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प्रियंक कानूनगो बने राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग के अध्यक्ष

झारखंड होगा एनसीपीसीआर अध्यक्ष का प्राथमिकता वाला क्षेत्र

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Ranchi : केंद्र सरकार द्वारा प्रियांक कानूनगो को राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) का नया अध्यक्ष बनाया गया है. वे सोमवार 15 अक्तूबर को नयी दिल्ली में अध्यक्ष के पद का पदभार ग्रहण करेंगे. केंद्रीय महिला और बाल विकास विभाग की तरफ से एनसीपीसीआर के अध्यक्ष के रूप में कानूनगो का मनोनयन किया गया है. ये वर्तमान में एनसीपीसीआर के सदस्य (शिक्षा) के रूप में कार्य कर रहे थे.

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नयी शिक्षा नीति का बनाया ड्राफ्ट

31 अक्टूबर 2018 को इनका कार्यकाल समाप्त हो रहा था. वे अब अक्टूबर 2021 तक एनसीपीसीआर के अध्यक्ष रहेंगे. केंद्र सरकार ने शिक्षा का अधिकार कानून 2009 को सख्ती से देश भर में लागू करने के उद्देश्य से इन्हें नयी जिम्मेवारी सौंपी है. इन्हें केंद्रीय कैनिबेट सचिव स्तर के अधिकारी को मिलनेवाली सारी सुविधाएं मिलेंगी. झारखंड में मिशनरीज ऑफ चैरिटी के होम में रहनेवाले बच्चों के मामलों की भी हाल में इन्होंने जांच की थी. साथ ही साथ राज्य के डीजीपी डीके पांडेय को बच्चा चोरी और उन्हें बेचे जाने के मामले पर पूरी रिपोर्ट मांगी थी. इन्होंने नयी शिक्षा नीति का ड्राफ्ट भी बना कर केंद्रीय मानव संसाधन मंत्रालय को सुपूर्द किया है.

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झारखंड रहा है प्राथमिकता वाला क्षेत्र

कानूनगो का प्राथमिकतावाला क्षेत्र हमेशा झारखंड रहा है. राज्य से महानगरों में पलायन करनेवाली युवतियों को पुनर्वासित करने समेत कोडरमा और गिरिडीह में माइका खदान में काम करनेवाले बच्चों को स्कूल से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी है. माइका खदानों में काम करनेवाले बच्चों के लिए इन दोनों जिलों में पूरी तरह आवासीय विद्यालय खुलवाया है.

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बच्चों को शिक्षा का अधिकार

झारखंड के जमशेदपुर और रांची में निजी स्कूल बसों में बच्चों की सुरक्षा को लेकर एनसीपीसीआर की तरफ से बनाये गये मैन्यूअल का पालन करने के लिए कार्यशाला भी आयोजित कराया था. इतना ही नहीं पारंपरिक सेक्स वर्कर के रूप में जुड़े बच्चों का सर्वेक्षण करा कर उन्हें स्कूल से जोड़ने का अभियान भी इन्होंने शुरू किया था. ऐसे बच्चों का देश में पहली बार सर्वेक्षण कराया गया है. इन्होंने मदरसों में रह रहे बच्चों को शिक्षा के अधिकार से जोड़े जाने पर भी काफी मशक्कत की थी. साथ ही साथ सीबीएसइ के स्कूलों में शिक्षा के अधिकार कानून को सख्ती से लागू कराने में भी इनका भूमिका रही है.

 

 

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