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पारंपरिक ऊर्जा के लिए 333.25 करोड़ का प्रावधान, चार साल बाद भी स्थिति जस की तस

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  • केंद्रीय मापदंड के अनुसार, 60 फीसदी थर्मल पावर और 40 फीसदी पन बिजली जरूरी
  • बिजली चोरी पर अंकुश के लिए 20.25 करोड़ रुपये का किया गया था प्रावधान
  • झारखंड में सोलर एनर्जी है सिर्फ 0.2 फीसदी, पांच फीसदी भी पन बिजली नहीं

Ranchi: राज्य में ग्रीन एनर्जी, पावर प्लांट की बेहतर देख-रेख, पारंपरिक ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए 333.25 करोड़ रुपये का एक्शन प्लान तैयार किया गया था. इस प्लान को केंद्र से भी स्वीकृति मिल गयी थी. लेकिन चार साल के बाद भी इस एक्शन प्लान पर काम नहीं हुआ. सरकारी आंकड़ों के अनुसार राज्य में सिर्फ 0.2 फीसदी ही सौर ऊर्जा है. जबकि पन बिजली सिर्फ पांच फीसदी ही है. केंद्रीय मापदंड के अनुसार किसी भी राज्य में 60 फीसदी थर्मल पावर और 40 फीसदी पन बिजली का होना जरूरी है. एक्शन प्लान में कहा गया था कि ऐसा होने से ग्रीन पावर विकसित होता. प्रदूषण की समस्या नहीं होती. केंद्रीय मापदंड को पूरा किया जाता. हाइडल प्लांट लगने से ग्रिड में स्थायित्व आता. बिजली उत्पादन का खर्च भी न्यूनतम होता.

जंगल से सटे गांवों के लिए था 13 करोड़ का प्रावधान

एक्शन प्लान में जंगल से सटे गांवों के लिए 13 करोड़ रुपये का प्रावधान था. इन गांवों में सौर ऊर्जा के जरीये बिजली दी जाती. नेशनल सोलर मिशन के तहत 25 लाख रुपये खर्च किये जाते. अफसरों के दक्षता विकास के लिए एक करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया था. सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने और बिजली की खपत कम करने के लिए 1.75 करोड़ रुपये खर्च किये जाने थे. लेकिन इस पर भी कोई काम नहीं हुआ.

ऊर्जा बचाने और सब्सिडी के लिए 240 करोड़

शहरी क्षेत्रों में बिजली की खपत कम करने और सब्सिडी देने के लिए 240 करोड़ रुपये खर्च किये जाने थे. लेकिन इस पर कोई काम नहीं हुआ. बिजली चोरी पर अंकुश के लिए नयी तकनीक की बात कही गयी थी. इसके लिए 20.25 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया था. ट्रांसमिशन और डिस्ट्रीब्यूशन लॉस कम (बिजली नुकसान कम करना) करने के लिए एक करोड़ रुपये खर्च किये जाने थे.

पन बिजली के लिए क्या किया गया था प्रावधान

पन बिजली के लिये प्रावधान यह किया गया था कि जहां भी जल विद्युत परियोजना (हाइडल पावर प्लांट) स्थापित किया जायेगा, उस प्लांट से राज्य को 14 फीसदी मुफ्त बिजली मिलेगी. साथ ही जहां प्लांट स्थापित होगा वहां के स्थानीय लोगों को दो फीसदी बिजली दी जायेगी. 12 फीसदी बिजली राज्य सरकार लेगी. शेष बिजली बेची जा सकेगी.

ये योजनाएं हो गयी लंबित

दो हाइडल पावर प्लांट लगाने की जिम्मेवारी जरेडा को मिली थी. ये पावर प्लांट 3-3 मेगावाट के होते. इसके लिए मनोहरपुर और चांडिल में जगह चिन्हित किये गये थे. प्लांट का निर्माण पीपीपी मोड में होता. अन्य प्लांटों के लिए शंख नदी के आस-पास के क्षेत्र, जोन्हा, नेतरहाट, बसिया, कोलेबिरा, सिमडेगा, मानगो, मनोहरपुर, चांडिल, लोहाजीभी, देवघर, गोड्डा और गढ़वा में जगह चिन्हित किये गये थे.

किस मद में कितने किये जाने थे खर्च

  • रिन्यूवल एनर्जी- 1.75 करोड़
  • तकनीकी सुधार व दक्षता- 01 करोड़
  • छोटे पावर यूनिट- 25 लाख
  • डेडीकेटेड सेंटर: 05 करोड़
  • बिजली नुकसान रोकने : 01 करोड़
  • शहरी क्षेत्र में ऊर्जा बचाने व सब्सिडी: 240 करोड़
  • स्ट्रीट लाइट व सरकारी भवनों में बिजली की खपत कम करने: 0.5 करोड़
  • शहरी क्षेत्र में पीपीपी मॉडल पर बिजली: 0.5 करोड़
  • लोगों में जागरुकता: 25 करोड़
  • बिजली उत्पादन को लेकर जागरूकता: 25 करोड़
  • जंगल में सटे गांवों में पारंपरिक ऊर्जा: 13 करोड़
  • अफसरों का दक्षता विकास: 01 करोड़
  • सोलर मिशन: 25 लाख
  • चोरी पर अंकुश के लिये तकनीकी सुधार: 20.25 करोड

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