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रेहला-गढ़वा बाइपास का निर्माण से पहले शुरू हुआ विरोधः 50 घर होंगे विस्थापित, छिन जायेगी सैकड़ों एकड़ कृषि भूमि

ग्रामीणों की मांग है कि दूसरी जगह बाइपास का निर्माण किया जाये

Palamu: एनएच-39 पर बनने वाले रेहला-गढ़वा बाइपास फोरलेन का निर्माण से पहले ही विरोध शुरू हो गया है. बाइपास के निर्माण से कई तरह की परेशानी बताकर ग्रामीण स्थल बदलने की मांग करने लगे हैं. यह भी कहा जा रहा है कि निर्माण स्थल बदलने से सरकार को कई तरह के फायदे होंगे. सरकार को जहां मुआवजा नहीं देना पड़ेगा, वहीं कृषि योग्य भूमि बर्बाद होने से बच जाएगी.

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बड़े पैमाने पर होगा नुकसान 

उल्लेखनीय है कि पलामू जिले के विश्रामपुर प्रखंड के गुरहा कला से संखा गांव के पश्चिमी सीमा तक बाइपास फोरलेन का निर्माण कराया जाना है. बताया जा रहा है कि निर्माण कार्य होने से केतात खुर्द, केतात कला, कमता व संखा गांव के लगभग 50 घर विस्थापित होंगे. इतना ही नहीं घनी आबादी के बीच से लगभग 10,000 गाड़ियों का आवागमन प्रत्येक दिन होगा, जिससे स्थानीय लोगों को प्रदूषण भी झेलना होगा। साथ ही सड़क दुर्घटना में बढ़ोतरी होगी. बता दें कि गढ़वा जिले में बाइपास निर्माण की मांग पिछले दो दशक से की जा रही है.

इस जगह निर्माण की हो रही मांग

ग्रामीणों का कहना है कि पिपरा से गुरहा गांव के मध्य में हजारों एकड़ सरकारी भूमि अवस्थित है. यहां से बाइपास फोरलेन निर्माण करने पर मुआवजा का भुगतान भी नहीं करना पड़ेगा. वहीं राजमार्ग प्राधिकार को लगभग 1 किलोमीटर लंबाई भी कम हो जाएगी. केंद्रीय वित्त विभाग की तरफ से भी यह कहा गया है कि कोविड-19 की वजह से काफी चुनौतीपूर्ण है. ऐसे में कई अप्रत्याशित खर्च व प्राथमिकता में बदलाव की वजह से सोच समझकर खर्च करने की जरूरत बताई गई है. अप्रैल में ही सभी मंत्रालयों को कहा गया है कि अपना खर्च 15 से 20 प्रतिशत तक घटाएं.

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स्थल बदलने के लिए सौंपा गया है आवेदन

संखा गांव निवासी रामनारायण दुबे सहित ग्रामीणों ने पलामू उपायुक्त सहित जिला भू अर्जन पदाधिकारी, परियोजना निदेशक, प्रधानमंत्री, झारखंड के राज्यपाल, मुख्यमंत्री को आवेदन देकर स्थल बदलने की मांग की है. ग्रामीणों का कहना है कि संखा गांव के अधिकांश रैयतों के घर निर्माण एवं जीविकोपार्जन के लिए अतिरिक्त भूमि नहीं है. वर्तमान अधिसूचना में केतात खुर्द, केतात कला, कमता व संखा के लगभग 50 घर विस्थापित होंगे. जीविकोपार्जन को लेकर कृषि योग्य भूमि छीनी जाएगी.

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अधिग्रहित भूमि को लेकर पूर्व से ही मामला कोर्ट में पेंडिंग

सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के द्वारा रेहला-गढ़वा बाईपास फोरलेन की अधिसूचना समाचार पत्रों में प्रकाशित की गई थी, जिसमें प्लॉटों का गलत नंबर प्रकाशित हुआ था. संखा गांव निवासी रामनारायण दुबे ने बताया कि अधिसूचना संख्या 3219 में किए गए गलत प्लॉटों के प्रकाशन के संबंध में जिला भू-अर्जन पदाधिकारी को आवेदन देकर सुधार की मांग की है. किसी विभाग के द्वारा अनदेखी की गई. भूस्वामी के रूप में राम नारायण दुबे को लौटो का भूस्वामी बना दिया गया है जिसमें उनका कोई हक नहीं. साथ ही उन प्लॉटों भू स्वामियों के साथ इनका पूर्व से ही विवाद न्यायालय में लंबित है.

बताया कि प्लोटों के गलत प्रकाशन संबंधी शिकायत को लेकर 2 दिनों में आवेदन पत्र देने की मांग भू अर्जन प्राधिकारी से करने को कहा गया था. इस संबंध में 19 सितंबर 2018 को श्री दुबे के द्वारा आवेदन देकर सुधार की मांग की गई थी, जिसकी विभाग के द्वारा अनदेखी कर 7 जनवरी 2019 को डी 3 का प्रकाशन कर दिया गया. प्रकाशित डी 3 में भी विवादित प्लॉटों के भूस्वामी में कोई फेरबदल नहीं किया गया.

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