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प्रचार, दुष्प्रचार और सीसीटीवी

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Kanchan Sharma

आधुनिक दौर में मीडिया का सत्ताकेंद्रित चरित्र बेशर्मी के साथ सामने आया है. इसमें जब सोशल मीडिया के दुरूपयोग का तड़का लग जाए, तो स्थिति और भयावह हो जाती है. लेकिन सीसीटीवी को धन्यवाद, जिसने कई मामले में सच, प्रचार और दुष्प्रचार का फर्क सामने ला दिया है.

दिल्ली का चर्चित अंकित गर्ग मर्डर केस इसका एक महत्वपूर्ण उदाहरण है. मीडिया ने इसे हिंदू-मुस्लिम एंगल देने का भरपूर प्रयास किया. कहा गया कि मुस्लिम लड़की परिवार इसके पीछे है. बाद में सीसीटीवी में पाया गया कि आकाश नामक एक अन्य युवक इसके लिए दोषी है. यह सच सामने आने के बाद दुष्प्रचार करने वाले मीडिया के पास मुंह छिपाने के लिए कोई जगह नहीं थी.

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अब ताजा मामला मोहम्मद नामक बच्चे का है. मालवीय नगर के अज़ीम बेगमपुर का यह मामला मीडिया और सोशल मीडिया में तेजी से फैल गया. उदार पत्रकारिता, ट्विटर और फेसबुक के कई बड़े नाम इस पर टिप्पणी करते पाए गए. इसमें सांप्रदायिक एंगल देखा गया. कुछ लोगों ने दिल्ली सरकार और आप के दो विधायकों को लक्षित करना शुरू किया. ऐसे वीडियो चलाए गए, जिनमें आप विधायक सोमनाथ भारती और अमानतुल्ला खान को गलत ढंग से टारगेट किया गया.

कई वेब मीडिया पत्रिकाओं ने भी इसे सांप्रदायिक रंग देने का प्रयास किया. अधकचरा जानकारियों में झूठ जोड़कर सोशल मीडिया के रणनीतिबाजों ने इसका अच्छी तरह से उपयोग किया. दिल्ली पुलिस पर राज्य सरकार का नियंत्रण नहीं. केंद्र सरकार को विधि व्यवस्था के संचालन का दायित्व है. इसके बावजूद आप सरकार को इस मामले में समुचित कदम नहीं उठाने संबंधी दुष्प्रचार भी किया गया.

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लेकिन दिलचस्प मोड़ तब आया, जब इस वारदात के सीसीटीवी फुटेज सामने आए. पता चला कि यह केवल आपसी लड़ाई थी. दोनों समूहों में बकझक हुई. कुछ समय बाद मदरसा के समूह ने दूसरे समूह पर घूसों से हमला शुरू किया. यह बच्चा अज़ीम सबसे आक्रामक था. उसे वहां खड़ी बाइक पर फेंक दिया गया. उसका सिर बाइक पर टकराने के कारण दुखद मौत हो गई. सीसीटीवी में दिखा कि इसके बाद एक व्यक्ति ने आकर उसे उठाया रहा है और बस्ती की ओर दौड़ गया. दुखद है ​​कि बच्चों की लड़ाई भी हिंदू-मुसलमान के रूप में ब्रांडेड कर दी गई.

लेकिन सीसीटीवी को धन्यवाद. सीसीटीवी किसी अपराध को रोक नहीं सकता है, लेकिन सच बता सकता है, अफवाह रोक सकता है. फ़िलहाल दिल्ली की स्थिति कुछ खास है. आम आदमी पार्टी ने विकास के एजेंडे को सामने रखा है. इससे मुकाबले के लिए सांप्रदायिक अफवाहों की प्रबल संभावना है. लिहाजा, अधिक से अधिक सार्वजनिक स्थानों पर सीसीटीवी लगाना सार्थक होगा.

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दिलचस्प है कि दिल्ली में केजरीवाल सरकार ने सीसीटीवी की महत्वाकांक्षी योजना बना रखी है. लेकिन एलजी और बीजेपी द्वारा इसे बाधित करने की खबरें लगातार आती रही हैं. अब इन घटनाओं ने एक बार फिर सीसीटीवी की जरूरत प्रमाणित कर दी है.

लेखिका एक स्वतंत्र पत्रकार है और दिल्ली में रहती हैं.

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