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भुइयां जाति की 9 उपजातियों को SC में शामिल करने के लिए केंद्र को भेजा जायेगा प्रस्ताव, सीएम की स्वीकृति

  • भुइयां जाति की 9 उपजातियों में शामिल हैं- क्षत्रीय, पाईक,  खंडित पाईक,  कोटवार,  प्रधान,  मांझी,  देहरी क्षत्रीय,  खंडित भुइयां और गड़ाही/गहरी.
  • डॉ रामदयाल मुंडा जनजातीय कल्याण शोध संस्थान के प्रतिवेदन के आधार पर केंद्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय को भेजा जायेगा प्रस्ताव

Ranchi :  मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने डॉ रामदयाल मुंडा जनजातीय कल्याण शोध संस्थान के उस प्रतिवेदन पर अपनी सहमति दे दी है, जिसमें भुइयां जाति की 9 उपजातियों को अनुसूचित जाति में शामिल किये जाने का प्रस्ताव है. मुख्यमंत्री की सहमति के बाद अब केंद्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय को राज्य सरकार एक प्रस्ताव भेजेगी.

जिन उपजातियों के नाम केंद्र के भेजे जाने हैं उनमें क्षत्रीय,  पाईक,  खंडित पाईक,  कोटवार,  प्रधान,  मांझी,  देहरी क्षत्रीय,  खंडित भुईयां तथा गड़ाही/गहरी प्रमुखता से शामिल हैं.

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क्षेत्रीय सर्वेक्षण का दिया गया है हवाला

डॉ रामदयाल मुंडा जनजातीय कल्याण शोध संस्थान ने क्षेत्रीय सर्वेक्षण कर यह शोध प्रतिवेदन तैयार किया है. इसमें कहा गया है कि क्षत्रीय,  पाईक,  खंडित पाईक,  कोटवार,  प्रधान,  मांझी,  देहरी क्षत्रीय, खंडित भुइयां तथा गड़ाही/गहरी की मूल जाति भुइयां है. यानी इनकी उत्पत्ति अनुसूचित जाति भुइयां से है. इनका गोत्र कच्छप,  कदम,  महुकल,  नाग, मयूर आदि है.

भू-अभिलेख में इन दर्ज उपजातियों का निवास स्थान दक्षिणी छोटानागपुर के रांची,  खूंटी, गुमला,  सिमडेगा,  पूर्वी सिंहभूम, पश्चिमी सिंहभूम, तथा सरायकेला-खरसावां है. हालांकि वर्तमान परिवेश में वे विभिन्न क्षेत्रों में बसे हुए हैं.

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आर्थिक, शैक्षणिक एवं सामाजिक दृष्टिकोण से पिछड़ी है ये उपजातियां

प्रतिवेदन रिपोर्ट में संस्थान ने कहा है कि इन उपजातियों की शैक्षणिक स्थिति काफी कमजोर है इस कारण सभी आर्थिक, शैक्षणिक एवं सामाजिक रूप से पिछड़े है. उपरोक्त उपजातियां राज्य/केंद्र द्वारा अनुसूचित जाति सूची के किसी भी श्रेणी में सूचीबद्ध नहीं है.

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