Jamshedpur

प्रोजेक्ट माही फॉर नेचर ने पर्यावरण सुरक्षा के लिए बायो फ्रेंडली नैपकिन के लिए महिलाओं को किया जागरूक

Jamshedpur : प्रोजेक्ट माही फॉर नेचर की ओर से रविवार को महिलाओं और युवतियों के लिए लेट्स टॉक अबाउट ग्रीन मेंस्ट्रूरेशन कार्यक्रम का आयोजन किया गया. मौके पर मुख्य रूप से सैनिटरी पैड से पर्यावरण को होने वाले नुकसान के बारे में जानकारी दी गई. आम तौर पर पीरिएड्स के दौरान महिलाएं जो सैनिटरी नैपकिन इस्तेमाल करती है वह अधिकांश पर्यावरण के अनुकूल नहीं होता. ये पैड प्लास्टिक औऱ सिंथेटिक मैटेरियल से बने होते है. जिन्हें नष्ट होने में वर्षो समय लग जाते हैं. पर्यावरण सुरक्षा के तहत ग्रीन मेंस्ट्रुरेशन पैड लाभकारी है. जो महिलाओं को बायो फ्रेंडली पैड्स के इस्तेमाल के प्रति जागरूक किया जा रहा है. संस्था की संस्थापक डॉ. श्रद्धा सुमन ने बताया कि ग्रामीण महिलाओं तथा विभिन्न स्कूलों-कॉलेजों में प्लास्टिक व सिंथेटिक के बने सामान्य सैनिटरी नैपकिन के वितरण के दौरान उससे होने वाले दुष्प्रभाव के बारे में जानकारी नहीं दी जाती है. जिस प्रकार से ग्रामीण महिलाओं द्वारा पुराने कपड़े के इस्तेमाल स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है ठीक उसी प्रकार से सिंथेटिक से बने ये पैड्स या नैपकिन पर्यावरण के लिए खतरनाक है. औसतन एक महिला अपनी पूरी जिंदगी में कुल 11 हजार सैनिटरी पैड्स का इस्तेमाल करती है. जो लगभग 125 से 150 केजी प्लास्टिक पैदा करता है. जिसकापर्यावरण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है.बायो फ्रेंडली पैड्स ऑनलाईन भी उपलब्ध हैं. इसका निर्माण उड़ीसा और असम में होता है. माही फॉर नेचर का उद्देश्य प्रत्येक महिला और लड़की को बायो फेंड्रली पैड्स के प्रति जागरूक करना है. मौके पर निधि के़डिया, अविनाश दुग्गर समेत कई महिलाएं उपस्थित थी.

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