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झारखंड के 20 सामाजिक कार्यकर्ताओं पर देशद्रोह का मुकदमा होने के खिलाफ दिल्ली में प्रदर्शन

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New Delhi/Ranchi : झारखंड के खूंटी जिला की पुलिस द्वारा फेसबुक पर की गयी टिप्पणी को लेकर दर्ज किये गये देशद्रोह के मुकदमे के विरोध की आवाज अब दिल्ली पहुंच गयी है. राज्य के 20 सामाजिक कार्यकर्ताओं पर दर्ज देशद्रोह के मुकदमे को लेकर मंगालवर को नयी दिल्ली स्थित झारखंड भवन के समक्ष झारखंड सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया गया. प्रदर्शन को संबोधित करते हुए मुक्ति तिर्की (दलित आदिवासी दुनिया के संपादक और उन 20 सामाजिक कार्यकर्ताओं में से एक, जिनके ऊपर देशद्रोह का मामला दर्ज हुआ है) ने कहा, “हम कोई देशद्रोह वाला काम नहीं कर रहे हैं. हमलोग संविधानसम्मत पांचवीं अनुसूची की बात कर रहे हैं. उसके तहत हम गांव की ग्रामसभा को मजबूत करने की और संसाधनों की लूट के खिलाफ आवाज उठाते हैं, तो सरकार हमें देशद्रोही ठहराने पर तुली है.”

झारखंड के 20 सामाजिक कार्यकर्ताओं पर देशद्रोह का मुकदमा होने के खिलाफ दिल्ली में प्रदर्शन
नयी दिल्ली स्थित झारखंड भवन के समक्ष प्रदर्शन करते सामाजिक कार्यकर्ता.

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प्रतिरोध के स्वर को दबाना चाहती है सरकार : प्रियदर्शी

जनमुक्ति संघर्ष वाहिनी के प्रियदर्शी ने कहा कि झारखंड के 20 सामाजिक कार्यकर्ताओं पर ऐसे अभियोग और धाराएं लगा दी गयी हैं, मानो वे सभी किसी एक संगठन या गिरोह के सदस्य हों. जबकि, हकीकत यह है कि उनमें अलग-अलग पेशे के लोग हैं. कुछ सरकारी सेवक हैं, कुछ बैंककर्मी, कुछ पत्रकार-लेखक, कुछ समाजकर्मी हैं. इनमें से तीन को छोड़कर किसी का आपस में कोई संबंध भी नहीं है. केस होने के बाद ये लोग एक-दूसरे को पहचान रहे हैं. यहां तक कि ये लोग फेसबुक फ्रेंड भी नहीं हैं. ऐसे में ये लोग मिलकर देश तोड़ने का षड्यंत्र कैसे कर सकते हैं? उन्होंने कहा कि असल में सरकार यह सब प्रतिरोध के स्वर को दबाने के लिए कर रही है.

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बेबुनियाद और बेतुका है आरोप : एनपी शाह

विरोध-प्रदर्शन में शामिल एनपी शाह ने कहा कि इन 20 लोगों पर मुख्य रूप से आरोप यह है कि इनमें से अधिकतर लोगों ने सोशल मीडिया पर लिखकर संविधान की गलत व्याख्या की, भ्रामक बातें फैलायीं और खूंटी में लोगों को देशद्रोह के लिए उकसाया, जिस क्रम में 26 जून को खूंटी में आंदोलनरत आदिवासियों ने सांसद कड़िया मुंडा के सुरक्षा गार्डों का अपहरण किया. शाह ने कहा कि यह बहुत ही बेबुनियाद और बेतुकी बात है.

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खूंटी थाना प्रभारी ने वह धारा लगायी, जिसे सुप्रीम कोर्ट पहले ही निरस्त कर चुकी है : बीरेंद्र

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बीरेंद्र कुमार ने सवाल उठाते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने आईटी एक्ट की धारा 66ए/66एफ को दो साल पूर्व ही असंवैधानिक घोषित करते हुए निरस्त कर दिया है. इसके बावजूद खूंटी थाना प्रभारी ने उस धारा का प्रयोग किया, जो असंवैधानिक कदम है. साथ ही यह सुप्रीम कोर्ट की अवमानना भी. ऐसी बचकानी हरकतों से प्रशासन को बचना चाहिए. उन्होंने मांग की कि झारखंड सरकार सभी 20 सामाजिक कार्यकर्ताओं पर लगीं सभी धाराओं को बिना शर्त वापस ले. साथ ही कहा कि झारखंड में अब भी भूख से मौतें हो रही हैं और झारखंड सरकार झारखंडियों की जमीन छीनकर उस पर हाथी उड़ाने को विकास की संज्ञा देने में लगी हुई है.

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बीरेंद्र कुमार ने कहा कि अब तक न ही सरकार ने और न प्रशासन के किसी अधिकारी ने पत्थलगड़ी को असंवैधानिक करार दिया है. सबने यही कहा है कि इसकी गलत व्याख्या की जा रही है. तो सरकार किस लिए है? सरकार के सूचना एवं प्रसार विभाग को अखबारों के माध्यम से पांचवीं अनुसूची के तहत ग्रामसभा के अधिकारों और कर्तव्यों की जानकारी देनी चाहिए. ग्रामीणों को जागरूक करना चाहिए. यह काम जब सरकार ने इतने सालों में नहीं किया, तो कुछ आदिवासी युवकों ने इस काम को किया. हो सकता है कि इनमें कमियां, खामियां हों, तो सरकार को इसकी सही व्याख्या करनी चाहिए न कि उनके ऊपर देशद्रोह जैसा संगीन आरोप लगाया जाना चाहिए. देशद्रोह का मुकदमा करने से सरकार की मंशा साफ झलकती है. सरकार अपने हर क्षेत्र में फेल है, इसलिए उसके खिलाफ उठनेवाली आवाजों को वह दबाने में लगी है, जिसमे वह कभी सफल नहीं होगी. यूनाइटेड अगेंस्ट हेट के नदीम खान ने कहा कि जबसे झारखंड में भाजपा की सरकार बनी है, तबसे बच्चा चोरी और गाय के नाम पर बेगुनाहों को मॉब लिंचिंग कर मारा जा रहा है. जल, जंगल, जमीन की रक्षा का आंदोलन करनेवालों पर देशद्रोह का मुकदमा किया जा रहा है.

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प्रतिनिधिमंडल ने सौंपा मांग पत्र

सभा के बाद एक प्रदर्शनकारियों के प्रतिनिधिमंडल ने झारखंड भवन में झारखंड सरकार के नाम एक ज्ञापन दिया. इसमें मांग की गयी है कि सभी 20 लोगों पर से फर्जी देशद्रोह का मुकदमा वापस लिया जाये. कार्यक्रम को सफल बनाने में विक्रम कुमार, थलापल्ली प्रवीण, रजनी, सुकृति, अनुभूति शर्मा, शांति, मनमीत, श्रुति, वर्तिका, ओम प्रकाश, विजय मिंज, अमन, आलम, सुधांशु, गुलशन टुडू, अविनाश, अनिल, सौम्या सहित अन्य का महत्वपूर्ण योगदान रहा.

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