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शिक्षकों की नियुक्ति प्रक्रिया में नियमों की अनदेखी, खाली रह गयी 70 फीसदी सीट

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Ranchi : टेट पास जिलावार शिक्षक नियुक्ति प्रक्रिया में नियमों की अवहेलना की गयी. जिसकी वजह से कई जिलों में 70 प्रतिशत से भी ज्यादा सीटें खाली रह गयी. हाईकोर्ट और सरकार के स्पष्ट आदेश के बाद भी जिलों की 70 प्रतिशत सीटें खाली रह गयी हैं.

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हाईकोर्ट और सरकार ने निर्देश दिया था कि शिक्षा विभाग के कर्मचारियों को पहले से अन्य जिलों में नियुक्त शिक्षकों के नाम हटाकर काउंसलिंग करनी थी. इन जिलों के लिए जारी मेरिट लिस्ट में कई ऐसे अभ्यर्थियों के नाम थे जिनका नाम पहले ही अन्य जिलों में आ चुका है.

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क्या था हाईकोर्ट का निर्देश

निर्देश जारी किया गया था कि पहले अगर किसी जिले के काउंसलिंग में नाम आ गया हो तो उसे किसी भी सूरत में दोबारा मौका नहीं दिया जाएगा. पर संथाल परगना के कई जिलों में दूसरे जिले के काउंसिलिंग में आए नाम नहीं हटाये गए.

इसके अलावा वैसे नामों को भी नहीं हटाया गया जो पहले से किसी अन्य जिलों में नियुक्त किये जा चुके हैं. शिक्षा विभाग की गलती के कारण योग्य अभ्यर्थी नौकरी पाने से वंचित रह गये. वहीं शिक्षा विभाग अपने अधिकारियों की गलती पर कार्रवाई करने की जगह यह कह कर अपना पल्ला झाड़ ले रहा है कि योग्य अभ्यर्थी नहीं मिल रहे इसलिए नियुक्ति नहीं हो रही.

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पहले से नियुक्त फिर भी बुला लिया काउंसलिंग में

रिक्त पदों के हिसाब से जिलों में शिक्षकों की नियुक्ति के लिए काउंसलिंग बुलायी गयी थी. गोड्डा जिले में छठी से आठवीं कक्षा के लिए पारा विज्ञान समान्य विषय के लिए जिन शिक्षकों को बुलाया गया था उसमें गिरिडीह जिला के अमित कुमार का नाम शामिल था. जबकि अमित पहले से ही गिरिडिह जिला के काउंसलिंग में भाग ले चुके थे. गोड्डा जिला में ही पहले से नियुक्त सोनी कुमारी को भी बुलाया गया था. दोनों का नाम जिला स्थापना सूची में 151 और 159वें नंबर पर दर्ज है.

पाकुड़ की लिस्ट में शामिल रुचिका का चयन पहले ही दुमका में हो चुका है. दुमका जिला में पदस्थापित शिक्षकों की सूची में क्रमांक 155वें नंबर पर है. पल्लवी दीक्षित का नाम पाकुड़ और जामताड़ा दोनों में है. पल्लवी ने जामताड़ा के काउंसलिंग में भाग लिया. जिससे पाकुड़ की सीट खाली रह गयी. इसी तरह राज्य की 70 प्रतिशत सीटें खाली रह गयीं.

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