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जेपीएससी पीटी के पुर्नसंशोधित रिजल्ट का विरोध शुरू, गोलबंद हो रहे हैं छात्र संगठन

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Ranchi : झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) द्वारा जारी छठी जेपीएससी पीटी के पुर्नसंशोधित रिजल्ट का विरोध शुरू हो गया है. राज्य के कई छात्र संगठनों इसको लेकर गोलबंद होना शुरू कर दिया है. छात्र संगठनों का आरोप है कि लंबे इंतजार के बाद इस तरह से आयोग द्वारा पीटी का रिजल्ट जारी करना कहीं न कहीं राज्य के बाहरी लोगों को लाभ पहुंचाने की ओर इशारा कर रहा है. आदिवासी युवा मोर्चा के सुशील उरांव ने कहा कि पिछली बार पीटी में 206 अंक लानेवाले पास कर दिये गये,  जबकि 232 अंक लानेवाले फेल कर दिये गये. इस मामले को लेकर छात्र उग्र हो गये और लगातार आंदोलन करते रहे. हालांकि, जेपीएससी की दलील थी कि रिजर्वेशन की कैटेगरी के हिसाब से कटऑफ मार्क्स तय किया गया था. छात्रों के लगातार विरोध के बाद सरकार एवं आयोग ने आरक्षण रोस्टर में बदलाव करते हुए तीसरी बार संशोधित रिजल्ट जारी किया. पुर्नसंशोधित रिजल्ट में आरक्षण वर्ग के अभ्यर्थियों का ध्यान न रखकर बहारी लोगों को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से न्यूनतम कटऑफ पर रिजल्ट प्रकाशित किया गया.

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बाहरी लोगों को नौकरी देने की हो रही साजिश : शशि पन्ना

आदिवासी युवा मोर्चा के अध्यक्ष शशि पन्ना ने कहा कि झारखंड ही एकमात्र राज्य है, जहां जेपीएससी सिर्फ परीक्षा लेता है और रिजल्ट राज्य सरकार जारी करती है. कुल 326 पद के लिए छठी जेपीएससी की प्रारंभिक परीक्षा (पीटी) हुई थी और नियम के मुताबिक कुल सीट का 15 गुणा रिजल्ट मुख्य परीक्षा के लिए जारी होता है, लेकिन झारखंड में 123 गुणा रिजल्ट जारी हो गया. पीटी में 70 हजार अभ्यर्थी शामिल हुए, इनमें से लगभग 40 हजार को मुख्य परीक्षा के लिए सफल घोषित कर दिया गया. इससे स्पष्ट होता है कि सरकार और आयोग के अधिकारी राज्य के बहारी लोगों को एक साजिश के तहत नौकरी देने का काम रहे हैं.

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ये हैं छात्र संगठनों की मांगें

  • आरक्षण की नियमावली का पालन करते हुए कोटिवार 15 गुणा ही फ्रेश संशोधित रिजल्ट निकाला जाये.
  • संशोधित रिजल्ट में राज्य के स्थानीय छात्रों को महत्व दिया जाये.
  • किसी भी शर्त पर 40 हजार रिजल्ट आयोग की तरफ से गलत है. उसको वापस लिया जाये, ताकि मुख्य परीक्षा में राज्य के अधिक छात्र शामिल हो सकें.

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