न्यूज़ विंग
कल का इंतज़ार क्यों, आज की खबर अभी पढ़ें
bharat_electronics

मुगालते में ना रहे पब्लिक, डीजीपी कार्यालय से नहीं आता है जवाब

153

Akshay Kumar Jha

eidbanner

Ranchi: झारखंड में पुलिस के मामले को लेकर अगर यहां की जनता इस मुगालते में है कि थाना लेवल पर कार्रवाई नहीं हुई तो वो आला अधिकारी से शिकायत करेंगे और कार्रवाई होगी, तो ऐसे मुगालते से जनता को उबरने की जरूरत है. क्योंकि जब एक मीडिया हाउस के सवालों का जवाब डीजीपी कार्यालय और सीआईडी कार्यालय से नहीं आता तो आम जनता की शिकायतों पर इनका क्या रिक्शन होगा समझा जा सकता है. दरअसल न्यूज विंग ने 15 अक्टूबर को “डीजीपी डीके पांडेय ने डेढ़ साल पहले टीपीसी की वसूली रोकने के लिए नहीं की कार्रवाई !” शीर्षक से खबर छापी थी. खबर छापने से पहले 11 अक्टूबर को मामले से जुड़े कुछ सवाल डीजीपी और सीआईडी कार्यालय को भेजे गए थे. 15 अक्टूबर तक जवाब का इंतजार किया गया. जवाब नहीं आने की सूरत में खबर छापनी पड़ी. 23 अक्टूबर को सीआईडी कार्यालय से फोन आया कि दोबारा से सवाल भेजे जाएं. फिर से एक बार सवाल 23 अक्टूबर को भेजे गए. लेकिन करीब दो महीने बीतने के बावजूद दोनों कार्यालय से किसी तरह का कोई जवाब नहीं आया.

क्या था मामला

टंडवा में हर महीने करोड़ों रुपए की अवैध वसूली टीपीसी के उग्रवादी करते रहे और पुलिस उन्हें संरक्षण देती रही. यह बात सीआईडी की उस जांच के बाद और पुख्ता हो गयी थी, जिसमें साफ तौर से खुलासा किया गया था कि यहां हर डीओ होल्डर और हर ट्रक मालिक से अवैध वसूली की जाती है. जितने भी ट्रांसपोर्टर कोयले की ट्रांसपोर्टिंग करते हैं, सबका संचालन वहां की लोकल सेल कमेटी करती है. इन लोकल सेल कमेटियों की बागडोर टीपीसी के सरगना के पास हुआ करती है. सीआईडी की ऐसी गंभीर रिपोर्ट के खुलासे के बाद भी पुलिस महकमा शांत रहा. इस रिपोर्ट के मिलने के बाद डीजीपी डीके पांडेय ने अवैध वसूली रोकने के लिए कोई कार्रवाई नहीं की. अगर कोई कार्रवाई की भी थी, तो वह काफी नहीं था. और न ही कार्रवाई सार्वजनिक हुई.

चतरा के टंडवा निवासी सुधीर प्रसाद नाम के व्यक्ति ने हजारीबाग आयुक्त को एक चिट्टी लिखकर कहा कि आम्रपाली-मगध और पिपरवार में टीपीसी अवैध वसूली कर रहा है. करोड़ों रुपए की अवैध वसूली रोजाना हो रही है. इन पैसों से मेट्रो शहरों में वसूली करने वाले अकूत संपत्ति बना रहे हैं. सुधीर प्रसाद ने चतरा के तत्कालीन एसपी अंजनी कुमार झा पर भी वसूली में शामिल होने का आरोप लगाया था. 04 जनवरी 2017 को हजारीबाग के तत्कालीन आयुक्त डॉ प्रदीप कुमार ने एडीजी (सीआईडी) को एक खत लिखकर इस बात की जानकारी दी. साथ ही पूरे मामले की जांच करने का आग्रह किया. हजारीबाग आयुक्त के इस चिट्ठी के बाद सीआईडी ने आरोपों की जांच की. जांच में जो तथ्य सामने आये वह चौंकाने वाला था. जानकारी के मुताबिक सीआईडी ने जांच रिपोर्ट डीजीपी को भेज दी. लेकिन उस रिपोर्ट पर कोई कार्रवाई नहीं हुई.

