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हजारीबाग में पूरी नहीं हो सकी विकास समिति के गठन की प्रक्रिया, पंचायती राज पदाधिकारी ने बीडीओ को भेजा पत्र

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Hazaribagh : हजारीबाग में 1001 गांवों में आदिवासी विकास समिति और ग्राम विकास समिति का गठन किया जाना था, जिसकी प्रक्रिया समय-सीमा के अंदर पूरी नहीं हो सकी. जिला में कुल 1001 समितियों का गठन किया जाना था, साथ ही उनके बैंक खाते भी खोले जाने थे. सरकार का लक्ष्य था कि जून महीने में सभी समिति का गठन कर बैंक खाते खोल लिये जायें, जो जिला में पूरा नहीं हो सका. इसे लेकर हजारीबाग के जिला पंचायती राज पदाधिकारी ने सात प्रखंडों के बीडीओ को पत्र जारी कर असंतोष प्रकट किया है और समिति के गठन के लिए एक सप्ताह का समय देते हुए कहा है कि समिति का गठन समय-सीमा के अंदर नहीं होता है, तो इसकी पूर्ण जवाबदेही प्रखंड विकास पदाधिकारी की होगी.

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इन प्रखंडों में पूरी नहीं हुई समिति के गठन की प्रक्रिया

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चौपारण, बरही, बरकट्ठा, ईचाक, कटकमसांडी, बड़कागांव और केरेडारी प्रखंड के प्रखंड विकास पदाधिकारियों को पत्र भेजा गया है. इन प्रखंडों में 88 प्रतिशत गांवों में ही समिति का गठन किया गया है और उनके बैंक खाते खोले गये हैं. जबकि, झारखंड सरकार के कैबिनेट के निर्णय के आलोक में 6 मार्च 2018 को कहा गया था कि जून के प्रथम सप्ताह तक राज्य भर में आदिवासी विकास समितियों एवं ग्राम विकास समिति का गठन कर लिया जायेगा और साथ ही समितियों के बैंक खाते खोले जायेंगे. इसका पलान इन प्रखंडों में नहीं किया गया है. कैबिनेट द्वारा 6 मार्च को लिये गये फैसले के आलोक में पूरे राज्य में आदिवासी विकास समिति और ग्राम विकास समिति का गठन जून तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था.

क्या काम है आदिवासी विकास समिति और ग्राम विकास समिति का

गांव के विकास के लिए समिति कार्य करेगी. इसके लिए मौजूदा वित्त वर्ष में सरकार की ओर से राशि भी जारी कर दी गयी है. वहीं, समिति को क्रियाशील बनाने के सरकार की ओर से कहा गया था कि पांच लाख रुपये तक की योजनाओं को समिति द्वारा क्रियान्वित किया जायेगा, जो पंचायत में चलनेवाली योजना से अलग होगी. लेकिन, हजारीबाग जिला में अभी तक समिति के गठन का कार्य भी पूरा नहीं हो सका है.

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समिति के गठन के लिए पंचायती राज विभाग ने अधिसूचना जारी की

राज्य सरकार द्वारा झारखंड पंचायती राज अधिनियम 2001 की धारा 71 के अनुसार ‘ग्राम पंचायतों’ की स्थायी समितियों का गठन कर विकास योजना के संचालन का कार्य सौंपा गया था. इसके लिए पंचायती राज विभाग द्वारा 16 मई को अधिसूचना भी जारी कर दी गयी थी. वहीं, विकास समिति में नौ से लेकर 11 सदस्य होंगे रखने की बात थी, जो गांव के विकास की योजना का संचालन करेंगे. सरकार द्वारा बनायी जा रही समिति में समिति के अध्यक्ष, कोषाध्यक्ष, सचिव आदिवासी होंगे. एससी-एसटी के जिन गांवों में अनुसूचित जनजाति की संख्या 50 प्रतिशत से कम होगी, वहां की ग्राम विकास समिति में एसटी-एससी के दो-दो सदस्य होंगे. मुखिया को विशेष आमंत्रित सदस्य बनाने को कहा था. गैर अनुसूचित क्षेत्र में बीडीओ के नियंत्रण में इन समितियों का कार्य संचालित किया जायेगा, जबकि अनुसूचित क्षेत्र पंचायत स्वशासी परिषद को सोसायटी एक्ट में निबंधन कर योजनाओं का वित्तीय कार्य संचालित करने का निर्णय हुआ था.

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राज्य में कितनी समितियों का किया जाना है गठन

सरकार के फैसले के आलोक में गांव के विकास के लिए आदिवासी विकास समिति और ग्राम विकास समिति के गठन की प्रकिया पूरी करने को कहा गया था. राज्य के कुल 29,883 गांवों में समिति का गठन कर बैंक खाता खोलना था. इनमें से 14200 आदिवासी गांवों के विकास के लिए आदिवासी विकास समिति का गठन किया जाना था.

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