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नॉर्थ कर्णपुरा के 1980 मेगावाट सुपर थर्मल पावर प्लांट से अगस्त 2020 से शुरू हो जायेगा उत्पादन

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  • ब्वायलर और टरबाइन का काम पूरा होने के कगार पर
  • यूनिट 1 का काम पूरा

Ranchi: झारखंड के नॉर्थ कर्णपुरा में बन रहे 1980 मेगावाट सुपर थर्मल पावर प्लांट से अगले वर्ष अगस्त 2020 से उत्पादन शुरू हो जायेगा. तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने प्लांट का शिलान्यास किया था. कर्णपुरा में नेशनल थर्मल पावर कारपोरेशन का कोयले पर आधारित विद्युत संयंत्र बनाया जा रहा है. इस प्लांट के लिए अब तक 15300 करोड़ से अधिक की राशि खर्च हो चुकी है. एनटीपीसी की तरफ से भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड को प्लांट के कमीशनिंग की जवाबदेही सौंपी गयी है.

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देश का सबसे बड़ा सुपर थर्मल पावर प्लांट है

जानकारी के अनुसार 1980 मेगावाट के प्लांट की यूनिट-1 का कमीशन अगस्त 2020 में, यूनिट-2 की शुरुआत सितंबर 2020 में तथा यूनिट-3 की शुरुआत अगस्त 2021 तक होगी. यूनिट-1 में ब्वायलर इरेक्शन का काम पूरा हो चुका है. यहां पर टरबाइन का काम भी अंतिम चरणों में है. वहीं यूनिट-2 के ब्वायलर इकाई का काम जुलाई 2016 में शुरू हुआ था, वहीं यूनिट-3 के ब्वायलर निर्माण का काम मई 2017 में शुरू किया गया था. प्लांट के निर्माण को लेकर केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय की तरफ से 30.10.2014 को पर्यावरण क्लीयरेंस दिया गया था. इसके बाद ही यहां पर एयर कूल्ड कंडेंसर लगाने की प्रक्रिया शुरू की गयी. यह देश का सबसे बड़ा सुपर थर्मल पावर प्लांट है. यहां के पकरी बरवाडीह में एनटीपीसी को कोल ब्लॉक भी केंद्र सरकार की तरफ से भी आवंटित कर दिया गया है.

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स्थानीय लोगों का विरोध भी हुआ था

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नॉर्थ कर्णपुरा विद्युत प्लांट को लेकर स्थानीय निवासियों का भी काफी विरोध एनटीपीसी को झेलना पड़ा था. इतना ही नहीं विस्थापितों को देय मुआवजे की राशि को भी बाद में स्थानीय विरोध के कारण एनटीपीसी प्रबंधन ने बढ़ाने का निर्णय लिया था. अब भी 54 एकड़ भूमि के संबंध में अनिर्णय की स्थिति बनी हुई है. पर प्लांट की अधिकतर आधारभूत संरचना का काम पूरा होने की स्थिति में है.

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क्या कहते हैं प्रोजेक्ट हेड

नॉर्थ कर्णपुरा प्लांट के प्रोजेक्ट हेड सह भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड के उप महाप्रबंधक रवि कुमार का कहना है कि भेल को इस परियोजना का काम मिला था. इसमें 90 मीटर की नौ चिमनियां और एयर कूल्ड कंडेंसर बनाया गया है, जो अपने आप में काफी जोखिम भरा डिजाइन था. उन्होंने कहा कि तय समय की तुलना में प्रोजेक्ट के पूरा होने में नये सिरे से समय-सारिणी तय की गयी. यहां से उत्पादित होनेवाली बिजली को सेंट्रल ग्रिड में भेजा जायेगा. झारखंड के कोटे में भी एक चौथाई बिजली का हिस्सा आयेगा.

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