तथ्य जो जांच के बाद सामने आए थे

–              तीन लोगों से हुई पूछताछ में यह साफ हुआ कि कोलियरी में ट्रांसपोर्टेशन करने वाली लोकल कमेटी डीओ होल्डर से 254 रुपए प्रति टन की वसूली करती है.

–              आम्रपाली के जीएम से सीआईडी ने पूछा कि क्या आपको भी इस 254 रुपए प्रति टन में से 39 रुपए मिलते हैं. हालांकि जीएम ने इस बात से इनकार किया.

–              आम्रपाली-मगध परियोजना में बड़ी-बड़ी कंपनियां कोयला खरीदती हैं. जिसे ट्रांसपोर्टर रेलवे साइडिंग तक पहुंचाते हैं. इसी दौरान टीपीसी लेवी वसूलता है.

–              कोलियरी में कोयला ट्रांसपोर्टिंग के लिए शांति समिति या संचालन समिति का गठन किया गया है. जिसमें अध्यक्ष सचिव और कई सदस्य होते हैं. आम्रपाली परियोजना समिति की देखरेख टीपीसी के सुप्रीमो करते हैं.

–              टीपीसी के सरगना का खास एक सीसीएल कर्मी हैं, जिसे पिपरवार से आम्रपाली जीएम ने तबादला कराकर लाया है. इस शख्स का आपराधिक इतिहास रहा है.

–              संचालन समिति के कई सदस्यों के नाम से टंडवा थाने में आपराधिक मामले दर्ज हैं.

–              इस परियोजना से लगभग 35 से 40 हजार टन कोयला का उठाव रोज होता है. जिसमें समिति 254 रुपया प्रति टन के हिसाब से वसूली करती है.

–              लेवी का पैसा समिति के सदस्य, लोडर,  टीपीसी उग्रवादी संगठन,  जीएम सीसीएल,  सिक्योरिटी बोर्ड,  प्रदूषण,  मीडिया और इसके अलावा स्थानीय पुलिस के बीच बांटे जाने की बात सामने आयी है. अधिकांश राशि टीपीसी और जीएम सीसीएल को मिलने की बात सामने आई है.

डीजीपी से जो सवाल पूछे गयेः-

1)    क्या 04.01.2017 को प्रमंडलीय आयुक्त, उत्तरी छोटानागपुर प्रमंडल, हजारीबाग की तरफ से एडीजी (सीआईडी) को मगध-आम्रपाली और पिपरवार में करोड़ों की अवैध वसूली की जांच करने के लिए कोई पत्र लिखा गया.

2)    क्या 22.04.2017 को क्षेत्रीय पुलिस उपाधीक्षक (अपराध अनुसंधान विभाग, हजारीबाग) ने पुलिस अधीक्षक अपराध अनुसंधान विभाग, हजारीबाग) को इसी संबंध में कोई रिपोर्ट भेजी थी.

3)    इस रिपोर्ट को सीआईडी की तरफ से डीजीपी कार्यालय यानि आपको सौंपा गया या नहीं.

4)    अगर सीआईडी ने आपको रिपोर्ट सौंपी थी, तो आपके स्तर से क्या कार्रवाई की गयी ?

इसे भी पढ़ें – डीजीपी हो तो ऐसा, सर्वधर्म समभाव से संपन्न हैं डीके पांडेय

इसे भी पढ़ें – डीजीपी डीके पांडेय ने डेढ़ साल पहले टीपीसी की वसूली रोकने के लिए नहीं की कार्रवाई !

हमें सपोर्ट करें, ताकि हम करते रहें स्वतंत्र और जनपक्षधर पत्रकारिता...

Get real time updates directly on you device, subscribe now.

dav_add
You might also like
addionm
%d bloggers like this: