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मॉब लिंचिंग और भूख से मौत के खिलाफ दिल्ली के झारखंड भवन के सामने प्रदर्शन

भूख से हुई मौत और मॉब लिंचिंग के खिलाफ दिल्ली के झारखंड भवन के सामने प्रदर्शन

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New Delhi: पिछले दो सालों में झारखंड से दिल-दहला देने वाली खबरें सामने आई है. विकसित होते झारखंड के नारों के बीच एक सच ये भी है कि पिछले दो वर्षों में 13 लोगों की भूख से मौत हुई. हालांकि सरकारी आंकड़ो में इन सब मौतों की वजह कोई ना कोई बीमारी लिखी है. इतना ही नहीं पिछले दो सालों में 13 लोगों को भीड़ ने मार डाला. इसके खिलाफ रोजी-रोटी अभियान के कार्यकर्ताओं ने दिल्ली के झारखंड भवन के सामने प्रदर्शन किया और उपायुक्त को ज्ञापन सौंपा.

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‘भूख से मौतों की सबसे बड़ी वजह सिस्टम की नाकामी’

रोजी रोटी अभियान ने सदस्यों ने अपने ज्ञापन में कहा है कि हम झारखंड में जीने के अधिकार पर बढ़ते हमलों पर अपना चिंता व्यक्त करना चाहते हैं. पिछले दो वर्षों में कम से कम 13 व्यक्तियों की भुखमरी से मौत हो गयी है और 13 व्यक्तियों को भीड़ द्वारा मारा गया है. इन मौतों के लिए ज़िम्मेवार व्यक्तियों के विरुद्ध राज्य सरकार ने न के बराबर कार्यवाई की है. साथ ही, ऐसे हादसे भविष्य में न हो, इसके लिए भी कुछ ख़ास नहीं किया है.

दिल्ली के झारखंड बवन के सामने प्रदर्शन करते कार्यकर्ता
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‘गरीबों को अधिकारों से वंचित करना अपराध’

रोजी रोटी अभियान का दावा है कि जिन परिवारों में भूख से मौतें हुई उनमे से चार परिवारों का राशन कार्ड नहीं था. 11 वर्षीय संतोषी कुमारी का परिवार जन वितरण प्रणाली से राशन नहीं ले पाया, क्योंकि उनका राशनकार्ड आधार से न जुड़े होने के कारण रद्द कर दिया गया था.

प्रेमनी कुंवर का पेंशन उनके आधार से जुड़े किसी और के बैंक खाते में चला गया था. इसकी जानकारी भी उन्हें नहीं थी. दिसम्बर महीने में एतवरिया देवी को सामान्य ग्राहक केंद्र के ऑपरेटर ने पेंशन न देकर वापिस भेज दिया. हालाँकि आधार आधारित बायोमेट्रिक व्यवस्था में उनका सत्यापन हो गया था, लेकिन ऑपरेटर के अनुसार सत्यापन के बाद ही इन्टरनेट नेटवर्क में समस्या आ गयी.

सावित्री देवी का पेंशन 2014 में ही स्वीकृत हो गया था. लेकिन पहली किश्त उनके खाते में अप्रैल 2018 में भेजी गयी क्योंकि उनका खाता आधार से जुड़ा हुआ नहीं था. मार्च 2017 में झारखंड के मुख्य सचिव के आदेश पर लगभग 11 लाख ऐसे राशन कार्ड रद्द कर दिए गए थे. आधार आधारित बायोमेट्रिक सत्यापन व्यवस्था के विफलता के कारण तीन व्यक्तियों का परिवार राशन नहीं ले पाया.

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भूख से हुई मौतों के जिम्मेवार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई न के बराबर

रोजी रोटी अभियान का आरोप है कि झारखंड सरकार ने इन मौतों के लिए ज़िम्मेवार कर्मियों के खिलाफ कार्यवाई तो दूर, उसने कभी माना ही नहीं कि ये मौतें भूख के कारण हुई हैं. आरोप है कि राज्य के खाद्य मंत्री, सामाजिक कार्यकर्ताओं जो झारखंड में भोजन के अधिकार के व्यापक उल्लंघनों को सामने लाते हैं, उनपर ही झूठे और गलत आरोप लगाने में अपना समय गुजार रहे हैं.

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मॉब लिंचिंग की घटनाओं के गुनहगार खुले में घूम रहे हैं

रोजी-रोटी अभियान की विज्ञप्ति में कहा गया है कि झारखंड में मार्च 2016 से अब तक 13 व्यक्तियों को भीड़ द्वारा मारा गया है. इनमें 10 मुसलमान, दो हिन्दू और एक आदिवासी व्यक्ति थे. इन मौतों के अलावा भी राज्य में साम्रदायिक हिंसा के कई हादसे हुए हैं एवं अनगिनत महिलाओं का बलात्कार भी हुआ है. इन हादसों के लिए अधिकांश गुनाहगार खुले आम घूम रहे हैं.

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