न्यूज़ विंग
कल का इंतज़ार क्यों, आज की खबर अभी पढ़ें

पुलवामा हमला : मोदी की शूटिंग में व्यस्तता व नेटवर्क का फेल होना अब विवादों में

इस घटना के चुनावी इस्तेमाल को लेकर राजनीतिक दलों ने कई तरह के सवाल उठाये हैं.

eidbanner
59

Faisal Anurag

पुलवामा घटना के बाद अब मोदी सरकार को विभिन्न राजनीतिक दलों की ओर से घेरा जा रहा है. घटना के तुरंत बाद सभी राजनीतिक दलों ने सुरक्षा बलों और सरकार के साथ खड़ा   होने का एलान किया था. लेकिन अब इस घटना के चुनावी इस्तेमाल को लेकर राजनीतिक दलों ने कई तरह के सवाल उठाये हैं. देश में जिस तरह का माहौल बना है उसे लेकर सीआरपीएफ के अधिकारी भी चिंतित हैं. एक बड़े अधिकारी ने बयान दिया है कि सीआरपीएफ के जवानों ने शहादत इसलिए नहीं दिया है कि कुछ लोग देश में सांप्रदायिक माहौल को खराब करें.

घटना के तुरंत बाद प्रधानमंत्री की एक शूटिंग में शामिल होने को लेकर विवाद गहरा गया है. प्रधानमंत्री मोदी इस घटना के बाद  जिम कॉर्बेट में एक प्रचार फिल्म की शूटिंग में हिस्सा लिया. कांग्रेस ने इसे लेकर सवाल उठाया है और सुरक्षा संबंधी हुई चूक के लिए जिम्मेदारी तय करने की भी मांग की है. कांग्रेस के आरोप के बाद सरकार की तरफ से मंत्री रविशंकर प्रसाद ने सफाई दी है कि रामनगर में ऑफिशियल प्रोग्राम में गये थे, बाघ संरक्षण के संबंध में उनका प्रोग्राम था. साथ ही कहा कि कांग्रेस पार्टी का सूचना तंत्र इतना मजबूत है कि पुलवामा में हमला होने वाला है, ये उन्हें पता था, लेकिन हमें तो पता नहीं था. लेकिन वेदर खराब था और पीएम ने वहीं से मीटिंग की और फिर तुरंत से फ्लाइट मंगवाकर निकल गये, दिल्ली में मीटिंग हुई ये भी पता है आपको. पांच दिन के देश और सरकार के साथ पुलवामा हमले पर साथ खड़ा होने का दिखावा करके आज कांग्रेस पार्टी ने अपना सही चेहरा सामने रखा है.

सफाई दे रहे रविशंकर प्रसाद ने यह भी कहा कांग्रेस वाले अब कह रहे हैं कि आरडीएक्स कहां से आया. इंटेलिजेंस फेलियर हुआ क्या बताइए. मुझे एक बात बड़ी अजीब लग रही है कि भाव अलग-अलग होंगे, लेकिन इमरान खान के स्वर और कांग्रेस के प्रवक्ताओं के स्वर में काफी नजदीकी हैं. हालांकि रविशंकर प्रसाद ने बैकफुट पर होते हुए भी कांग्रेस पर हमला बोला है. लेकिन कांग्रेस के अन्य सवालों पर उन्होंने साफ कोई बात नहीं की है.

