर परिसर में जिस तरह से निर्माण कार्य किये जा रहे हैं, उन निर्माण से पहाड़ कमजोर होता जा रहा है और कमजोर होने के कारण मुख्य मंदिर पर भी संकट के बादल गहराते जा रहे हैं. मुख्य मंदिर के नीचे धर्मशाला हुआ करती थी, जिसमें एक साथ हजारों लोग बैठ सकते थे, जिसे तोड़कर पुन: निर्माण की कोशिश ने मुख्य मंदिर पर संकट ला दिया है.

झंडा गाड़ वाहवाही लूटने के चक्कर में पहाड़ी मंदिर के वजूद को डाल दिया खतरे में
वर्तमान में मुख्य मंदिर परिसर का ऐसा हो गया है हाल.

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टूट गयी हैं सीढ़ियां

पिछले दिनों हुई बरसात से मुख्य मंदिर की दीवार के ठीक नीचे बड़ा सा सुराख हो गया था, जिसे प्रबंधन समिति की ओर से छुपाने के लिए एस्बेस्टस से ढंकने का प्रयास किया गया है. एक ओर जहां पहाड़ी मंदिर की प्रवेश सीढ़ी पर दो स्थानों पर दरार को पाटा गया है, वहीं निकास द्वार की कई सीढ़ियां दरार पड़ने से टूट गयी हैं. यह दरार आज भी कई स्थानों पर स्पष्ट दिखाई देती हैं.

झंडा गाड़ वाहवाही लूटने के चक्कर में पहाड़ी मंदिर के वजूद को डाल दिया खतरे में
पहाड़ी मंदिर की टूट रहीं सीढ़ियां.

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क्या कहते हैं पहाड़ी बाबा के सेवक फागुन पहान

पहाड़ी बाबा के सेवक फागुन पहान कहते हैं, “जब से मंदिर परिसर में पिलर के लिए गड्ढा खोदा गया है, झंडा के लिए पिलर गाड़ा गया है, उस समय से ही पहाड़ी पर कई स्थानों पर दरारें दिखाई पड़ने लगी हैं,  जो बढ़ती जा रही हैं. बरसात का पानी इन दरारों में प्रवेश करेगा, तो मुख्य मंदिर भी गिर सकता है. मुख्य मंदिर के नीचे बड़ा गड्ढा हो गया है, जिसे एस्बेस्टस से ढंकने का प्रयास किया गया है.”

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हिमालय से भी पुराना पहाड़

भूगर्भ शास्त्रियों की मानें, तो पहाड़ी मंदिर हिमालय से भी पुराने पहाड़ों में से एक है. पहाड़ी बाबा मंदिर के नीचे की चट्टानें अब रूपांतरित होकर मिट्टी का रूप ले चुकी हैं. यहां पर किसी भी तरह का निर्माण मंदिर के अस्तित्व पर संकट खड़ा करता है.

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क्या रहा है इतिहास

रांची का पहाड़ी मंदिर समुद्र तल से 2140 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है. पहाड़ी बाबा मंदिर पहले टिरीबुरू नाम से जाना जाता है. इस पहाड़ी बाबा मंदिर को ब्रिटिश हुकूमत के समय फांसी टुंगरी के नाम से जाना जाने लगा. अंग्रेजों की हुकूमत के दौरान इस स्थान को देश की आजादी की जंग लड़नेवाले देशभक्तों और क्रांतिकारियों को फांसी की सजा देने के लिए प्रयोग किया गाया था.

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आजादी के बाद रांची में पहला तिरंगा फहराया था

देश को अंग्रेजी हुकूमत से अजादी मिलने के बाद रांची में पहला तिरंगा भी पहाड़ी बाबा मंदिर की शीर्ष चोटी पर फहराया गया था. इसे रांची के ही एक स्वतंत्रता सेनानी कृष्ण चंद्र दास ने फहराया था. कृष्ण चंद्र दास ने ही यहां पर शहीद हुए देशभक्तों की याद और सम्मान में तिरंगा फहराया था.

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