अब यह खबर प्रचारित की जा रही है कि सूचना मिलने में देरी के कारण मोदी सुरक्षा सलाहकार डोभाल सहित कई अन्य अधिकारियों से नाराज हैं. लेकिन इस खबर के लिए कोई ठोस आधार मीडिया ने पेश नहीं किया है. घटना के बाद विपक्ष ने पूरा संयम बरता और देश के तमाम राजनीतिक दलों की एकजुटता का परिचय दिया. विपक्ष अब भी कह रहा है कि आतंकवाद के खिलाफ वह सरकार के निर्णय के साथ पूरी तरह एकजुट है, यहां यह स्मरण रखना चाहिए कि मुंबई अटैक के बाद भाजपा ने ही सुरक्षा संबंधी चूक का सवाल उठाया था और केंद्र पर जिम्मेदारी तय करने के लिए दबाव बनाया था. तब के महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री विलास राव देशमुख को अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा था और अगंभीरता दिखाने के लिए तत्कालीन गृहमंत्री शिवराज पाटिल को भी अपना पद छोड़ना पड़ा था. इसके बाद देशमुख और पाटिल दोनों की कांग्रेस की राजनीति में अपना पुराना मुकाम हासिल नहीं कर पाए.
पुलवामा की घटना में सुरक्षा संबंधी चूक की बात जम्मू और कश्मीर के राज्यपाल ने भी स्वीकार किया. हालांकि इसे विपक्ष ने भी तब महत्व नहीं दिया. विपक्ष का आरोप है कि भारतीय जनता पार्टी और मोदी सरकार पुलवामा की घटना को चुनावी मुद्दा बनाने का भरपूर प्रयास कर रही है. विपक्ष का आरोप है कि देश की सुरक्षा के सवाल को घरेलू राजनीति का विषय नहीं बनाया जाना चाहिए.

भारत सरकार ने अब कश्मीर में सुरक्षा बलों के लिए विमान के इस्तेमाल का आदेश जारी कर दिया है. पुलवामा घटना के बाद यह खबर प्रमुखता से उभरकर सामने आयी थी कि सीआरपीएफ ने सुरक्षा बलों को कश्मीर भेजने के लिए विमान की मांग की थी. लेकिन गृहमंत्रालय ने उसपर ध्यान नहीं दिया. तब सड़क मार्ग से सुरक्षा बलों को ले जाने का फैसला किया गया.
देश में यह माहौल बनाया जा रहा है कि सवाल हर तरह के सवालों से परे है. उससे कोई भी सवाल नहीं पूछा जाना चाहिए. सवाल पूछने वालों पर देशद्रोही होने का आरोप मढ़ दिया जा रहा है. सवाल करने वालों पर देश में इसके पहले कभी भी इस तरह का माहौल नहीं था. 1962 में चीन से हुए जंग के बाद नेहरू और उनके मंत्री कृष्ण मेनन अनेक सवालों के घेरे में आए थे. नेहरू इस जंग से इतने बेचैन हुए कि दो साल बाद ही उन्हें दिल का दौरा पड़ा. तब के अनेक सेना के उच्चाधिकरियों ने लेख और किताब लिखकर सरकार की चूक को उजागर किया था, बीएम काल की पुस्तक चीन मवर एन अनटोल्ड स्टोरी तो काफी चर्चा में रही थी. इस पुस्तक में अनेक सवाल खड़े किये गए थे. संसद पर आतंकी हमले के बाद भी बाजपेयी सरकार पर कई सवाल उठाए गए थे और कारगिल जंग के बाद भी. लेकिन तब सवाल उठाने को लेकर सरकारें भी संजिदा थीं और किसी पर भी देशद्रोही होने का आरोप कभी नहीं लगा. दुनिया में भी अमेरिका सहित अनेक देशों को जंग या आंतकी हमलों के बाद अनेक तरह के सवालों का सामना करना पड़ा था.

इसे भी पढ़ें – जिन आदिवासियों ने लड़ी जंगल बचाने की लड़ाई, SC का फैसला उन्हें कर देगा लहूलुहान, आंदोलन की राह पर झारखंड के आदिवासी

इसे भी पढ़ें –  जंगल के रक्षक आदिवासियों को SC का फैसला कर देगा लहूलुहान, आंदोलन की राह पर झारखंड के आदिवासी

 

हमें सपोर्ट करें, ताकि हम करते रहें स्वतंत्र और जनपक्षधर पत्रकारिता...

hosp22
You might also like
%d bloggers like this: